भारत की दीवानी थी प्रांस की मीरा

बिलासपुर .20 फरवरी .वार्ता. दुनिया भर के मनीषी सदियों से भारतके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मोहपाश में बंधकर यहां खिंचे चलेआये हैं लेकिन जिन्होने अपना रोम रोम इस देश के लिए समर्पित करदिया उनमें आजादी के महान योद्धा और मनीषी श्री अरविंद कीआध्यात्मिक उत्तराधिकारी मदर मीरा रिचर्ड अल्फासा सबसे ऊपर हैं

महर्ष िअरविंद की परम शिष्या मीरा के माता पिता को शायद हीइस बात का भान रहा हो कि एक दिन मीरा अपने नाम को सार्थककरते हुए कृष्ण के ही देश में जाकर रम जायेगी 1 फ्रांस की राजधानीपेरिस में 21 फरवरी को 1878 को तुर्की और मिस्र मूल के दम्पती के घरजन्मी मीरा ने स्वयं कई बार उल्लेख किया है कि बचपन में सपने मेंजिस व्यक्ति को कृष्ण के रूप में देखती रहीं थी भारत में आकर जब श्रीअरविंद को देखा तो उन्हें लगा वही तो हैं उनके कृष्ण

यूं तो भारत मीरा के सपनों की भूमि है लेकिन उनका इससे भौतिक परिचय तब हुआ जब 1910 में उनके पति भारत यात्रा के दौरान पाण्डिचेरी आये और बेहद हास्यास्पद परिस्थितियों में उनकी भेंट श्री अरविंद से हुई1 इसके बाद 1914 में वह पाण्डिचेरी आई और ग्यारह महीने तक श्री अरविंद के सानिध्य में रहीं 1 दोबारा 1920 में वह भारत आईं और यहीं की होकर रह गईं

राजपूत.शिव.रमेश1712जारी वार्ता

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