Jupiter Transit in Aquarius : 120 दिन वक्री होने वाले हैं गुरु, जानिए क्या होगा असर?

नई दिल्ली, 16 जून। मान-सम्मान, तरक्की, आजीविका, वैवाहिक सुख, शुभता, संयम, धैर्य, चिंतन-मनन का प्रतिनिधि ग्रह गुरु 20 जून से वक्री हो रहा है। यह ग्रह 20 जून 2021 को रात्रि 8.34 बजे कुंभ राशि में वक्री होगा। फिर उल्टी गति करते हुए 14 सितंबर को पिछली राशि मकर में प्रवेश करेगा और 18 अक्टूबर को प्रात: 11.02 बजे मकर में ही मार्गी हो जाएगा। इस प्रकार बृहस्पति कुल 120 दिन वक्री अवस्था में रहेगा। इन चार महीनों में आप पर क्या होगा असर जानिए।

 120 दिन वक्री होने वाले हैं गुरु, जानिए क्या होगा असर?

नवग्रहों में सबसे शुभ ग्रह बृहस्पति के वक्री होने का सबसे ज्यादा असर उसकी अपनी राशि धनु और मीन, शनि की राशि मकर और कुंभ पर ज्यादा होगा। साथ ही जिन लोगों को बृहस्पति या शनि की महादशा-अंतर्दशा चल रही हो। जिनकी कुंडली में बृहस्पति और शनि साथ-साथ बैठे हों उन पर बृहस्पति के वक्री होने का ज्यादा प्रभाव होने वाला है। इसके साथ ही अंक ज्योतिष की बात करें तो जिनका मूलांक 3 हो अर्थात् 3, 12, 21 और 30 तारीख को जिनका जन्म हुआ हो उन पर भी इसका ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है।

वर्तमान में शनि भी 11 अक्टूबर तक वक्री चल रहे हैं

बृहस्पति धन, धर्म और शिक्षा के कारक ग्रह हैं इसलिए जो लोग शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं विद्यार्थी, प्रोफेसर, कोचिंग संस्थान आकद का काम करते हैं, जो लोग फाइनेंस से जुड़ा काम करते हैं बैंकर हैं, निवेशक हैं, शेयर ब्रोकर्स हैं, बीमा एजेंट हैं, जो लोग धार्मिक कार्यो से जुड़े हैं किसी सामाजिक ट्रस्ट या फाउंडेशन से जुड़े हैं उन्हें वक्री बृहस्पति विशेषतौर पर प्रभावित करने वाला है। बृहस्पति के साथ वर्तमान में शनि भी 11 अक्टूबर तक वक्री चल रहे हैं इसलिए बृहस्पति के इस वक्री होने का व्यापार पर असर होने वाला है।

सभी राशियों पर प्रभाव

मेष : मेष राशि के जातकों को वक्री गुरु अच्छे परिणाम देंगे। आपके लिए बृहस्पति नवें और 12वें भाव के स्वामी हैं और 11वें और 10वें भाव में वक्री होंगे। नवां भाव भाग्य भाव है इसलिए धर्म, कर्म के कार्यो में लाभ होगा। भाग्य को प्रबलता मिलेगी। जो लोग उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जाने की इच्छा रखते हैं या विदेश जाना चाहते हैं उनके लिए श्रेष्ठ समय है। नौकरीपेशा के कार्य में बदलाव, प्रमोशन के चांस भी मिलेंगे। कुंभ के बृहस्पति की सातवीं दृष्टि सीधे पांचवें स्थान पर पड़ रही है यह संतान का भाव है इसलिए बच्चों की शिक्षा पर खर्च की स्थिति बनेगी। इस दौरान आप जो निर्णय अभी तक टालते आ रहे थे उन्हें लेना पड़ेगा।

वृषभ : वृषभ राशि के जातकों को बृहस्पति के वक्री होने से मिलाजुला परिणाम मिलेगा। आपके लिए बृहस्पति 8वें और 11वें भाव के स्वामी है। बृहस्पति के आठवें भाव का स्वामी होने के कारण परेशानियां, चुनौतियां आएंगी। और 11वां घर आय का स्थान है। वक्री बृहस्पति के कारण कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़ेंगे जो अब तक आप टालते आए हैं। पिता से संबंधित कार्य और घर से संबंधित कार्य को गति मिलेगी। संपत्ति को लेकर जो विवाद चल रहा है उसका सामना करना पड़ेगा। बृहस्पति जिनकी कुंडली में शुभ हैं उन्हं नया घर और गाड़ी मिल सकती है। पैसा आने के नए रास्ते खुलेंगे। लेकिन जिनकी कुंडली में बृहस्पति खराब हैं उन्हें परेशानियां आएंगी। स्वास्थ्य खराब हो सकता है।

मिथुन : बृहस्पति का वक्री होना आपके लिए कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां और संभावनाएं दोनों लेकर आ रहा हे। आपके लिए बृहस्पति दो केंद्र के स्वामी है। यह एक प्रकार का केंद्राधिपति दोष बनाता हैं। यह चिंताएं बढ़ाएगा। बृहस्पति आपके सातवें और 10वें भाव के स्वामी हैं। सप्तम भाव दांपत्य और दशम कार्य का भाव है। यहां वक्री बृहस्पति के कारण दांपत्य में अचानक कुछ घटनाएं हो सकती हैं। कार्य में परिवर्तन भी संभव है। बृहस्पति यदि आपकी कुंडली में अच्छा है तो नया काम प्रारंभ कर सकते हैं। कहीं यात्रा करना चाहते हैं तो शुभ हो। यह यात्राएं कार्य विस्तार के सिलसिले में भी हो सकती है। शिक्षा और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह बेहतर है। जो लोग किसी प्रकार के सलाहकार का कार्य करते हैं, वे सोच समझकर ही किसी को सलाह दें।

कर्क : आपके लिए बृहस्पति छठे और 9वें भाव के स्वामी हैं। नवम भाग्य स्थान है और छठा शत्रु, रोग, कर्ज का। इसलिए इन स्थानों से जुड़े फलों में न्यूनता आ सकती है। यहां भाग्य कमजोर होने के संकेत मिल रहे हैं। जीवन में थोड़ी परेशानी बढ़ सकती है। शत्रु परेशान करेंगे और कर्ज लेना पड़ सकता है। शारीरिक रूप से इस गोचर के दौरान अस्वस्थ महसूस कर सकते हैं। भाग्य में न्यूनता आने के कारण चलते हुए काम अटक सकते हैं। जिन लोगों का जन्मकालिक बृहस्पति शुभ और मजबूत होगा उन्हें ज्यादा परेशानियां नहीं आएंगी। कार्य गति से होंगे। भूमि, संपत्ति संबंधी कार्य कुशलता से होंगे लेकिन जिनका बृहस्पति कमजोर होगा वे असहज महसूस करेंगे। उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज तक लेना पड़ सकता है।

सिंह : आपके लिए बृहस्पति 5वें और 8वें भाव के स्वामी हैं। पंचम में बृहस्पति का संबंध संतान और शिक्षा से है। इसलिए संतान को लेकर कोई चिंता हो सकती है, लेकिन स्वयं की शिक्षा से जुड़े मामलों में अच्छा प्रदर्शन करने की संभावनाएं बन रही हैं। पंचम स्थान लक्ष्मी, विद्या, बुद्धि, रोमांस का स्थान भी है। यदि आप शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, जनता से जुड़ा कोई काम कर रहे हैं, सलाहकार या काउंसलर हैं तो आपे लिए यह समय शुभ रहेगा। यह समय तब और भी अच्छा रहेगा जब सूर्य सिंह में आएंगे अर्थात् अगस्त-सितंबर में समय अच्छा रहेगा। जब सूर्य अच्छे होंगे तो वक्री बृहस्पति का प्रभाव भी अच्छा मिलेगा। बृहस्पति अष्टमेश भी हैं इसलिए अक्टूबर-नवंबर में विशेष सावधान रहने की जरूरत रहेगी। मौकों का लाभ उठाएं। धन वैभव आएगा।

कन्या : बृहस्पति आपके लिए नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी लेकर आ रहा है। बृहस्पति आपके लिए दो केंद्र स्थानों के स्वामी हैं। चौथे और सातवें भाव से केंद्राधिपति दोष बन रहा है जो शुभ नहीं कहा जा सकता साथ ही बृहस्पति वक्री भी हो रहे हैं। जो ग्रह कुंडली में खराब है और वक्री भी है तो नई चुनौतियां पैदा करता ही है। बीमार होना, कर्ज लेना पड़ सकता है। इस दौरान आप नए काम की शुरुआत करें जिसका लाभ आगे चलकर मिलेगा। इस दौरान मां, पत्नी और बच्चे का ध्यान रखें। बृहस्पति वक्री होने के दौरान पंचम स्थान में भी आएगा जो पद प्राप्ति का स्थान है जिन पर अक्टूबर में फोकस करना होगा। अपने काम पर ध्यान दें विशेष लाभ अर्जित करेंगे।

तुला : आपके लिए बृहस्पति तीसरे और छठे भाव का स्वामी है। कर्ज और रोग भाव में वक्री होना आपके लिए विशेष संकट पैदा कर सकते हैं। इस दौरान आपको मिले जुले परिणाम मिलेंगे। तीसरा पराक्रम और बल का भाव है यहां बृहस्पति के वक्री होने से आपके आत्मविश्वास और पराक्रम में कमी हो सकती है। यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति खराब है तो संतान और पद को लेकर परेशानी आ सकती है। यदि आप सार्वजनिक जीवन जीते हैं, राजनेता हैं, किसी संस्था के मालिक हैं या सलाहकार के रूप में काम कर रहे हैं तो सतर्क रहें किसी से कोई ऐसी बात न करें जिससे बवाल हों। अपकी बदनामी के योग भी बन रहे हैं।

वृश्चिक : बृहस्पति आपके दूसरे और पांचवे भाव का स्वामी है। आपके काम करने और रहने के स्थान में बड़ा परिवर्तन हो सकता है। यह अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है। संभव है आप नई नौकरी करें या नए घर में शिफ्ट हो सकते हैं। कुंडली में बृहस्पति अच्छा है तो आपके लिए यह वक्री होना अत्यंत शुभ रहेगा। कार्य में विस्तार, प्रमोशन होगा। इस दौरान परिवार पर विशेष फोकस रखें। संतान, माता-पिता, जीवनसाथी पर विशेष ध्यान दें, उन्हें वक्त दें। इस दौरान पैसा कमाने के नए रास्ते खुलेंगे। लेकिन ध्यान रखें सीधे रास्तों में निवेश करेंगे तो लाभ होगा। अनैतिक कार्यो में पैसा लगाएंगे तो जेल की यात्रा भी करनी पड़ सकती है।

धनु : आपके लिए लग्न और चतुर्थ भाव के स्वामी हैं बृहस्पति। ये तीसरे भाव में वक्री हो रहे हैं। जो काम काफी समय से आप टालते आ रहे थे या जिन्हें करने से बच रहे थे उन्हें पूरा करने का समय आ गया है। यदि अभी भी टालेंगे तो बृहस्पति वो काम आपसे करवाकर ही मानेंगे। धर्म, धन और शिक्षा से जुड़े काम प्राथमिकता से पूरे करें। अब टालेंगे तोआगे चलकर यही काम आपके लिए मुसीबत बन सकते हैं। आप पर साढ़ेसाती का अंतिम ढैया भी चल रहा है इसलिए कार्यो को लेकर भागदौड़ भी रहेगी। बृहस्पति और शनि यदि आपकी जन्मकालिक कुंडली में ठीक नहीं है तो बड़ी तकलीफें आ सकती है। इस दौरान जीवनसाथी और पिता ही परेशानियों से बचाएंगे। धन को लेकर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

मकर : आपके लिए बृहस्पति तीसरे और 12वें भाव के स्वामी हैं। आपके लिए सलाह है किकिसी भी काम को हड़बड़ी में बिलकुल न करें। खासकर पैसों और संपत्ति से जुड़े कार्यो में सावधानी रखें। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। भाई-बहनों से कोई ऐसी बात न कह दें जो विवाद का कारण बने। बृहस्पति खर्च भी करवाएंगे। यह धर्म के कार्यो में खर्च हो सकता है। किसी संस्था या सामाजिक कार्य करने वाले संस्थान की आर्थिक मदद भी करेंगे। बृहस्पति की सातवीं दृष्टि आठवें भाव पर भी पड़ रही है। इसलिए कुछ घटनाएं आकस्मिक रूप से आपके जीवन में हो सकती हैं। वाहन दुर्घटना आदि की आशंका है, सतर्क रहें।

कुंभ : आपके लिए बृहस्पति दूसरे और 11वें भाव का स्वामी है। ये दोनों धन भाव हैं। इसलिए आपके लिए बृहस्पति का वक्री होना धन से जुड़े मामलों पर ज्यादा प्रभाव डालेगा। पैसा कहां से आएगा और कहां निवेश करना है यह सारा प्लान तैयार है बस सब आपके सामने होने वाला है। बचत और निवेश की यदि आपकी पुरानी आदत है तो ठीक है, वरना पैसा आने के साथ जाने का मार्ग भी खुला हुआ है। इस दौरान शारीरिक अस्वस्थता महसूस कर सकते हैं। नेत्र और मस्तिष्क संबंधी रोग परेशान करेंगे। कुछ कार्यो में चिंताएं बढ़ सकती है। ध्यान रहे आलस्य का त्याग करना है। यदि काम को टालेंगे तो एक दिन यह अटके हुए काम आपके लिए बड़ी मुसीबत पैदा कर सकते हैं।

मीन : मीन राशि के लिए बृहस्पति प्रथम और दशम कर्म स्थान के स्वामी हैं और यह 12वें भाव में वक्री होंगे। इस कारण आपके काम और रहने के स्थान में परिवर्तन हो सकता है। कार्य स्थल पर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है या प्रमोशन के साथ स्थानांतरण होने के चांस भी हैं। यदि आप नया घर तलाश रहे हैं तो उस दिशा में काम सफल होने के योग हैं। यदि बृहस्पति कुंडली में खराब है तो यह चिंताएं बढ़ा सकता है। इस दौरान पिता और जीवनसाथी आपको मुसीबत से बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं। आर्थिक दृष्टि से बृहस्पति का वक्री होना आपके लिए मिलाजुला ही रहेगा।

ये उपाय करें, बृहस्पति देंगे शुभ प्रभाव

बृहस्पति के वक्री होने के दौरान सभी राशि के जातक भगवान शिव और भगवान विष्णु का विशेष पूजन, मंत्र जप आदि कर सकते हैं। भगवान विष्णु के मंत्र ऊं नम: शिवार का मानसिक जाप करते रहें। प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और कच्चा दूध मिश्रित करके अर्पित करें। प्रतिदिन नहीं कर सकते तो इस संपूर्ण वक्रत्व काल के दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार को अर्पित करें। इसके अलावा विष्णुसहस्त्रनाम का जाप प्रतिदिन करें। जाप नहीं कर सकते तो सुनें। इसके अलावा भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मंत्र ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना भी लाभदायक रहेगा।

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