सड़कों पर बेचता था ब्रेड, कर रहा मेडिकल की पढ़ाई, ऑनलाइन वीडियो से पढ़कर NEET क्वालीफाई करने वाले सज्जाद की कहानी
जहां चाह, वहां राह! इस कहावत को सच कर दिखाया है सज्जाद मेहराज ने। सज्जाद मेहराज एक 19 वर्षीय ऐसे युवक हैं जो कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सड़क पर एक ब्रेड की दुकान चलाते थे। उन्होंने NEET UG परीक्षा में 720 में से 650 अंक प्राप्त करके अपनी सफलता का परचम बुलंद किया है।
उन्होंने यह उपलब्धि अपने समय का प्रबंधन करके हासिल की, जिसमें वह दुकान पर आटा गूंथते के साथ-साथ ऑनलाइन लेक्चर सुनने के लिए अपने फोन को प्लग इन किए रहते थे। काम के साथ में पढ़ाई को मैनेज करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
यह भी देखें: Interview: यशस्वी जायसवाल ने कैसे संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी, कोच आरिफ हुसैन ने खोले कई राज

सज्जाद का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा है। एक बार स्कूल में किसी ने उन्हें हतोत्साहित किया था और कहा था, "पटरियों पर नान बेचने वाले को स्कूल में क्यों आने देते हैं, ये स्कूल में आकर क्या ही कर लेंगे।" इस धारणा का विरोध करते हुए साजद की बहन, जो गांव की पहली डॉक्टर हैं, ने उन्हें प्रेरित किया और कहा कि "परीक्षा पास करके सबको गलत साबित करो।" सज्जाद ने अपनी सफलता से कई मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए रास्ता बनाया है।
न्यूज18 को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, "मैंने अपनी NEET तैयारी के लिए फिजिक्स वाला के यकीन बैच से ऑनलाइन पढ़ाई की। जीव विज्ञान NCERT मेरी बड़ी बहन ने पढ़ाया। मैंने अपने दिन इस तरह से योजना बनाए कि मैं ठेले पर काम कर सकूं और साथ ही ऑनलाइन लेक्चर भी अटेंड कर सकूं। मेरी शामें रिवीजन, DPP हल करने और टेस्ट देने के लिए आरक्षित थीं। इस रूटीन का लगातार पालन करने से मुझे परीक्षा पास करने में मदद मिली।"
रोजाना बनाते थे 300 नान
सज्जाद रोज़ाना 7-8 घंटे स्टॉल पर काम करते थे और लगभग 300 नान बनाते थे, साथ ही NEET की ऑनलाइन लेक्चर भी अटेंड करते थे। उनका दैनिक काम सुबह 4 बजे शुरू होता था और वह शाम को 7 बजे घर लौटते थे। सज्जाद बताते हैं कि उन्होंने अपने भाई के साथ जूते और क्रॉकरी का स्टॉल चौथी कक्षा से ही चलाना शुरू कर दिया था। जब वह आठवीं कक्षा में पहुंचे, तो उनके पिता की बीमारी ने परिवार की आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे उन्हें नान बेचने का अपना स्टॉल शुरू करना पड़ा।
आठवीं में किया क्लस्टर में टॉप
हालांकि, इन मुश्किलों ने भी उन्हें हतोत्साहित नहीं किया और उन्होंने आठवीं कक्षा में स्थानीय क्लस्टर में टॉप किया और नौवीं कक्षा में कश्मीर एजुकेशन इनिशिएटिव द्वारा छात्रवृत्ति जीती। वह बताते हैं कि फिजिक्स वाला का एक डिस्काउंटेड कोर्स था जिसकी कीमत 2000 रुपये थी। सज्जाद के स्कूल के हेडमास्टर ने उनके लिए यह बैच खरीदा ताकि वह डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकें।
सज्जाद वर्तमान में GMC, श्रीनगर में दूसरे वर्ष के MBBS छात्र हैं। सज्जाद बताते हैं कि उनके पिता दसवीं पास हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी अपने बच्चों को पढ़ाई से नहीं रोका। उन्हें याद है कि एक बार एक पड़ोसी ने उनके पिता से उनकी बहन की पढ़ाई छुड़वाने के लिए कहा था, लेकिन उनके पिता ने उसे पढ़ने दिया और वह गांव की पहली डॉक्टर बनीं, और सज्जाद दूसरे डॉक्टर बने।
यह भी देखें: झारखंड के रसोई में छिपे स्वाद और सफलता के राज, मसालों से बने सपनों की कहानी












Click it and Unblock the Notifications