प्रभाकरन के खिलाफ श्रीलंका में चले मुकदमा : पार्टियां

कोलंबो, 20 जनवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका में राजनीतिक पार्टियां चाहती हैं कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के सरगना वेलुपिल्लै प्रभाकरन के जिंदा पकड़े जाने की सूरत में उसे भारत भेजने की बजाए उसके खिलाफ देश में ही मुकदमा चलाया जाए।

मीडिया की रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि श्रीलंका में राजनीतिक पार्टियां चाहती हैं कि कई राजनीतिज्ञों की हत्याओं समेत अनेक जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले प्रभाकरन के खिलाफ देश में ही मुकदमा चले।

सरकार की सहयोगी पार्टी जातिका हेला उरूमया (जेएचयू) के कानूनी सलाहकार उदय गम्मापिला ने कहा, "हमें प्रभाकरन को भारत भेजने की जरूरत नहीं। इसकी बजाए भारत उसे यहां सजा सुना सकता है क्योंकि उसने भारत की बजाए यहां ज्यादा अपराधों को अंजाम दिया है।"

समाचार पत्र 'डेली मिरर' ने गम्मापिला के हवाले से कहा,"प्रभाकरन को मृत्युदंड से कम कोई सजा सुनाई ही नहीं जा सकती। उसने 30 साल से ज्यादा वर्षो तक देश में तबाही मचाई है।"

लिट्टे की 1976 में नींव रखने वाले प्रभाकरन के मुल्लइतिवू में छुपने के कयास लगाए जा रहे हैं। श्रीलंकाई सेना अब इसी इलाके पर कब्जा करने की कोशिशों में जुटी है। कुछ सैन्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभाकरन समुद्र के रास्ते देश से बाहर जा चुका है।

जनता विमुक्ति पैरामुना (जेवीपी)की मांग है कि प्रभाकरन को श्रीलंका में ही सजा सुनाई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि प्रभाकरन को भारत को सौंपने का मतलब उसे हिफाजत देना होगा।

जेवीपी के प्रमुख ट्रेड यूनियन नेता के. डी. लालकंठ ने कहा कि प्रभाकरन को श्रीलंका में 200 साल की कैद की सजा पहले ही सुनाई जा चुकी है।

युनाइटेड नेशनल पार्टी(यूएनपी) के सांसद दयासिरी जयसेकरा ने कहा कि सरकार को प्रभाकरन के खिलाफ श्रीलंकाई कानूनों के तहत ही मुकदमा चलाना चाहिए।

श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय ने हाल में कहा था कि भारत सरकार के औपचारिक अनुरोध पर राजीव गांधी हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाकरन को उसे सौंपा जा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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