हिंसा और आतंकवाद का जवाब गांधी विचार से ही संभव

मुंबर्अ में हुए भीषण आतंकवादी हमलों के बाद कुछ लोग रैली, जुलूस के माध्यम से अपने गुस्से को प्रदर्शित करते रहे तो कुछ लोग महात्मा गांधी के विचारों के प्रति आकर्षित हुए हैं। मुंबई सर्वोदय मंडल के कार्यक्रम संयोजक टी.आर.के. सौमेया का कहना है कि हर आतंकवादी हमले के बाद लोग गांधी विचार की ओर मुड़े हैं। पिछले छह माह में गांधी साहित्य की बिक्री दुगुनी हो गई है। नवम्बर में11,000 गांधी पुस्तकों की बिक्री हुई। जुलाई-अगस्त में 22,000 पुस्तकें बिकीं और सितम्बर-अक्टूबर में बढ़कर 50,000 पुस्तकों की बिक्री हुई।

सौमेया ने बताया कि गांधी साहित्य कई भाषाओं में उपलब्ध है। सबसे सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में गांधी की आत्मकथा 'मेरे सत्य के प्रयोग' है। एक चिकित्सक का कहना है कि आज लोगों के दिमाग में राग, द्वेष और नफरत ने घर कर लिया है। अपनी भाषा और विचारों में परिवर्तन लाए बिना समाज में परिवर्तन संभव नहीं है। जैसे-जैसे हिंसा बढ़ती जाती है वैसे-वैसे निराशा और तनाव भी बढ़ते हैं। इसलिए आज ज्यादा से ज्यादा लोग शांति की तलाश में निकलते हैं तो उन्हें गांधी के मार्ग पर ही जाना पड़ता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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