डिप्रेशन से बचना है तो चंद्रमा को करें प्रसन्न

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी जातक की कुंडली देखकर यह आसानी से जाना जा सकता है कि वह अवसाद या डिप्रेशन का शिकार है।

नई दिल्ली। क्या आप डिप्रेशन के शिकार हैं? रातभर नींद नहीं आती, दिन भर दिमाग ऐसे दौड़ता है कि थमने का नाम नहीं? हर चीज से मन भागता है? दुनिया में कोई अपना नहीं लगता, किसी काम में मन नहीं लगता?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर दूसरे व्यक्ति की यही कहानी है। चाहे स्त्री हो या पुरूष, सभी किसी ना किसी रूप में डिप्रेशन या अवसाद से घिरे हुए हैं।

थोड़ी मात्रा में तनाव जीवन के लिए अच्छा है

थोड़ी मात्रा में तनाव जीवन के लिए अच्छा है

माना जाता है कि थोड़ी मात्रा में तनाव जीवन के लिए अच्छा है क्योंकि यह व्यक्ति की परिस्थितियों से जूझने की क्षमता बढ़ाता है। समस्या तब आती है जब यही तनाव व्यक्ति के सिर चढ़ जाता है और डिप्रेशन का रूप ले लेता है। डिप्रेशन से घिरा व्यक्ति सामान्य काम काज ढंग से नहीं कर पाता और नकारात्मक विचारों से घिर जाता है। कई बार डिप्रेशन इस हद तक बढ़ जाता है कि व्यक्ति को काउंसलर की मदद लेना पड़ती है अन्यथा वो आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेता है। आए दिन अखबार में इस तरह की खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं कि फलां व्यक्ति ने रिजल्ट बिगड़ने, नौकरी ना लगने, बीमारी आदि किसी भी कारण से फांसी लगा ली। यह हायपर डिप्रेशन के कारण ही होता है। डिप्रेशन में डूबा व्यक्ति दुनिया से भागने के चक्कर में नशे की लत भी लगा बैठता है, जिससे समस्या और अधिक बढ़ती जाती है।

ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र चूंकि व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन के हर पहलू पर असर रखता है, तो स्वाभाविक रूप से इस समस्या का समाधान भी प्रस्तुत करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी जातक की कुंडली देखकर यह आसानी से जाना जा सकता है कि वह अवसाद या डिप्रेशन का शिकार है। कुंडली का पहला घर मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करता है और चंद्रमा को मस्तिष्क और भावनाओं का स्वामी माना जाता है। यदि जातक के जन्मांग चक्र के प्रथम भाव में चंद्रमा नीच का हो या पाप ग्रहों से युक्त हो तो ऐसी स्थिति जीवन में डिप्रेशन लाती है।

निम्नलिखित दशाएं जातक के जीवन में डिप्रेशन का होना बताती हैं

निम्नलिखित दशाएं जातक के जीवन में डिप्रेशन का होना बताती हैं

  • यदि चंद्रमा त्रिक भाव में छठवें, आठवें या बारहवें स्थान पर हो।
  • यदि चंद्रमा शनि, सूर्य, राहू या मंगल जैसे ग्रहों के साथ बैठा हो।
  • यदि चंद्रमा किसी भी घर में अकेला बैठा हो, उसके साथ कोई भी दूसरा ग्रह दिखाई ना दे रहा हो।
  • यदि चंद्रमा सूर्य के करीबी भाव में होकर अस्त के समान दिखाई दे।
  • यदि चंद्रमा पाप ग्रहों से युक्त हो या पाप ग्रहों के घर में बैठा हो।
  • यदि चंद्रमा लग्न या नवमांश में नीच राशि में हो।
  • बदलती परिस्थितियों के दबाव का असर

    बदलती परिस्थितियों के दबाव का असर

    जीवन में कभी भी कोई भी डिप्रेशन से घिर सकता है। यह कोई बीमारी नहीं है, सिर्फ बदलती परिस्थितियों के दबाव का असर है। किसी भी विपरीत परिस्थिति जैसे प्यार में दिल टूटना, असफल विवाह, आर्थिक अस्थिरता, मनचाहा करियर ना बना पाना या किसी प्रिय की मृत्यु आदि के कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है। पर जहां समस्या है, वहां समाधान भी है।

    समाधान

    समाधान

    • यदि जातक की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो उसे मजबूत बनाने के लिए चांदी के गिलास में बार-बार पानी पीना लाभदायक होता है।
    • यदि चंद्रमा कमजोर होकर गलत घर में स्थित है तो चांदी में बनी हुई मोती की अंगूठी धारण करना चाहिए।
    • डिप्रेशन से परेशान जातकों को सोमवार का व्रत रखने से लाभ होता है।
    • चंद्रमा के कमजोर होने की स्थिति में भगवान शिव की पूजा का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के भी उत्तम परिणाम सामने आते हैं।
    • जातक को अधिक से अधिक चांदी के आभूषण पहनने चाहिए। याद रखें कि इन आभूषणों में कहीं जोड़ ना हो और इन्हें सोमवार के दिन ही धारण करें।
    • हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव चंद्रमा के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए डिप्रेशन में भगवान शिव की पूजा का विशेष लाभदायक प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में जातक को 108 बार ओम नमः शिवाय का जाप करने का निर्देश दिया जाता है। यदि आप ध्यान एकाग्र ना कर पा रहे हों, तो शांत मन से शिव चालीसा भी पढ़ सकते हैं। शिव जी की पूर्ण भक्ति से की गई साधना का प्रभाव सभी नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है।
    • योग और प्राणायाम से भी डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है। विशेष रूप से अनुलोम विलोम का अभ्यास दवा की तरह प्रभावी माना जाता है। 10 मिनट के लिए ओम शब्द के जाप से भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
    • भारतीय संस्कृति में मां को भगवान माना जाता है। यदि आप डिप्रेशन में हैं तो अपनी मां से खुलकर और अधिक से अधिक बात करें। यदि दुर्भाग्य से मां ना हों, तो किसी भी अधिक आयु की महिला, जो आपकी आत्मीय हो, उससे बात करें। हर सोमवार को उस महिला को सफेद फूल, सफेद मिठाई, सफेद वस्त्र, दूध, शक्कर जैसी कोई भी सफेद वस्तु भेंट करें।

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