संता ने बेटे को रेलगाड़ी दी
संता ने बेटे को रेलगाड़ी दी
संता अपने बेटे के लिए एक खिलौना रेलगाड़ी खरीद कर लाया। खिलौना देने के कुछ देर बाद जब वह बेटे के कमरे में गया तो देखा कि बच्चा रेलगाड़ी से खेल रहा है और कह रहा है - जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए। रेलगाड़ी दो मिनट से ज्यादा नहीं रुकेगी।
बच्चे के मुंह से यह भाषा सुनकर संता का पारा चढ़ गया। उसने बच्चे की कनपटी पर दो तमाचे लगाए और फिर कभी इस तरह से न बोलने की चेतावनी दी। फिर बोला - मैं दो घंटे के लिए बाजार जा रहा हूं। तब तक तुम सिर्फ पढ़ोगे, समझे!
दो घंटे बाद बाद जब संता लौटकर आया तो बच्चे को पढ़ते हुए पाया। यह देखकर उसका दिल पसीज गया और उसने बच्चे को फिर रेलगाड़ी से खेलने की इजाजत दे दी।
अबकी बार उसने बच्चे को कहते हुए सुना - जिस उल्लू के पट्ठे को उतरना है वो उतर जाए, जिस उल्लू के पट्ठे को चढ़ना है वो चढ़ जाए । गाड़ी पहले ही एक उल्लू के पट्ठे की वजह से दो घंटे लेट हो चुकी है।
तीन आदमी और भगवान
तीन आदमियों ने भगवान से वरदान मांगा।
पहला- मुझे सोने-चांदी से भरा एक कमरा दे दो।
दूसरा- मुझे हीरे पन्ने से भरा एक कमरा दे दो।
तीसरा- मुझे इन दोनों के कमरों की चाबी दे दो।
संता और डिटरर्जेंट
संता (बंता से)- मैंने डिटरर्जेंट से अपनी शर्ट धोई और वो मुझे छोटी हो गई।
बंता (संता से)- फिर तो तू भी उस से नहा ले।












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