राहु-केतु के राशि में परिवर्तन, जानिए क्या होगा असर?
लखनऊ। सिंह राशिस्थ राहु का कर्क राशि में प्रवेश 18 अगस्त दिन शुक्रवार को प्रातः 4 बजकर 49 मि0 पर बुध के नक्षत्र अश्लेषा होगा। तात्कालिक चन्द्र भी उस समय मिथुन राशि व आद्रा नक्षत्र में रहेगा। कुम्भ राशिगत केतु का मकर राशि में प्रवेश 18 अगस्त दिन शुक्रवार को प्रातः 4 बजकर 48 मिनट पर मंगल के नक्षत्र धनिष्ठा में होगा।
मेष-मेष राशि वालों के लिए चतुर्थ भाव में राहु का गोचर होना सुख में हानि करायेगा और जनता व समाज में विरोध करायेगा। कुछ सम्बन्धियों से अनबन की स्थिति बनी रह सकती है। दशम भाव का केतु राज्य में विरोध, उथल-पुथल, परिवर्तन एंव मानसिक अशान्ति राहु उत्पन्न करेगा। समाजिक कार्यो में रूकावट भी आने के संकेत है।

वृष-मिथुन
- वृष-तृतीय भाव का राहु आपके पराक्रम व साहस में वृद्धि करायेगा व मित्रों से लाभ करायेगा। कुछ लोगों का अचानक भाग्योदय हो सकता एंव अचानक लाभ भी हो सकता है। 18 अगस्त के बाद बाद नवमनवम में केतु आने से मित्रों से लाभ, भाग्य में वृद्धि, धार्मिक कार्य करना एंव सन्तान के लिए कल्याणकारी रहेगा।
- मिथुन-दूसरे भाव में राहु रहने से धन की हानि, ससुराल से टकराव, पारिवारिक अशान्ति, नेत्र पीड़ा, शत्रुओं से भय एंव विद्या के क्षेत्र में असफलता मिल सकती है। 18 अगस्त के बाद अष्टम का केतु विदेश यात्रा का योग बनायेगा और धन-हानि व पाइल्स रोगियों को कष्ट देगा।
- कर्क-लग्न का राहु मानसिक अशान्ति देगा किन्तु धन-धान्य में वृद्धि एंव सन्तान के लिए शुभ रहेगा। कुछ लोगों के मान-सम्मन में वृद्धि भी करायेगा। सातवें भाव का केतु मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, राज्य व व्यापार से लाभ व कुछ लोगों को धन भी दिलायेगा। जीवन साथी से थोड़ा मन-मुटाव रह सकता है।
- सिंह-राहु के द्वादश भाव में रहने से व्यय की अधिकता रहेगी, नींद में कमी बनी रहेगी, नौकरी वाले जातकों का घर से दूर स्थानान्तरण होने का योग है। कुछ लोगों को जेल भी जाना पड़ सकता है। छठें भाव का केतु शत्रुओं से भय, नेत्रों में पीड़ा, व्यय की अधिकता एंव कार्य में बाधायें उत्पन्न करेगा।
- कन्या-एकादश भाव के राहु शुभ कार्यो में वृद्धि होगी जैसे-दान, पुण्य, में रूचि बढ़ेगी लेकिन धन-धान्य में गिरावट आयेगी, मित्रों से कष्ट मिल सकता है एंव बनते कार्यो में अवरोध उत्पन्न होगे। सामाजिक गतिविधियों का आने वाले दिनों में आपको लाभ मिलेगा।
- तुला-दशम भाव का राहु गंगा आदि धार्मिक तीर्थो में स्नान, तीर्थाटन एंव दान-पुण्य में रूचि बढ़ायेगा। कार्यो में सफलता व मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करायेगा। कुछ लोगों को शत्रुओं का भय बना रह सकता है। पॉचवे भाव का केतु सन्तान के लिए कष्टकारी एंव भाग्योदय में बाधक रहेगा।
- वृश्चिक-नवम भाव का राहु कुछ लोगों का अचानक भाग्योदय, विदेश यात्रा, आशातीत लाभ एंव राज्य की कृपा दिला सकता है। मित्रों से सहयोग भी मिलेगा। तीसरे भाव का केतु साहस में वृद्धि, शत्रुओं पर विजय एंव मित्रों से लाभ दिलायेगा।
- धनु-अष्टम भाव का राहु अचानक लाभ, विदेश यात्रा का योग एंव कुछ लोगों कोई दीर्घकालीन रोग भी दे सकता है। जिनका राहु शुभ नहीं, उन्हें अचानक आयी विपत्तियों में उलझा भी सकता है। दूसरे भाव का राहु कुछ लोगों को नेत्रों में पीड़ दे सकता है एंव आर्थिक पक्ष में मजबूती भी लायेगा।
- मकर-सातवें भाव का राहु अचानक व्यापार में वृद्धि, राज्य से लाभ एंव मित्रों का सहयोग दिलायेगा। कुछ लोगों को शरीर में वायु, पित्त से पीड़ा हो सकती है। यात्रा से धन लाभ एंव मानसिक शान्ति मिलेगी। केतु मान-सम्मान में वृद्धि करायेगा, सन्तान को लाभ देगा किन्तु चोट-चपेट भी दे सकता है।
- कुम्भ-छठें भाव का राुह कुछ लोगो को दीर्घकालीन का कोई रोग दे सकता है, इसलिए रोग के प्रति विशेष सचेत रहें। धन हानि, शत्रु से पीड़ा एंव आमदनी में कमी करा सकता है। केतु खर्च की अधिकता लायेगा, नेत्रों में पीड़ा, सुख में कमी, निवास स्थान से दूर प्रवास करायेगा।
- मीन-पंचम भाव का राहु बुद्धि के द्वारा अचानक लाभ करवा सकता है। शेयर बाजार में लगाया गये धन में वृद्धि होगी। भाग्य पक्ष में मजबूती आयेगी। सन्तान पक्ष के लिए यह राहु थोड़ा पीड़ादायक रह सकता है। एकादश भाव का केतु लाभ करायेगा, मान-सम्मान देगा व आपके रूके हुये कार्यो सम्पन्न करायेगा।

कर्क-सिंह

कन्या-तुला

वृश्चिक-धनु













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