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Success Story: 9 साल में खोया पिता को, 3 बार हुई फेल, चौथी बार में किया UPSC क्रैक, गजब है इनकी कहानी

Success Story: 'तुम जितना मुझ पर वार करोगे, मैं उतना ही धूप में तपूंगी, ना थकूंगी, ना रूकूंगी बस सीधे तौर पर आगे बढ़ूंगी', ये बात पूरी तरह से सत्यापित होती है झारखंड की प्रेरणा सिंह पर, जिन्होंने अपनी असफलताओं को ही अपनी शक्ति बना लिया।

सक्सेस स्टोरी की इस कड़ी में आज हम बात करेंगे रांची की प्रेरणा सिंह की, जिनकी कहानी आज लोगों के लिए मिसाल बन चुकी है।

Success Story

आपको बता दें कि रांची की मूल निवासी प्रेरणा सिंह ने मात्र 9 बरस की उम्र में अपने पिता को खो दिया था। पिता के निधन के बाद उनके घर की सारी जिम्मेदारी उनकी मां के सिर आ गई थी। हालांकि उनकी मां को उनके पिता की जगह पशु चिकित्सा विभाग में क्लर्क की नौकरी मिल गई थी।

'वो जल्दी से अपनी शिक्षा पूरी करके नौकरी करें...'

इसलिए प्रेरणा को आर्थिक कष्ट नहीं सहना पड़ा लेकिन फिर भी वो जब भी अपनी मां को घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी संभालते हुए देखती थीं तो उनके मन में हर बार य़े ही ख्याल आता था कि वो जल्दी से अपनी शिक्षा पूरी करके नौकरी करें, जिससे कि उनकी मां क आर्थिक बोक्ष थोड़ा कम हो जाए।

'प्रेरणा की मां ने हमेशा अपनी बेटी को जिम्मेदारियों के बोझ से दूर रखा'

लेकिन प्रेरणा की मां ने हमेशा अपनी बेटी को जिम्मेदारियों के बोझ से दूर रखा, उनकी बस एक ही इच्छा थी कि उनकी बेटी पढ़लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो जाए। प्रेरणा पढ़ने में शुरु से ही मेधावी थीं, उन्होंने 12वीं का बोर्ड तो रांची से किया और इसके बाद दिल्ली के रांडा हाउस में सोशियोलॉजी से स्नातक किया और फिर इस विषय में जामिया से परास्तनतक किया।

प्रेरणा ने की वेदांत बाल्को में जॉब लेकिन फिर नौकरी छोड़ दी

प्रेरणा जब छोटी थीं तो उनके पापा ने उन्हें UPSC के बारे में बताया था, ये बात उनके जेहन में अभी भी जिंदा थी, वो भी अधिकारी बनने का सपना देखा करती थीं। हालांकि डिग्री करने के बाद उन्होंने कुछ दिन तक वेदांत बाल्को में जॉब भी की थी लेकिन उनकाी मन वहां लगा नहीं और उन्होंने UPSC एग्जाम देने का फैसला किया और अपनी मंशा अपनी मां को बताई, उनकी मां ने हमेशा की तरह उन्हें सपोर्ट किया।

3 बार हुई फेल, चौथी बार में किया UPSC क्रैक

और इसके बाद साल 2020 में प्रेरणा ने नौकरी छोड़ दी और परीक्षा की तैयारी में लग गईं लेकिन मुश्किलें तो अब शुरू हुईं। प्रेरणा लगातार तीनों प्रयासों में फेल हो गईं, इसके बाद उन्हें लोगों की आलोचना का शिकार होना पड़ा।

सीएसआर का इंटरव्यू देने पहुंची लेकिन वहां पर...

इस वक्त प्रेरणा का आत्मविश्वास भी थोड़ा डगमगाया और इसलिए उन्होंने करियर के दूसरे विकल्पों की ओर देखना शुरू किया और इसी के तहत वो सीएसआर का इंटरव्यू देने पहुंची लेकिन वहां पर किस्मत ने पलटा खाया, दरअसल इंटरव्यू देने वाले एक अजनबी व्यक्ति ने प्रेरणा से कहा कि उन्होंने काफी मेहनत की है, इसलिए ऐसा लगता है कि उन्हें यूपीएससी का एग्जाम इस बार भी देना चाहिए।

यूपीएससी परीक्षा में 271वीं रैंक हासिल हुई

प्रेरणा पर उनकी बातों का असर हुआ और उन्होंने फिर से मेहनत और जोश के साथ चौथा अटेंप्ट दिया और इसा बार उन्हें यूपीएससी परीक्षा में 271वीं रैंक हासिल हुई। अपनी लगन ने प्रेरणा ने खुद को साबित कर दिया, जो लोग कल तक उनकी हंसी उड़ाते थे, वो ही आज उनकी मिसाल देते हैं।

'कमियों से घबराएं नहीं बल्कि उसे अपनी ताकत बनाएं'

वो इस वक्त आईआरएस कस्टम का हिस्सा हैं। आज वो लोगों के लिए मिसाल हैं। वो हमेशा कहती हैं कि 'सच्ची मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है, हर किसी को प्रयास करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि कोशिश ही कामयाब होती है। इसलिए अपनी कमियों से घबराएं नहीं बल्कि उसे अपनी ताकत बनाएं।'

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