आर्सेनिक रहित पानी के लिए किफायती तकनीक
लंदन, 29 अगस्त (आईएएनएस)। भूमिगत जलस्रोत के पानी में आर्सेनिक संदूषण से बचाव का किफायती तकनीक खोज लिया गया है। आर्सेनिक से दूषित पानी के कारण दक्षिणी एशियाई देशों के लाखों लोग कैंसर के शिकार होते रहे हैं।
लंदन, 29 अगस्त (आईएएनएस)। भूमिगत जलस्रोत के पानी में आर्सेनिक संदूषण से बचाव का किफायती तकनीक खोज लिया गया है। आर्सेनिक से दूषित पानी के कारण दक्षिणी एशियाई देशों के लाखों लोग कैंसर के शिकार होते रहे हैं।
ब्रिटेन के बेलफास्ट स्थित क्वींस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी किफायती तकनीक विकसित की है, जिससे आर्सेनिक संदूषित जल की समस्या से निजात मिल सकती है।
इस परियोजना के समन्वयक भास्कर सेनगुप्ता ने कहा, "क्वींस के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई यह तकनीक दुनिया की एकमात्र पर्यावरण के अनुकूल, इस्तेमाल में सरल, किफायती और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा सकने वाली तकनीक है।"
यह तकनीक आर्सेनिक संदूषित भूमिगत जल के एक हिस्से को पारगम्य पत्थरों में रिचार्जिग पर आधारित है। इन पत्थरों में जल धारण करने की क्षमता होती है।
यह तकनीक भूमिगत जल में ऑक्सीजन स्तर को बढ़ा देती और मिट्टी से आर्सेनिक निकलने की प्रक्रिया धीमी कर देती है। इस तकनीक से पानी में आर्सेनिक की मात्रा धीरे-धीरे कम होने लगती है।
गौरतलब है कि पूर्वी भारत और बांग्लादेश के लगभग सात करोड़ लोग आर्सेनिक संदूषित पानी और चावल का इस्तेमाल करते हैं। इस वजह से वे कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार हो जाते हैं।
बांग्लादेश में प्रत्येक सौ लागों में से कम से कम एक व्याक्ति आर्सेनिक संदूषण के कारण मौत के कगार पर जा पहुंचते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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