Sridevi Funeral: श्रीदेवी की कुंडली में थे अशुभ योग,ग्रहों की वक्री चाल ने ले ली जान

लखनऊ। बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा श्रीदेवी अब नहीं रही, पहले ये कहा गया कि दुबई के एक होटल में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई है। लेकिन इसके बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी मौत होटल के बाथटब में दुर्घटनावश डूबने की वजह से हुई थी , उनकी बॉडी में शराब के अंश पाए गए थे लेकिन श्रीदेवी के कुछ नजदीकी लोगों का कहना है कि श्रीदेवी शराब का सेवन नहीं करती थी। आखिर फिर श्रीदेवी की मौत की असल वजह क्या हो सकती है ? क्या वो शराब के नशे में थी ? या फिर उनकी मौत का कारण कुछ और है ?

हार्ट अटैक के कारक ग्रह

हार्ट अटैक के कारक ग्रह

ज्योतिष में कालपुरूष की कुण्डली में चौथा स्थान ह्रदय का होता है व ह्रदय का कारक सूर्य होता है। यदि कुण्डली में सूर्य पीड़ित, चतुर्थ भाव पीड़ित हो व चतुर्थेश पीड़ित हो तो जातक को ह्रदय रोग हो सकता है। शास्त्रों में कहा गया है-‘‘यत्पिंडे तत्ब्रह्यांडे'' अर्थात ब्रह्याण्ड व संसार की आत्मा सूर्य है। यथा ‘‘सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च'' उसी प्रकार मानव शरीर रूपी ब्रह्याण्ड की आत्मा ह्रदय है।

खगोलीय स्थिति

खगोलीय स्थिति

खगोलीय स्थिति देखने पर ज्ञात होता है ब्रह्याण्ड में सूर्य के सबसे अधिक निकट पहले बुध ग्रह है फिर शुक्र ग्रह है। अतः ह्रदय के नजदीक भी यही दो ग्रह है जो ह्रदय को सुरक्षित रखने में मद्द करते है। बुध ग्रह ह्रदय के चारों भागों {दांया आलिंद, बांया निलय और बांया आलिंद व दांया निलय} की झिल्ली होता है। शुक्र ग्रह ह्रदय के बाहरी भाग का सम्पर्क करवाने का अधिपति होता है। शनि ग्रह का कार्य काले रक्त व अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक पहुॅचाना तथा चन्द्रमा रक्त को ले जाने का कार्य करता है। गुरू ग्रह रक्त को शुद्ध करके विकारों से बचाता है।

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त सन् 1963

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त सन् 1963

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त सन् 1963 को सुबह 5ः30 मि0 पर मद्रास में हुआ था। वर्तमान में आपकी कुण्डली में शनि की महादशा, शनि का अन्तर और सूर्य का प्रत्यन्तर चल रहा है। शनि आपकी कुण्डली में सप्तमेश व अष्टमेश है, साथ में वक्री होकर प्रबल मारकेश है। चैथा भाव ह्रदय का कारक है, चैथे भाव का स्वामी शुक्र अस्त होकर अपने शत्रु सूर्य के साथ लग्न में बैठा है। इस कुण्डली में शनि वक्री होकर मारकेश है और शनि की सप्तम दृष्टि होने के कारण सूर्य पीड़ित है। शनि ने अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक पहुंचाने का कार्य किया, सूर्य ह्रदय का कारक होकर पीड़ित है, चैथा भाव जो ह्रदय का कारक है, उसका स्वामी शुक्र अस्त होकर अपने शत्रु सूर्य के साथ बैठा है, इस कारण चतुर्थेश शुक्र भी पीड़ित हो गया।

वक्री शनि की दशम दृष्टि है

वक्री शनि की दशम दृष्टि है

चौथे भाव पर वक्री शनि की दशम दृष्टि है और राहु की पंचम दृष्टि भी इसलिए ह्रदय का भाव {चतुर्थ} भी पीड़ित हो गया। श्रीदेवी की कुण्डली का स्क्षूम अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि आत्मा का सूर्य, ह्रदय का कारक भाव चतुर्थ व चतुर्थे शुक्र ये तीनों पीड़ित है। अतः आपकी कुण्डली में हार्ट अटैक के प्रबल योग बन रहे है। शनि की महादश, शनि का ही अन्तर और सूर्य का प्रत्यन्तर चल रहा है। 23 फरवरी से शनि का सूक्ष्म अन्तर भी शुरू हो गया था। शनि मारकेश है और सूर्य ह्रदय का संकेतक होकर पीड़ित है। 24 फरवरी को श्रीदेवी की मृत्यु हुई उस दिन चन्द्रमा मिथुन राशि में बुध की राशि में था। गोचर में चन्द्रमा आपके 12वें भाव में था। इस भाव का चन्द्रमा दूर देश के अस्पताल में भर्ती करवाता है। द्वादश भाव में बैठे राहु की पंचम दृष्टि ह्रदय के कारक भाव चतुर्थ पर और द्वादश भाव का राहु व्यक्ति को गिरा भी देता है। इन सभी कारणों के आधार पर कहा सकता है कि श्रीदेवी को बाथरूम में सीने में तेज दर्द हुई जिस कारण उनका पैर फिसला और वह जल से भरे बाथटब में गिर गई और उनकी ह्रदय की गति रूकने के कारण मृत्यु हो गई। चन्द्रमा जल का कारक है, इसलिए श्रीदेवी का मृत शरीर जल से भरे बाथटब में पड़ा मिला।

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