ऋण संकट व कमजोर मांग ने उद्योगों की कमर तोड़ी : फिक्की
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। ब्याज दरों में वृद्धि, ऋण की कमी और कमजोर मांग की वजह से देश के उद्योग जगत का आत्मविश्वास डगमगा गया है।
'फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री' (फिक्की) की ओर से करवाए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान समग्र व्यापार विश्वास सूचकांक गिरकर 52.5 अंक पर आ गया। पहली तिमाही में यह सूचकांक 55.3 अंक के स्तर पर था।
सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 महीनों के दौरान ब्याज दरों यानी कंपनियों की वित्तीय लागत में 150-550 आधार अंकों की वृद्धि हो चुकी है। सर्वेक्षण में शामिल 48 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि ऊंची ब्याज दरों की वहज से वे अपनी परियोजनाओं पर या तो पुनर्विचार कर रही हैं या उन्हें स्थगित कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया, "सर्वेक्षण में शामिल लगभग 75 प्रतिशत कंपनियां इस बात पर सहमत हैं कि बैंकों ने ऋण वितरण संबंधी मानदंड कड़े कर दिए हैं। इस वजह से उद्योगों को ऋण की उपलब्धता में जबरदस्त कमी आई है।"
सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली 97 प्रतिशत कंपनियों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरों की वजह से मंझोली और छोटी कंपनियों (एसएमई) पर ऋण का दबाव बढ़ गया है। 82 प्रतिशत प्रतिभागी कंपनियों ने राय दी कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को सरकार की मदद से एसएमई के लिए उत्पादकता प्रोत्साहन रियायतों की पेशकश करनी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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