जैव इधन केविकल्पों को अपनाने की जरूरत
नयी दिल्ली 20 फरवरी .वार्ता. जैव इधनों के खत्म हो रहे भंडार और उनके अंधाधुध प्रयोगों से प्रदूषति होते जा रहे पर्यावरण को बचाने के लिए सारे ऊर्जा. पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को आज तेजी से अपनाये जाने की जरूरत है1 इसके अलावा तकनीक के इस्तेमाल को प्रायोगिक स्तर से आगे लाकर रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना जरूरी है
यह निष्कर्ष कल यहां ग्रीन रिवोल्यूशन. पेराडाक्स और पासिबिलिटी विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में सामने आया1 संगोष्ठी का आयोजन वाहन निर्माता कंपनी होन्डा और समाचार क्षेत्र में अंग्रणी बीबीसी वल्र्ड ने संयुक्त रूप से किया1 इसमें भाग लेने के लिए बीबीसी से जुडे श्री जोनाथन चाल्र्स विशेष तौर पर लंदन से यहां आये1 इनके अलावा अक्षय उर्जा मंत्रालय के सचिव वी सुब्रहमण्यम द इनर्जी एंड रिसोसेज इंस्टीट्यूट .टेरी के विशिष्ट सदस्य प्रदीप्त घोष. आईटीसी के प्रबंधन रिंजन खत्री. सुजलान एनर्जी के इंजीनियर चिंतन शाह तथा एक अग्रणी समाचार पत्र के संवाददाता नितिन सेठी ने हिस्सा लिया
संगोष्ठी में श्री घोष ने कहा कि ईधनों की आधुनिक तकनीक से भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है1 मसलन सीएनजी गैस का प्रयोग नये इंजनों के लिए तो ठीक है लेकिन जैसे जैसे इंजन पुराने होते जायेंगे इन गैसों के जलने से वातावरण में फैलने वाले कण सांस लेने में कठिनाई बढायेंगें
शोभित.शिरीष.अजय.रमेश1624जारी.वार्ता












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