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Surya Grahan 2025: क्यों लगता है सूर्य ग्रहण? क्या आने वाली है कोई बड़ी मुसीबत?

Surya Grahan 2025 Time: साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण आज है, जो कि भारत में प्रभावी नहीं है इसलिए इसका सूतक काल नहीं लगा है। ये आंशिक सूर्य ग्रहण है जो कि आज रात 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 22 सितंबर सुबह 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। ग्रहण का चरमकाल 22 सितंबर को 01 बजकर 11 मिनट पर होगा।

आपको बता दें कि ये खगोलीय घटना ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में नजर आएगी हालांकि भारत के लोग इसे नासा के एक्स अकाउंट और ऑनलाइन लाइव देख सकते हैं।यह ग्रहण कन्या राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा।

Surya Grahan 2025 Time

वैदिक धर्म के मुताबिक सूर्य ग्रहण के दौरान राशियों में परिवर्तन होता है, जिसका असर लोगों के जीवन पर पड़ता है इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान ना तो शुभ काम होते हैं और ना ही पूजा-पाठ किया जाता है।

पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आते है (Surya Grahan 2025)

मालूम हो कि जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है, तब सूर्य ग्रहण घटित होता है। यह दृश्य वैज्ञानिक दृष्टि से अद्भुत और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

Surya Grahan 2025 क्यों लगता है?

सूर्य ग्रहण का मुख्य कारण चंद्रमा की परिक्रमा और पृथ्वी की स्थिति है। जब अमावस्या के दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तब उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है और कुछ समय के लिए सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है।

Surya Grahan तीन प्रकार का होता है -

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण - जब सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढक जाता है।
  • आंशिक सूर्य ग्रहण - जब सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ढकता है।
  • वलयाकार सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और सूर्य अंगूठी की तरह दिखता है।

सूर्य ग्रहण का इतिहास

सूर्य ग्रहण का उल्लेख हजारों वर्ष पुराने ग्रंथों में मिलता है।ऋग्वेद और अथर्ववेद में सूर्य ग्रहण का वर्णन मिलता है। ऋग्वेद में इसे 'राहु का सूर्य को ढकना' कहा गया है। आर्यभट्ट जैसे महान खगोलविद् ने सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट किया था।

Surya Grahan 2025 का धार्मिक महत्व

ग्रहण काल में धार्मिक कार्य, भोजन और शुभ कार्य वर्जित होते हैं।इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और स्नान को शुभ माना जाता है।ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से स्नान और दान-पुण्य करने से इसका नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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