क्या NITI आयोग Public Sector Banks को निजी हाथों में सौंपेगा ? FACT चेक में जानिए पूरी हकीकत
क्या नीति आयोग कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने की योजना बना रहा है ? फैक्ट चेक में इस बात की पड़ताल

बैंकों का निजीकरण हमेशा बड़ा सवाल रहा है। इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स आने के बाद NITI आयोग की नीति पर अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इन दावों की पड़ताल की है। पीआईबी ने उन रिपोर्ट्स को फर्जी करार दिया है जिनमें दावा किया गया है कि नीति आयोग ने बैंकों के निजीकरण के लिए Public Sector Banks की सूची जारी की है।
दरअसल, फैक्ट चेक में उन मीडिया रिपोर्ट्स को फर्जी पाया गया है जिनमें सार्वजनिक बैंकों की सूची जारी करने का दावा किया गया। पीआईबी ने शुक्रवार को कहा, दावा किया गया है कि नीति आयोग ने निजीकरण के लिए सार्वजनिक बैंकों की सूची जारी की है। PIB ने कहा, मीडिया रिपोर्ट्स में उल्लिखित ऐसी कोई सूची नीति आयोग ने कभी भी किसी फॉर्मेट में साझा नहीं की।
फर्जी निकला दावा
पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में बैंकों के निजीकरण संबंधी खबरों को झूठा पाया और आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर नोटिफिकेशन जारी किया। पीआईबी ने 6 जनवरी, 2023 को जारी बयान में कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण पर नीति आयोग की सूची के संबंध में मीडिया में एक काल्पनिक संदेश प्रसारित किया जा रहा है।"
पूरा मामला क्या है
बैंकों की सूची को फर्जी बताते हुए पीआईबी ने कहा, सूचित किया जाता है कि नीति आयोग ने किसी भी रूप में सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण संबंधी कोई सूची शेयर नहीं की है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि नीति आयोग ने उन सार्वजनिक बैंकों की सूची जारी की है जिनका निजीकरण होने जा रहा है।
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बैंकों की फर्जी सूची में पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम हैं। वास्तव में बैंकों की ये लिस्ट 2019 में प्रकाशित की गई थी।

Fact Check
दावा
क्या NITI आयोग Public Sector Banks को निजी हाथों में सौंपेगा ?
नतीजा
बैंकों की ये लिस्ट 2019 में प्रकाशित की गई थी। निजीकरण के दावे फर्जी हैं।












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