'चंद्र ग्रहण 'और 'कार्तिक पूर्णिमा' दोनों आज, कीजिए ये उपाय हो जाएंगे मालामाल

नई दिल्ली। साल का अंतिम 'चंद्र ग्रहण' भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 04 मिनट पर लग गया है, ये अपनी चरम स्थिति में दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर पहुंच भी चुका है। ग्रहण काल 04 घंटे 21 मिनट का है, वैसे तो ये ग्रहण भारत में प्रभावी नहीं है लेकिन फिर भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाले इस ग्रहण के दिन अगर आप कुछ खास उपाय करें तो निश्चित रूप से आप मालामाल हो जाएंगे। ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहों के उलट-पुलट का असर हर जातक के जीवन पर जरूर पड़ता है इसलिए आज के दिन आप कुछ खास उपाय करके मालामाल हो सकते हैं।

 चंद्र ग्रहण और कार्तिक पूर्णिमा दोनो आज, जानिए असर
  • मेष- आज मां लक्ष्मी को लड्डू का भोग लगाएं आपके ऊपर उनकी विशेष कृपा होगी। ये ग्रहण आपको प्रभावित तो नहीं करेगा लेकिन प्रगति के रास्ते जरूर खोलेगा।
  • वृष-आज आप मां लक्ष्मी की विशेष आरती कीजिए, इससे आपके उन्नति के द्वार खुल जाएंगे।
  • मिथुन-श्रम का प्रतिफल मिलने का समय आ गया है इसलिए आज मां लक्ष्मी की फोटो के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • कर्क-व्यवासाय व व्यापार में प्रगतिशीलता बनी रहेगी, ऐसा ये ग्रहण कह रहा है इसलिए आज आप विष्णु और मां लक्ष्मी की साथ में पूजा करें।
  • सिंह- अधूरे कार्यो के पूरे होने का योग बन रहे हैं इसलिए आज आप तिल का दान करें, मां की कृपा आप पर बरसेगी।
  • कन्या-कुछ लोगों की आमदनी में वृद्धि होगी, इसके लिए आज आप दान-पुण्य करें।
  • तुला-आर्थिक मामलों में किया गया निवेश लाभप्रद साबित होगा, प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, इस वजह से आप लक्ष्मी जी का अराधना मन से करें और खीर का भोग लगाएं।
  • वृश्चिक- समस्याओं के अंत का समय आ गया है इस वजह आज आप विष्णु पुराण का पाठ कीजिए।
  • धनु-आपने बहुत मेहनत कर ली है इसलिए अब आपके रिजल्ट का वक्त आ गया है, आज आप मां लक्ष्मी को बर्फी का भोग लगाएं।
  • मकर-आर्थिक योजनाओं में किये गये प्रयास सफल होने वाले हैं इसलिए आज आप तिल का दान करें।
  • कुम्भ-मेहमत का फल मिलने का समय है, मां लक्ष्मी की गेंदे के फूल से पूजा करें, सारे तनाव का अंत हो जाएगा।
  • मीन -पद, प्रतिष्ठा की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी और विष्णु जी की आज सपरिवार पूजा करें।

इस बार ग्रहण वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में लगा है, हालांकि प्रच्छाया ग्रहण होने के कारण आज कोई कर्मकांड की आवश्यकता नहीं हैय़ केवल प्रच्छाया वाले ग्रहण, जो कि नग्न आंखों से दिखाई देते हैं, धार्मिक कर्मकांडों के लिए मान्य किए जाते हैं। सभी परंपरागत पंचांग केवल प्रच्छाया वाले ग्रहण को ही सम्मिलित करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर लग रहा चंद्रग्रहण भी मात्र उपच्छाया चंद्रग्रहण है इसलिए इसके सूतक का पालन करने की भी आवश्यकता नहीं है।

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