क्या जरदारी जाएंगे?

इस्लामाबाद, 16 मार्च (आईएएनएस)। वकीलों के लांग मार्च को लेकर सरकार और देश की बदनामी कराने वाले राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को क्या पद से हटाया जा सकता है? यह सवाल पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में चारों ओर तैर रहा है।

यदि जरदारी पद पर बने भी रहते हैं तो भी एक बात स्पष्ट है कि उनकी प्रतिष्ठा अब जा चुकी है। उनके कई सारे अधिकार वापस लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को दिए जा सकते हैं।

इसके अलावा विश्लेषकों का मानना है कि जरदारी को तीन अन्य तरफ से भी खतरे हैं। पहला यह कि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी इस पूरे मामले में एक हीरो की तरह उभरे हैं।

दूसरा यह कि गिलानी की विपक्षी नेता नवाज शरीफ के साथ नजदीकी बढ़ी है।

गिलानी ने ही सोमवार को इस बात की घोषणा की थी कि सर्वोच्च न्यायालय के बर्खास्त न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी सहित 60 न्यायाधीशों को फिर से बहाल किया जाएगा।

खबर यह भी थी कि शरीफ की पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) गिलानी के पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में फिर से शामिल हो सकती है।

बहरहाल, इन सारी स्थितियों के बीच जरदारी की कुर्सी मात्र शोभा की रह जाती है।

जरदारी को तीसरा या कहें कि चौथा खतरा बहाल किए गए प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मुहम्मद चौधरी से पैदा हो सकता है।

यह अलग बात है कि राष्ट्रपति जरदारी ने यदि न्यायाधीशों के मामले में अपनी टांग फंसाई, तो उसके अपने कारण रहे हैं। लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान में जो कुछ घटा है, उससे यह जाहिर हुआ है कि जरदारी ने खुद को एक ऐसे कोने में खड़ा कर लिया है, जहां से निकल पाना उनके लिए काफी मुश्किल भरा मामला होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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