Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

गोविंद बल्‍लभ पंत जयंती: जिन्होंने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ, हिंदी को भी सम्मान दिलाने की जंग लड़ी

गोविंद बल्‍लभ पंत जयंती: जिन्होंने आजादी की लड़ाई के साथ-साथ, हिंदी को भी सम्मान दिलाने की जंग लड़ी

नई दिल्ली, 10 सितंबर: भारत के स्वतंत्रता सेनानी पंडित गोविंद बल्‍लभ पंत की आज (10 सितंबर) जयंती है। पंडित गोविंद बल्‍लभ पंत आजादी के एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के अपना काम पूरा किया। गोविंद बल्‍लभ पंत ने ना सिर्फ आजादी की लड़ाई लड़ी बल्कि हिंदी को भी सम्मान दिलाने का काम किया। भारत रत्न से सम्मानित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे और भारत के चौथे गृह मंत्री थे। गोविंद बल्‍लभ पंत को 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। गृहमंत्री के तौर पर गोविंद बल्‍लभ पंत ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का काम किया था। उन्होंने भारत के राज्यों को भाषा में विभक्त करने का भी काम किया था।

Govind Vallabh Pant Jayanti

जानिए गोविंद बल्‍लभ पंत के बारे में अहम बातें

- गोविंद बल्‍लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित खूंट गाव में हुआ था। गोविंद बल्‍लभ पंत का नाम गोविंदी बाई और पिता का नाम मनोरथ पंत था। बचपन में ही गोविंद के पिता की मौत हो गई थी। उसके बाद कारण उनकी परवरिश उनके नाना ने की है। 1904 में गोविंद बल्‍लभ पंत अल्मोड़ा छोड़ कर इलाहाबाद चले गए थे।

- गोविंद बल्‍लभ पंत ने 1905 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और 1909 में लॉ की डिग्री ली।

-एक वकील के तौर पर काकोरी मुकद्दमें में गोविंद बल्‍लभ पंत को पहचान दिलाई। कहा जाता है कि गोविंद बल्‍लभ पंत का मुकदमा लड़ने का तरीका निराला था।

- गोविंद बल्‍लभ पंत महात्मा गांधी को अपना आर्दश मानते थे। वकालत के सिलसिले में गोविंद बल्‍लभ पंत ने रानीखेत और काशीपुर में एक प्रेम सभा नाम के संस्था का गठन किया था। जिसका मकसद शिक्षा और साहित्य के प्रति जनता को जागरूक करना था।

-दिसंबर 1921 में गोविंद बल्‍लभ पंत ने महात्मा गांधी जी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन के जरिए खुली राजनीति में उतर आए थे।

-1 अगस्त को जब 1924 में काकोरी कांड में जब र प्रदेश के कुछ नवयुवकों ने सरकारी खजाना लूट लिया था तो उनके मुकदमें की पैरवी के गोविंद बल्‍लभ पंत ने पूरी कोशिश की।

-1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार और 1930 में नमक सत्याग्रह में भी गोविंद बल्‍लभ पंत ने हिस्सा लिया था।

-मई 1930 में गोविंद बल्‍लभ पंत देहरादून जेल में भी गए थे।

- 1937 में गोविंद बल्‍लभ पंत संयुक्त प्रांत के प्रथम प्रधानमंत्री बने थे।

- 1946 में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भी गोविंद बल्‍लभ पंत थे।

-10 जनवरी 1955 को गोविंद बल्‍लभ पंत भारत के चौथे गृह मंत्री बने।

- 7 मार्च 1961 को गोविंद बल्लभ पंत का निधन हो गया था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+