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Planetary Parade 2026: क्या सच में आज दिखेंगे छह ग्रह एक सीध में? IIA वैज्ञानिकों ने खोली सोशल मीडिया की पोल

Planetary Parade 2026: 28 फरवरी को भारत के अलग-अलग हिस्सों में हजारों लोग आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। वजह है सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वो चर्चाएं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि शनिवार की शाम को आसमान कोई साधारण नहीं होने वाला बल्कि एक दुर्लभ प्लैनेटरी परेड देखने को मिलेगा जब छह ग्रह एक साथ आकाश में एक लाइन में नजर आएंगे।

शहरों की की ऊंची इमारतों की छतों से लेकर शांत गांवों के खेतों तक, लोग दूरबीन और मोबाइल कैमरे लेकर तैयार बैठे हैं। लेकिन इससे पहले कि आप भी इस खगोलीय दावे की उम्मीद में बाहर निकलें, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics IIA), बेंगलुरु ने इस वायरल दावे पर एक जरूरी 'रियलिटी चेक' दिया है।

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IIA Bengaluru का छह ग्रहों के दावे पर रियलिटी चेक

IIA ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी एक वीडियो पोस्ट में स्पष्ट किया है कि 'प्लैनेटरी परेड' जैसा कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है। 28 फरवरी को छह ग्रहों की "दुर्लभ सीधी कतार" बनने के दावे हद से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए और भ्रामक हैं।

संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही रंगीन ग्राफिक्स और एनिमेशन वास्तविकता से कोसों दूर हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि प्लैनेट परेड शब्द का इस्तेमाल अक्सर ढीले-ढाले ढंग से किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं होता कि ग्रह वास्तव में एक सीधी रेखा में आ जाएंगे।

हकीकत यह है कि ये ग्रह अंतरिक्ष में एक-दूसरे से लाखों-करोड़ों किलोमीटर दूर होते हैं और लगभग कभी भी उस 'परफेक्ट लाइन' में नहीं आते, जैसा कि वायरल पोस्ट में दिखाया जाता है। धरती से देखने पर ये ग्रह एक चाप (Arc) जैसी आकृति में बिखरे हुए नजर आते हैं, जिसे खगोलशास्त्री 'एक्लिप्टिक' (Ecliptic) कहते हैं।

6 Planet Alignment? असल में आसमान में क्या दिख सकता है?

अगर मौसम साफ हो और देखने की उम्मीदें हों, तो 28 फरवरी की शाम आसमान कुछ हद तक खास जरूर हो सकता है। तकनीकी रूप से इस समय छह ग्रह बुध (Mercury), शुक्र (Venus), बृहस्पति (Jupiter), शनि (Saturn), अरुण (Uranus) और वरुण (Neptune) शाम के आकाश में एक साथ होंगे। लेकिन इन्हें देख पाना एक अलग चुनौती है।

खगोलशास्त्रियों के मुताबिक, ये ग्रह सूर्य के रास्ते के आसपास ही नजर आते हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में इक्लिप्टिक (Ecliptic) कहा जाता है। यानी अगर कुछ भी दिखाई देता है, तो वह एक शानदार सीधी कतार नहीं, बल्कि आकाश में फैला हुआ एक हल्का-सा चाप (arc) होगा।

Planetary Parade 2026 को कौन सा ग्रह दिखेगा सबसे साफ?

28 फरवरी की शाम बृहस्पति (Jupiter) ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसे आसानी से देखा जा सकता है। यह शाम के आसमान में काफी ऊंचाई पर होगा और रात करीब 3:30 बजे तक नहीं डूबेगा। दिलचस्प बात यह है कि इसे बिना किसी उपकरण के भी यह एक चमकीले तारे की तरह साफ देखा जा सकता है। अगर आपके पास छोटी दूरबीन या बाइनाकुलर हैं, तो बृहस्पति के चार प्रसिद्ध गैलीलियन चंद्रमा और उसके बादलों की धारियां भी दिखाई दे सकती हैं। यही इस शाम का असली इनाम हो सकता है।

शुक्र, बुध और शनि क्यों रहेंगे छिपे?

शुक्र, बुध और शनि इस समय सूर्य के बेहद करीब हैं। ये सूर्यास्त के सिर्फ 45 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे के भीतर ही क्षितिज के नीचे चले जाएंगे। इसके अलावा ये वेस्टर्न होराइजन के बेहद निचले हिस्से में होंगे, जहां शाम की रोशनी (ट्वाइलाइट) के कारण इन्हें देख पाना लगभग नामुमकिन होगा।

IIA का कहना है कि नंगी आंखों से तो इन्हें देख पाना बेहद मुश्किल है, और बाइनाकुलर से भी सफलता की कोई गारंटी नहीं है। जो लोग अरुण (Uranus) और वरुण (Neptune) को देखने का सपना देख रहे हैं, उनके लिए यह काम बेहद मुश्किल होगा। इन दोनों को देखने के लिए अच्छी दूरबीन और काफी अनुभव की जरूरत पड़ेगी। खासतौर पर वरुण ग्रह, जो शनि के पास क्षितिज के करीब होगा, उसे पहचान पाना आम लोगों के लिए लगभग असंभव है।

शनिवार की रात क्यों होगी खास?

भले ही सोशल मीडिया जैसा नजारा न दिखे, लेकिन आसमान की ओर देखना अपने आप में एक अनुभव है। यही वही आकाश है जिसे हमारे पूर्वज देखते थे और जिनसे उन्होंने कहानियां, मिथक और मान्यताएं गढ़ीं। आज हम जानते हैं कि इन ग्रहों की स्थिति से पृथ्वी पर कोई अनहोनी नहीं होती।

इनका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव हमारे चंद्रमा से भी कम होता है। फिर भी इन ग्रहों का महत्व कम नहीं है। कभी इन्हीं ग्रहों की एक दुर्लभ और सटीक स्थिति ने नासा के वॉयेजर मिशन को संभव बनाया था, जिससे मानवता ने पहली बार बाहरी ग्रहों की नजदीकी तस्वीरें देखीं।

IIA Bengaluru की आंखों की सुरक्षा को लेकर सख्त चेतावनी

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने एक बेहद अहम चेतावनी भी जारी की है। वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि सूर्यास्त से पहले या सूर्य के बहुत पास किसी भी हालत में दूरबीन, बाइनाकुलर या नंगी आंखों से ग्रहों को खोजने की कोशिश न करें।

सूर्य की सीधी रोशनी उपकरणों के माध्यम से आपकी आंखों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसा करने से आंखों को स्थायी और गंभीर नुकसान हो सकता है। वैज्ञानिकों के शब्दों में, कोई भी खगोलीय दृश्य आपकी आंखों से ज्यादा कीमती नहीं है। किसी भी ग्रह को देखने के लिए सूर्य के पूरी तरह डूबने का इंतजार करें।

इस खगोलीय घटना को फिर कब देखने का मौका मिलेगा?

IIA के वैज्ञानिकों का कहना है कि मार्च और अप्रैल में आसमान और भी दिलचस्प होने वाला है। आने वाले हफ्तों में शुक्र ग्रह शाम के आसमान में ज्यादा समय तक दिखाई देगा, जबकि सुबह के समय मंगल, शनि और बुध पूर्वी क्षितिज पर उगते नजर आ सकते हैं। यह समय वास्तविक खगोलीय अवलोकन के लिए कहीं ज्यादा बेहतर होगा।

तो 28 फरवरी की शाम जरूर बाहर निकलें। पश्चिम की ओर देखें, जब आसमान धीरे-धीरे गहराता जाए। हो सकता है आपको छह ग्रहों की परेड न दिखे, लेकिन अगर किस्मत और मौसम ने साथ दिया, तो बृहस्पति अकेले ही पूरे आसमान पर राज करता नजर आएगा एक शांत, चमकता हुआ सम्राट।

अपनी उम्मीदें जमीन पर रखें, आंखों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें और सूर्य से दूर ही दूरबीन का इस्तेमाल करें। तारे और ग्रह कहीं जाने वाले नहीं हैं।

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