UPSC मेन्स एग्जाम में हुआ डेंगू और फिर... आखिरकार IFS बनीं प्रतीक्षा, पसीने की स्याही से लिखे मुकद्दर के पन्ने
IFS Pratiksha Nanasaheb Kale: मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती और किसी भी चीज को शिद्दत से चाहो तो वो हासिल हो ही जाती है। मगर शिद्दत से चाहना ही काफी नहीं होता, मंजिल तक पहुंचने के लिए मेहनत भी करनी पड़ती है। लगातार मेहनत और कड़े परिश्रम के बाद सफलता का हाथ लगना तय होता है। ऐसी ही मेहनत और लगन के साथ प्रतीक्षा नानासाहेब काले ने यूपीएससी का एग्जाम क्लीयर किया। मगर आखिरी मौके पर उनके साथ जो हुआ, उससे कोई भी हिम्मत हार सकता था।
प्रतीक्षा की कहानी हैं उन लाखों लोगों के लिए, जो जिंदगी में कुछ कर गुजरने का सपना तो देखते हैं मगर एक, दो या उससे भी ज्यादा बार फेल होने पर उम्मीदें खो देते हैं। कई ऐसे लोग भी हैं, जिनका जिंदगी पर से ही भरोसा उठ जाता है। ऐसे में ये महिला लाखों-करोड़ों लोगों लिए प्रेरणास्त्रोत से कम नहीं हैं।

जरा सोच कर देखिये किसी इंसान ने नौकरी को छोड़ यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए वो अपनी जी जान लगाए। मगर एक बार नहीं दो बार नहीं तीन बार भी नहीं बल्कि पांच-पांच बार उस इंसान के हाथ असफलता ही लगे। और छठी बार जब उसे किस्मत ने मौका दिया तो अंतिम पड़ाव पर आते-आते किस्मत ने ही उसके साथ ऐसा खेल खेला कि वो घुटने टेकने पर मजबूर हो जाए।
मगर प्रतीक्षा ने घुटने नहीं टेके और वो इस स्थिति में भी मजबूती से खड़ी रही। दरअसल, नौकरी करने की बजाय प्रतीक्षा ने यूपीएससी की तरफ रुख करना सही समझा। इसके लिए जुट गईं बस दिन-रात। मगर कहां चीजें इतनी आसान होने वाली थीं।
साल 2015 का समय था, जब प्रतीक्षा ने यूपीएससी का एग्जाम दिया। प्री भी नहीं निकाल पाईं। इसके बाद लगातार दो सालों तक भी उनके हाथ असफलता ही लगी। इसके बाद साल 2018 में भी परीक्षा तो पास कर ली मगर 4 नंबरों की वजह से सिलेक्शन अटक गया। इसके बाद उन्होंने साल 2019 में भी खुद को मौका दिया।
साल 2019 का समय था, जब प्रतीक्षा को यूपीएससी की भारतीय वन सेवा की परीक्षा देनी थी। इस बार प्री तो क्लीयर हो गया मगर मेंस आते ही गंभीर बीमारी ने उन्हें लपेट लिया। ये बीमारी थी डेंगू। जी हां! प्रतीक्षा को डेंगू हो गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने आराम करने को कहा। घरवालों ने भी ये एग्जाम छोड़ने को कहा मगर वो कहां मानने वाली थी। इसके बाद उन्होंने मेंस एग्जाम दिया। वो इंटरव्यू तक तो पहुंच गई मगर फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सकी।
बता दें कि जब प्रतीक्षा यूपीएससी में अपनी चौथी कोशिश में थीं, तो किसी ने उन्हें राज्य वन सेवाओं में जाने का सुझाव दिया। इसके बाद साल 2018 में उन्होंने महाराष्ट्र राज्य वन परीक्षा दी और पहली ही कोशिश सफल रही। इसके बाद ट्रेनिंग हुई और वन्य जीवन में उनकी रुचि और भी बढ़ गई।
साल 2023 में उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई। साथ ही आईएफएस अफसर बनने के लिए उनकी तैयारियां भी पूरी हो गईं। इसके बाद उन्होंने फिर से एग्जाम दिया और आईएफएस में पूरे देश में दूसरी रैंक हासिल की। अपनी डेंगू की जर्नी को याद करते हुए प्रतीक्षा बताती हैं कि कई चुनौतियां थीं मगर बावजूद इसके कॉल आना ही उनकी सबसे बड़ी सफलता थी।
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