क्या अंतिम सांसे गिन रहा है राजद?

गंभीर संकट से गुजरता राजद
बिहार में राजद अंतिम सांसें गिन रहा है। इसके नेता पाला बदलने को बेचैन हैं। वे सुरक्षित भविष्य चाहते हैं। फिलहाल इन्हें जदयू के नीतीश कुमार ज्यादा पसंद आ रहे हैं। जदयू को जबरदस्त सफलता मिलने के बाद राजद के विधायकों की नजर नीतीश कुमार की ऒर है। 13 जून को बिहार और झारखंड के दो नेताओं ने सबको आश्चर्य में डाल दिया। बिहार में राजद सुप्रीमो के करीबी और विश्वासपात्र माने जाने वाले श्याम रजक ने इस्तीफा दे दिया। वहीं, हजारीबाग के सांसद और भाजपा के उपाध्यक्ष यशवंत सिन्हा ने भी त्यागपत्र दे दिया, जिस वक्त यह मामला सामने आया राजनाथ नयी दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे।
राजनाथ ने इस दौरान कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यशवंत सिन्हा के पहले भाजपा के ही जसवंत सिंह ने पार्टी पर अंगुली उठायी थी। यशवंत ने अपना त्यागपत्र आलाकमान को भेज दिया। इस्तीफे में उन्होंने राजनाथ और अरुण जेटली पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद एलके आडवाणी ने इस्तीफा देकर मिसाल कायम की। परंतु कुछ नेता पद से चिपके रहे। उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
श्याम ने भी दिया झटका
इधर, श्याम रजक का इस्तीफा विधानसभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने स्वीकार कर लिया। श्री रजक ने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। वे राजद के टिकट पर 1995 से लगातार तीन बार फुलवारीशरीफ (सुरक्षित) क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य रहे हैं। वे नौ साल तक राज्यमंत्री भी थे। उन्होंने आरोप लगाया है कि राजद के कुछ नेता जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित कर रहे हैं। राजद सुप्रीमो इस पर मौन हैं। उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। श्याम रजक ने जदयू में जाने के संकेत दिये हैं। उनके इस फैसले से राजद को करारा झटका लगा है।
श्याम हमेशा लालू की रक्षा में ढाल बने रहे हैं। इसका प्रभाव निश्चित रूप से राजद पर पड़ेगा। लालू प्रसाद ने फिलहाल इसपर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं दी है। राजद के कई नेता लालू से खफा चल रहे हैं। यह अलग बात है कि ऍसे नेता अभी भी जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कई नेता पाला बदलने की तैयारी में हैं परंतु वे नीतीश कुमार की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं।
राजद वर्तमान में गंभीर संकट काल से गुजर रहा है। राजद के कई विधायकों को लगने लगा है कि लालू अब डूबते सूरज हैं जबकि नीतीश उगते सूरज। यही कारण है कि ऐसे नेता नीतीश से आलिंगन के लिए आतुर हैं। भाजपा संक्रमणकाल से गुजर रही है। पार्टी में वाजपेयी जैसे नेताऒं की घोर कमी है। आडवाणी भी पार्टी में पहले की तरह रुचि नहीं ले रहे हैं। ऍसे में पार्टी का बिखंडन तय माना जा रहा है।
[रविकांत प्रसाद पत्रकार हैं और ठेठ राजनीतिक मुद्दों पर लिखते हैं।]
-
Droupadi Murmu vs Mamata Banerjee: राष्ट्रपति के अपमान पर भाजपा–तृणमूल आमने-सामने, क्या कहता है प्रोटोकॉल? -
Parliament Today:संसद में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, राहुल गांधी की सदस्यता भी घिरी -
West Bengal Election: युवाओं को साधने के लिए दीदी का दांव, ममता सरकार देगी ₹1,500 मासिक भत्ता -
President Vs Mamata Banerjee: राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी कूदे, केंद्र पर लगाए आरोप -
Bihar में फिर शुरू हुआ पोस्टर पॉलिटिक्स! पटना में लगे चिराग के पोस्टर, क्या BJP के 'हनुमान' बनेंगे नए CM -
PM मोदी के बाद अब CM योगी की मां पर अभद्र टिप्पणी, दोनों में बिहार लिंक, भड़के रवि किशन- 'दिखा दी गंदी सोच' -
Uttarakhand Budget सीएम धामी ने पेश किया ₹1,11,703.21 करोड़ का बजट, इतिहास के सबसे बड़े बजट की खास बातें -
Bihar Board Result 2026: जल्द खत्म होगा इंतजार! कब आएंगे 10वीं-12वीं के परिणाम? यहां से कर पाएंगे डाउनलोड -
गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमत के विरोध में NCP ने किया 'चूल्हा जलाओ' प्रोटेस्ट, नेताओं ने सड़क पर पकाई रोटियां -
वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बीच इशान किशन के घर पसरा मातम, बहन की हुई दुखद मौत, आखिर किस वजह से गई जान -
क्या जिंदा है खामेनेई? दुनिया को दिया गया धोखा? पूर्व जासूस का दावा- 2-3 लोगों को पता है सुप्रीम लीडर कहां हैं -
IND vs NZ: 'वह मैदान पर मेरे साथ थी', ईशान किशन जिस बहन पर छिड़कते थे जान, उसकी मौत से घर में पसरा सन्नाटा












Click it and Unblock the Notifications