क्या सच में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान सीताराम येचुरी से पढ़वाया था माफीनामा? जानें सच
Sitaram Yechuri news: भारत में बीते 5 दशकों से वामपंथ का झंडा बुलंद करने वाले कॉमरेड सीताराम येचुरी नहीं रहे। कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी 72 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कर गए। 17 साल की उम्र में तेलंगाना आंदोलन से राजनीति की शुरूआत करने वाले सीताराम येचुरी को इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगाई गई इमरजेंसी के दौरान बड़ी पहचान मिली।
ये येचुरी ही थे जिनकी मोर्चेबंदी से मजबूर होकर इंदिरा गांधी को जेनएनयू के वाइस चांसलर के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। येचुरी के बीमारी पड़न के बाद से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें दावा किया गया है कि इमरजेंसी का विरोध करने पर सीताराम येचुरी से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने माफीनामा सबके सामने पढ़वाया था। आइए जानते हैं क्या आखिर इस वायरल पोस्ट की सच्चाई?

वायरल पोस्ट में क्या किया गया दावा?
एक पुरानी फोटो जिसमें लोगों की भीड़ में इंदिरा गांधी खड़ी हैं और छात्रनेता सीताराम येचुरी हाथ में एक कागज लेकर कुछ पढ़ रहे हैं। इस फोटो को शेयर करते हुए दावा किया गया है कि 1975 में आपातकाल में इंदिरा गांधी पुलिस के साथ जेएनयू पहुंची और वहां लीडर सीताराम येचुरी जो उस समय जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष थे उनकी पिटाई करवाई और इंदिरा गांधी से इस्तीफा मांगने और इमरजेंसी का विरोध करने के लिए माफीनामा पढ़ने के लिए मजबूर किया था।
क्या सच में इंदिरा गांधी ने सीताराम येचुरी से पढ़वाया था माफीनामा?
हालांकि इस पोस्ट में किया गया दावा बिलकुल झूठा है। ये वायरल फोटो जेएनयू की नहीं बल्कि इंदिरा गांधी के घर के बाहर की है। बता दें येचुरी जब जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। उस समय इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर थी उन्हें पद से हटाने के लिए सीताराम येचुरी ने छात्रों के संग इंदिरा गांधी के घर के सामने प्रदर्शन किया था।
इंदिरा गांधी के सामने फिर क्या पढ़ रहे थे सीताराम येचुरी
वायरल फोटो में सीताराम येचुरी जो पढ़ रहे हैं वो कोई माफीनामा नहीं बल्कि छात्रों का मांग पत्र है। जिसे वो इंदिरा गाधी के सामने पढ़कर सुना रहे हैं।
इमरजेंसी के खिलाफ सीताराम येचुरी निकाला था मोर्चा
बता दें 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लागू करने का ऐलान कर दिया था। उस समय दिल्ली जेएनयू में अर्थशास्त्र विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे। इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी का विरोध करने के लिए उन्होंने संयुक्त स्टूडेंट्स फेडरेशन गठित किया था और छात्रों के संग येचुरी ने इंदिरा गांधी के आवास तक इमरजेंसी के विरोध में मोर्चा निकाला था।
इंदिरा गांधी को तानाशाह बताते हुए मांगा था इस्तीफा
सीताराम येचुरी जब छात्रों के झुंड के साथ विरोध-प्रदर्शन करते हुए पहुंचे तब इंदिरा गांधी ने विरोध का कारण पूछा तब येचुरी छात्रसंघ का मांग पत्र पढ़ने लगे जिसमें लिखा था तानाशाह को दिल्ली विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर पद पर नहीं रहना चाहिए।
इंदिरा गांधी को देना पड़ा था इस्तीफा
ये येचुरी का ही विरोध था कि इमरजेंसी के दौरान जब इंदिरा गांधी विवि में एक कार्यक्रम करना चाहती थी वो नहीं हो पाया। छात्र संघ के प्रदर्शन से हार कर आखिरकार इंदिरा गांधी को विवि के वाइस चांसलर के से इस्तीफा देना पड़ा।
@KarunaGopal1 @ShainaNC @smritiirani @TVMohandasPai @narendramodi @fayedsouza @ShivAroor @amitmalviya @RahulGandhi @SachinPilot Now i wud like d Cong. stooges to stand up n admit to wat dey did at JNU. Amit shah made a mistake to stick w/democratic response to dese Cong.hoodlums pic.twitter.com/A6lT6aheU4
— Fighting for d Truth (@FightingForLif6) January 10, 2020
जेल में अरुण जेटली के साथ बंद थे सीताराम येचुरी
हालांकि इंदिरा गांधी के विवि से इस्तीफा दिए जाने के चंद दिन बाद ही येचुरी को पुलिस ने उनके घर से अरेस्ट कर लिया और इमरजेंसी के दौरान उन्हें जेल में डाल दिया गया। खास बात ये है कि जिस जेल में कट्टर विचारधारा के सीताराम येचुरी थे उसी जेल में अरुण जेटली भी थे।

Fact Check
दावा
इंदिरा गांधी ने JNU छात्रसंघ अध्यक्ष सीताराम येचुरी से पढ़ावाया था माफीनामा
नतीजा
इंदिरा गांधी ने सीताराम येचुरी से नहीं पढ़वाया था माफीनामा












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