कैसे बढ़ी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई, जिसका नेपाल और चीन ने किया है दावा

नई दिल्ली- नेपाल और चीन ने दावा किया है कि दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई अब करीब तीन फीट बढ़ चुकी है। मंगलवार को नेपाल और चीन के विदेश मंत्रियों ने साझा तौर पर माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई 8,848.86 मीटर होना प्रमाणित किया है। यह ऊंचाई 1954 में तय की गई इसकी ऊंचाई से 86 सेंटीमीटर ज्यादा है। दोनों देशों की ओर से साझा घोषणा से यह बात साबित हो गई है कि इसकी ऊंचाई को लेकर इन दोनों देशों के बीच 66 वर्षों जो का वैचारिक मतभेद था, उसका हल तलाश लिया गया है। क्योंकि, पहले नेपाल का दावा था कि इसकी ऊंचाई 8,848 मीटर (29,028 फीट) है। जबकि, चीन इसकी ऊंचाई सिर्फ 8,844 मीटर (29,017 फीट) मानता था। नई ऊंचाई करीब 29,031 फीट है, जो नेपाल के पुराने दावे से करीब 3 फीट ज्यादा है।

1954 में सर्वे ऑफ इंडिया ने नापी थी एवरेस्ट की ऊंचाई

1954 में सर्वे ऑफ इंडिया ने नापी थी एवरेस्ट की ऊंचाई

शायद दुनिया के किसी भी पर्वत चोटी की ऊंचाई को लेकर इतनी ज्यादा बहस कभी नहीं हुई है, जितना कि हिमालय के माउंट एवरेस्ट को लेकर हुआ है। कभी यह सवाल उठा है कि नाप सिर्फ चट्टान की होनी चाहिए या फिर उसमें उसके ऊपर जमा हुए बर्फ की भी। 1954 में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई सर्वे ऑफ इंडिया ने नापी थी। तब जीपीएस जैसी सुविधाएं नहीं थीं। लेकिन उसने थियोडोलाइट और चेन जैसे उपकरणों की मदद से ही उसकी सटीक ऊंचाई 8,848 मीटर नापी थी। सर्वे ऑफ इंडिया ने जो ऊंचाई तय की, उसे पूरी दुनिया ने माना, लेकिन चीन कभी भी इसे मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। 1999 में इसकी ऊंचाई को लेकर एक और सर्वे हुआ था। तब इसकी अनुमानित ऊंचाई 29,035 फीट या करीब 8,850 मीटर बताई गई थी, जो कि अब तक का सबसे ज्यादा था। इसे अमेरिका की नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी ने स्पॉन्सर्ड किया था। लेकिन, इस सोसाइटी को छोड़कर सारी दुनिया वही सर्वे ऑफ इंडिया वाले 8,848 मीटर की ऊंचाई को ही मंजूर किया, सिर्फ चीन को छोड़कर।

नई ऊंचाई कब नापी गई ?

नई ऊंचाई कब नापी गई ?

नेपाल में 2015 के अप्रैल में आए भयानक भूकंप से पहले तक शायद नेपाल के सर्वे विभाग (नापी विभाग) ने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई नापने का कभी मन नहीं बनाया था। लेकिन, इस भूकंप के बाद वैज्ञानिकों में यह जिज्ञासा बढ़ी कि क्या भूकंप ने एवरेस्ट की ऊंचाई को भी प्रभावित किया है? नेपाल में निजाम बदल चुका था। वहां की सरकार ने तय किया कि वह इस चोटी की ऊंचाई को वह अब खुद नापेगा, बजाय इसके कि सर्वे ऑफ इंडिया के 1954 के नतीजों को आगे भी माने। इसमें उसे न्यूजीलैंड का तकनीकी सहयोग मिला, जिसके इस क्षेत्र में नेपाल के साथ पुराने और अच्छे ताल्लुकात रहे हैं। 1953 में पहली बार एवरेस्ट फतह करने वाले न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाली शेरपा तेंजिंग नोर्गे दुनिया में पर्वतारोहण के निर्विवाद ब्रैंड एंबेसडर हैं। एवरेस्ट की ऊंचाई नए सिरे से नापने के लिए न्यूजीलैंड सरकार ने नेपाली नापी विभाग को ग्लोबल नैविगेशन सैटेलाइट और ट्रेंड टेक्नीशियन उपलब्ध करवाए थे। ओटागो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक क्रिस्टोफर पर्सन को इसके लिए विशेष तौर पर नेपाल भी भेजा था।

एवरेस्ट की नई नापी अभियान में कैसे घुस गया चीन ?

एवरेस्ट की नई नापी अभियान में कैसे घुस गया चीन ?

चीन का दावा है कि उसने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई को अलग से नापा है। जबकि, नेपाल ने यह काम पिछले साल के शुरू में ही पूरा कर लिया था। उसके बाद इसकी 120 लोगों की टीम, जिसमें फिल्ड वर्कर और डाटा एनालिस्ट भी शामिल थे, जुटाए गए डाटा की प्रोसेसिंग में जुट गए और नतीजे को इकट्ठा करने में लगे रहे। इस काम में करीब चार महीने लग गए, लेकिन कोविड महामारी की वजह से इनका काम बाधित हुआ। चीन ने अपनी नापी इस साल की शुरुआत में पूरा कर लिए जाने का दावा किया है। इसके बाद दोनों देशों ने एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग साइन किया कि वे अपने नतीजे साझा तौर पर सार्वजनिक करेंगे। यानि, माउंट एवरेस्ट की जो नई ऊंचाई 86 सेंटीमीटर बढ़ी हुई बताई गई है, उसमें चीन और नेपाल की नई परवान चढ़ी आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक दोस्ती का पैमाना भी जुड़ा हो सकता है।

माउंट एवरेस्ट को नापने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया?

माउंट एवरेस्ट को नापने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया?

करीब आधे घंटे के वेबिनार में नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली और उनके चीनी समकक्ष यांग यी ने काठमांडू और बीजिंग से सीधे माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई की घोषणा की और दोनों देशों के आपसी सहयोगी की तरफदारी करते रहे। उन्होंने इसका थोड़ा भी तकनीकी ब्योरा नहीं दिया। हालांकि, नेपाली नापी विभाग के संयुक्त सचिव और प्रवक्ता दामोदर धाकल ने कहा, 'हमने ऊंचाई नापने के लिए पुराना तरीका अपनाया है, साथ ही साथ ग्लोबल नैविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम का भी इस्तेमाल किया है। तथ्य ये है कि चाइनीज और नेपाली दोनों के डाटा (आश्चर्यजनक रूप से) सटीक पाए गए हैं।'

नई ऊंचाई से नेपाल को क्या होगा फायदा ?

नई ऊंचाई से नेपाल को क्या होगा फायदा ?

नेपाल के लिए यह गर्व का विषय है कि उसने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी की नई ऊंचाई नापने की क्षमता हासिल कर ली है। नेपाल के एक बड़े अधिकारी ने कहा है, 'हम उस पर्वत की ऊंचाई तय करने में पहली बार शामिल हुए हैं, जो हमारी पहचान से जुड़ी हुई है। दूसरा, विश्व समुदाय और एडवेंचर टूरिज्म में शामिल लोगों के लिए यह बढ़िया मौका है कि वह नए रिकॉर्ड बनाने के लिए पहले से ज्यादा ऊंचे माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई कर सकेंगे।'

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