'मनमोहन का बयान युद्ध का अघोषित ऐलान' (लीड-2)
पाकिस्तानी विश्लेषक और सरकारी अधिकारी मनमोहन सिंह के बयान से हैरत में हैं, क्योंकि उनकी छवि नपा-तुला बयान देने वाले सौम्य नेता की रही है। विश्लेषकों का मानना है कि मनमोहन सिंह का बयान दोनों देशों के मौजूदा तनावपूर्ण रिश्ते को खतरनाक बिंदु पर पहुंचा सकता है।
सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर(सेवानिवृत्त) मसूद अख्तर कहते हैं, "मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा बयान तनाव बढ़ा सकता है। ऐसे वक्त जब दोनों देशों के सुरक्षा बल चौकस हैं, इस तरह के बयान से तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। मैं समझता हूं कि भारत उन वांछित अपराधियों को हासिल करने के लिए बेसब्र है जिनकी सूची उसने पाकिस्तान को सौंपी है।"
उनका मानना है कि रिश्ते इस कदर खराब हो गए हैं कि किसी भी पक्ष की ओर से कोई मामूली दुस्साहसिक घटना सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार तलत हुसैन का कहना है मनमोहन सिंह का यह बयान पाकिस्तान के खिलाफ 'युद्ध का अघोषित ऐलान' कहा जा सकता है। उनके मुताबिक इस बयान से प्रतिशोध की बू आती है। कश्मीर मामलों के मंत्री कमर जमान कैरा ने इस बयान को आक्रामक करार दिया है।
उधर एक नए घटनाक्रम में ब्रिटेन की प्रमुख खुफिया एजेंसी 'एम15' के महानिदेशक जोनाथन इवांस ने कहा है कि मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में शामिल हमलावरों के तार ब्रिटेन से भी 'परोक्ष रूप से जुड़े' थे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवादी मुंबई हमलों को दुनिया भर में 'मॉडल' के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
लंदन मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में इवांस ने कहा कि टेलीफोन कॉल्स के रिकार्ड के अनुसार मुंबई हमलों में संदिग्ध तौर पर शामिल आतंकवादी संगठन लश्कर ए-तैयबा के आतंकवादियों ने ब्रिटेन समेत कई देशों के लोगों से बातचीत की थी।
इवांस ने कहा कि इस रिकार्ड में राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने ब्रिटेन समेत कई देशों के लोगों से बातचीत की थी।
इवांस ने कहा कि अमेरिका में हुए आतंकवादी हमलों की तरह मुंबई हमलों को भी आतंकवादी मॉडल के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई में आतंकवादियों ने सार्वजनिक स्थलों पर हमला करने के लिए जो तरीका अपनाया यदि वे इसे मॉडल के रूप में इस्तेमाल करने लगेंगे तो यह सभी के लिए घातक हो सकता है।
इंवास ने कहा कि ब्रिटेन में 2000 संदिग्ध आतंकवादियों की लगातार निगरानी की जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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