मैं रजनीकांत का बेटा नहीं...

संता : हां।
लड़की : तो फिर मुझे चांद, तारे और दुनिया की सारी दौलत-खुशियां दो।
संता : मैं तुम्हारा प्रेमी हूं रजनीकांत का बेटा नहीं।
संता: भाई, लड़की कैसे पटाऊं?
बंता: रास्ता चलते किसी भी लड़की को अचानक पीछे से पकड़ लेना, अगर वो हंस दे तो समझना पट गई।
संता: और उसने शोर मचा दिया तो ?
बंता: तो बोलना दीदी डर गई... दीदी डर गई!
टीचर : कल तुम स्कूल क्यों नहीं आए थे ?
संता: सर, आपके कहने पर डर्टी पिक्चर देखने गया था।
टीचर : मैंने ऐसा कब कहा था ?
संता: आपने ही तो कल कहा था कि विद्या में मन लगाओ।












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