ज़ूमा पर मुक़दमा चलाने की अनुमति

अपीलीय अदालत के जजों ने हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को बदल दिया, जिसमें जैकब ज़ूमा पर लगे सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया गया था. उस समय हाई कोर्ट ने कहा था कि जजों ने अपने अधिकारक्षेत्र से बाहर जाकर काम किया.
लेकिन अब अपीलीय अदालत के फ़ैसले के बाद जैकब ज़ूमा पर फिर से मुक़दमा चलाया जा सकेगा. जैकब ज़ूमा अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हैं.
दूसरी ओर एएनसी का कहना है कि जैकब ज़ूमा इस साल होने वाले चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे इसलिए उनके देश का अगला राष्ट्रपति बनने की भी पूरी संभावना है.
जैकब ज़ूमा पर जो 16 आरोप हैं, उनमें भ्रष्टाचार, ग़ैर क़ानूनी रूप से पैसों का लेन-देन और वर्ष 1999 के पाँच अरब डॉलर के विवादित हथियार सौदे में दलाली के मामले शामिल हैं.
'इस्तीफ़ा नहीं'
एएनसी ने कहा है कि पार्टी अपीलीय अदालत के फ़ैसले का स्वागत करती है लेकिन इसमें यह भी ध्यान देने की बात है कि इस फ़ैसले का मतलब ये नहीं है कि ज़ूमा को दोषी ठहरा दिया गया है.
पार्टी का कहना है कि इस फ़ैसले में आरोपों के गुण-दोष पर भी कोई टिप्पणी नहीं है. दूसरी ओर जैकब ज़ूमा ने कहा है कि वे दोषी ठहराए जाने के बाद ही अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे.
पिछले साल सितंबर में ज़ूमा के ख़िलाफ़ आरोपों को तकनीकी आधार पर ख़ारिज कर दिया गया था.
लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट के जज क्रिस निकल्सन ने यह कहकर अपने अधिकारक्षेत्र का अतिक्रमण किया था कि ज़ूमा के ख़िलाफ़ मामला चलाने में राजनीतिक दखल हो सकता है.
कई वर्षों से जैकब ज़ूमा भ्रष्टाचार के आरोपों को झेल रहे हैं. पिछले साल उन्होंने थाबो एम्बेकी को हराकर एएनसी नेता का चुनाव जीता था.
वर्ष 2005 में उन्हें दक्षिण अफ़्रीका के उप राष्ट्रपति पद से इसलिए हटा दिया गया, जब उनके वित्तीय सलाहकार घूस लेने के मामले में दोषी पाए गए. आरोप ये था कि ज़ूमा के लिए उनके वित्तीय सलाहकार घूस लेते थे.
इस मामले में भी ज़ूमा पर मुक़दमा चला लेकिन वर्ष 2006 में मामला ख़त्म हो गया क्योंकि अभियोग पक्ष ने कहा कि वह इस मामले को आगे ले जाने के लिए तैयार नहीं है.
ज़ूमा पर बलात्कार का भी आरोप लगा था लेकिन वर्ष 2006 में उन्हें इस मामले में भी बरी कर दिया गया था.












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