बहुत सारे राज खोलती है रमल विद्या, जानिए कैसे?

चीन का अपना ज्योतिष विज्ञान है। इसी तरह अरब देशों में भविष्य जानने के लिए रमल विद्या प्रचलित है।

नई दिल्ली। अपना भविष्य जानने की जिज्ञासा प्रत्येक मनुष्य के मन में होती है। आस्तिक हो या नास्तिक, मनुष्य भविष्य को लेकर चिंतित रहता है और वह इसे जानने के लिए तमाम उपाय अपनाता है। इसलिए केवल भारत ही नहीं, दुनिया के अमूमन सभी देशों में भविष्य कथन की कोई न कोई पद्धति अपनाई जाती है। पाश्चात्य देशों में अंकशास्त्र, टैरोट कार्ड का सहारा लिया जाता है।

चीन का अपना ज्योतिष विज्ञान

चीन का अपना ज्योतिष विज्ञान है। इसी तरह अरब देशों में भविष्य जानने के लिए रमल विद्या प्रचलित है। रमल यानी अरबी ज्योतिष की मदद से भविष्य कथन की परंपरा अरब देशों में प्राचीन काल से ही प्रचलित रही है, लेकिन इस पर भारत में भी काफी शोध हुआ है। समस्याओं के शीघ्र समाधान बताने के लिए रमल पर विश्वास करने वाले भी कम नहीं हैं।

प्रश्नों के आधार पर भविष्य कथन

रमल विद्या में दरअसल प्रश्नों के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है। इसमें किसी कुंडली की आवश्यकता नहीं होती। इसमें सारा खेल पासों का होता है। प्रश्नकर्ता के प्रश्न पूछते ही रमल ज्योतिषाचार्य एक विशेष प्रकार के चार्ट पर पासे फेंकता है। पासे में विभिन्न तरह के बिंदु बने होते हैं जिन्हें शकलें कहा जाता है। जो शकल आती है उसी के हिसाब से भविष्य कथन किया जाता है।

 अभीष्ट कार्य कब तक

अभीष्ट कार्य कब तक

कर्ता मात्र रमलाचार्य के पास अपने अभीष्ट कार्य कब तक, किसके माध्यम से किस प्रकार होगा एवं अन्य तात्कालिक प्रश्न व वर्तमान समय में किस ग्रह की अनुकूलता या प्रतिकूलता है और कब तक परेशानी बनी रहेंगी। किस शेयर्स में तेजी-मंदी कब और किस समय आएगी और इसमें कैसे लाभ होगा या नहीं। कोई कार्य प्रारंभ करें तो उसमें लाभ होगा अथवा हानि इत्यादि को मन, वचन और आंतरिक भावना से लेकर जाए। क्योंकि किसी भी ज्योतिष शास्त्र में श्रद्धा विश्वास का भाव प्रश्नकर्ता के मन में होना अति आवश्यक है।

पासे से होता है भविष्य कथन

पासे से होता है भविष्य कथन

रमल शास्त्र में प्रत्येक समस्या के लिए मार्गदर्शन और उसका समाधान पासे डालकर किया जाता है। पासे को अरबी भाषा में कुरा कहते हैं, जो प्रश्नकर्ता के हाथ पर रखकर एक विशेष प्रकार के चार्ट पर डलवाए जाते हैं। उससे प्राप्त हुई शकल आकृत से रमल गणित के मुताबिक प्रस्तार यानी जायचा बनाया जाता है। उस प्रस्तार के माध्यम से प्रश्नकर्ता के समस्त प्रश्नों का मार्गदर्शन व समाधान बताया जाता है। यह सारी प्रक्रिया प्रश्नकर्ता के सामने रमल ज्योतिषाचार्य करता है। रमल ज्योतिष उन लोगों के लिए एक सटीक विकल्प है जिनके पास अपनी जन्मकुंडली या जन्म तारीख नहीं है। विद्वानों का कहना है कि रमल ज्योतिष से भविष्य काफी हद तक सटीक बैठता है।

कैसे बनता है जायचा

कैसे बनता है जायचा

रमल में पासा डालने के बाद प्रस्तार यानी कि जायचा बनाया जाता है। प्रस्तार के 16 घर होते हैं। 13, 14, 15, 16 घर गवाहान यानी कि साक्षी घर होते हैं। प्रस्तार के 1, 5, 9, 13 घर अग्नि तत्व के होते हैं। 2, 6, 10, 14 घर पर तत्व के होते हैं। 3, 7, 11, 15 घर जल तत्व के होते हैं और अंतिम घर 4, 8, 12, 16 घर पृथ्वी तत्व के होते हैं।

रमल की 16 शक्लों को इस तरह विभाजित किया गया है:

रमल की 16 शक्लों को इस तरह विभाजित किया गया है:

  • लहियान खारिज
  • कब्जुल दाखिल
  • कब्जुल खारिज
  • जमात
  • फरहा मुंकलिब
  • उक्ला मुंकलिब
  • अंकिश दाखिल
  • हुमरा साबित
  • बयाज साबित
  • नस्त्रुल खारिज
  • नस्त्रुल दाखिल
  • अतवे खारिज
  • नकी मुंकलिब
  • अतवे दाखिल
  • इज्जतमा साबित
  • तरीक मुंकलिब
  • ये है इनका अर्थ

    ये है इनका अर्थ

    यदि प्रश्नकर्ता दांपत्य जीवन को लेकर सवाल करे और रमलाचार्य के डाले गए पासों में लहियान खारिज शकल आए जो समझें जीवनसाथी प्रेम का दिखावा कर रहा है, उसका प्रेम सच्चा नहीं है।

    भविष्य कथन

    भविष्य कथन

    यदि कब्जुल दाखिल आए तो इसका अर्थ है जीवनसाथी बहुत प्रेम करेगा। यदि जमात साबित आए तो समझें परेशानियों के बाद दांपत्य जीवन सुखमय होगा। इसी तरह अलग-अलग शकलों के अननुसार भविष्य कथन किया जाता है।

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