यहां जानिए शिवरात्रि व्रत व पूजन की विधि
नई दिल्ली। भगवान शंकर संसार के प्रथम गुरू है, जिनसे मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति हुई है। जागराण की रात्रि महाशिवरात्रि प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की चतुदर्शी को मनाई जाती है। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि क्यों महत्वपूर्ण है। धर्म शास्त्रों केे अनुसार ऐसी मान्यता है कि आज के दिन भगवान शिव का अंश प्रत्येक शिवलिंग पर पूरे दिन और रात मौजूद रहता है। शिव पुुराण के अनुसार शिवरात्रि की मध्य रात्रि में शिव अपने रूद्र रूप में प्रकट हुये थे। शिवरात्रि के दिन आकाश से मिलने वाली उर्जा मनुष्य के शरीर में नीचे की से उपर की ओर बढ़ती है। योग परम्परा में शिव का पूजन भगवान मानकर नहीं बल्कि आदि गुरू मानकर किया जाता है।

शिवरात्रि व्रत व पूजन की विधि
-आज के दिन प्रातः काल स्नान-ध्यान से निवृत होकर सर्वप्रथम भगवान शिव के व्रत का संकल्प लें तत्पश्चात अपने घर में सम्भव हो तो मिट्टी का शिवलिंग स्थापित करके विधिवत पूजन करें। यदि ऐसा सम्भव न हो तो निकट के किसी शिव मन्दिर में जाकर दूध से या सादे जल में गंगालज मिलाकर शिव जी का अभिषेक करना चाहिए और आम के पत्ते, बिल्वपत्र, शमी के पत्ते, धतूरे और अक्षत आदि शिव पर चढ़ाने चाहिए।
शिवरात्रि में रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। जागरण के समय रूद्र अष्टाध्यायी, शिव स्त्रोत, महा मृत्युंजय मन्त्र या फिर पंचाक्षरी मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ब्रत से अगले दिन स्नान करके ब्राह्राणों को भोजन कराके स्वंय भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से शंकर जी की विशेष कृपा आपके परिवार पर बनी रहती है।
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