Constellations: ज्योतिष की भाषा में क्या है नक्षत्रसूची?
नई दिल्ली, 25 मार्च। नक्षत्रसूची शब्द से आमतौर पर लोग आकाश मंडल में स्थित नक्षत्रों की किसी सूची का अनुमान लगा सकते हैं लेकिन ज्योतिष की भाषा में इसका अर्थ सर्वथा भिन्न है। बृहत्संहिता, पीयूषधारा जैसे ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में नक्षत्रसूची के बारे में विस्तार से बताया गया है।

इन ग्रंथों के अनुसार नक्षत्रसूची कोई तारा, ग्रह या नक्षत्र नहीं होता, बल्कि वे लोग होते हैं तो ज्योतिष का पठन, पाठन, अध्ययन किए बिना ही ज्योतिषी बन बैठते हैं। आजकल की सामान्य भाषा में कहा जाए तो नक्षत्रसूची वे लोग होते हैं जो नकली ज्योतिषी होते हैं।
- बृहत्संहिता के अनुसार, जो पुरुष या स्त्री ज्योतिष शास्त्र को जाने बिना दैवज्ञ बन जाए, उस पापात्मा पंक्तिदूषक को नक्षत्रसूची जानना चाहिए।
- पीयूषधारा का कथन है, तिथि की उत्पत्ति को जो नहीं जानते, ग्रहों के साधन का जिन्हें ज्ञान नहीं है, केवल दूसरे के कहे-सुने के अनुसार जो व्यवहार करते हैं, वे नक्षत्रसूचक कहलाते हैं।
- पीयूषधारा ग्रंथ में महर्षि वशिष्ठ का कथन है, श्राद्धकर्म में ब्राह्मण समुदाय के मध्य ज्योतिष के तीनों स्कंधों का पारगामी विद्वान ही पूज्य है। नक्षत्रसूची निश्चितरूप से पापात्मा है। वह सभी उत्तम धार्मिक कृत्यों में सदा ही निन्द्य है।
- पीयूषधारा का ही अन्य कथन है कि, सिद्धांत अर्थात् गणित ज्योतिष का ज्ञाता दस दिन में किए हुए पापों को नष्ट कर डालता है। संहिता का ज्ञान कर लेने पर वह तीन दिनों में किए गए पापरूपी दोष को नष्ट कर देता है और होराशास्त्र की जानकारी कर लेने पर अहोरात्र के दोष को दूर कर देता है, किंतु नक्षत्रसूची तो महान पाप ही उत्पन्न करता है।
- इसी प्रकार, जो घर-घर जाकर बिना किसी के पूछे ही अश्विनी आदि नक्षत्रों के शुभाशुभ फल को बताने लगता है, वह नक्षत्रसूची कहलाता है।












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