मगर की आकृति में स्थित है तारागणों का समूह

By: पं. गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। नक्षत्रों के बिना ज्योतिष शास्त्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती। बारह राशियों चक्र में 27 मुख्य नक्षत्र होते हैं और 28वां नक्षत्र अभिजीत माना गया है। अक्सर चर्चा होती है कि फलां व्यक्ति का जन्म फलां नक्षत्र में हुआ है।

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मुहूर्त की बात आती है तो उसमें शुभ-अशुभ नक्षत्र देखकर मुहूर्त निकाला जाता है। पुष्य नक्षत्र को तो नक्षत्रों का राजा कहा गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं आकाशगंगा में नक्षत्र कैसे, कहां और किस रूप में स्थित हैं।

आइये हम जानते हैं नक्षत्रों की वास्तविक स्थिति क्या होती है....

तारामंडल के आधार पर

तारामंडल के आधार पर

ज्योतिष शास्त्र तारामंडल के आधार पर, ग्रह-नक्षत्र के आधार पर समय के तीनों आयामों की सटीक जानकारी देने में सक्षम शास्त्र है। यह तारामंडल आकाश में स्थित है और इसके बारे में हमारे प्राचीन ग्रंथों में काफी जानकारी दी गई है। ब्रह्म पुराण में भगवान नारायण के संपूर्ण शरीर के रूप में आकाश मंगल का वर्णन किया गया है-

  • तारामयं भगवतः शिशुमाराकृतिप्रभोः ।
  • दिवि रूपं हरेर्यत्तु तस्य पुच्छे स्थितो ध्रुवः ।।

अर्थात् शिशुमार यानी मगर की आकृति वाले तारामय दिव्य रूप भगवान विष्णु के पुच्छ भाग में ध्रुव स्थित है।

शिशुमार आकृति का वर्णन

शिशुमार आकृति का वर्णन

श्रीमद्भागवत में शिशुमार आकृति का वर्णन करते हुए कहा गया है कि शिशुमार कुंडली मारकर बैठा हुआ है। इसका मुख नीचे की ओर है। इसकी पूंछ के सिरे पर ध्रुव स्थित है। इसके कटि यानी कमर में सप्तर्षि हैं। यह दाहिनी और सिकुड़कर कुंडली मारे हुए है। ऐसी स्थिति में अभिजीत से लेकर पुनर्वसु तक चौदह नक्षत्र इसके दाहिने भाग में हैं तथा पुष्य से लेकर उत्तराषाढ़ा तक चौदह नक्षत्र बायें भाग में हैं।

पेट में आकाशगंगा

पेट में आकाशगंगा

इसकी पीठ में अन्य नक्षत्रों का समूह है तथा पेट में आकाशगंगा है। इसके दाहिने ओर कटितटों में पुनर्वसु नक्षत्र है। पीछे के दाहिने और बाएं चरणों में आर्द्रा और अश्लेषा नक्षत्र हैं तथा दाहिने और बाएं नथुनों में क्रमशः अभिजीत और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है।

श्रवण और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

श्रवण और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र

इसी प्रकार दाहिने और बाएं नेत्रों में श्रवण और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और बाएं कानों में धनिष्ठा एवं मूल नक्षत्र हैं। मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा ये 8 नक्षत्र शिशुमार की बायीं पसलियों तथा मृगशिरा, रोहिणी, कृतिका, भरणी, अश्विनी, रेवती, उत्तराभाद्रपद और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र इस कुंडली भूत नारायण की दाहिनी पसलियों में हैं। शतभिषा और ज्येष्ठा ये दो नक्षत्र क्रमशः दाहिने और बाएं कंधों की जगह में हैं।

ग्रह भी है इसी में स्थित

ग्रह भी है इसी में स्थित

इस मगर की ऊपरी थूथनी में अगस्त्य, नीचे की ठोड़ी में नक्षत्र रूप यम, मुख में मंगल, लिंग प्रदेश में शनि, कूबड़ में बृहस्पति, छाती में सूर्य, हृदय में नारायण, मन में चंद्रमा, नाभि में शुक्र, स्तनों में अश्विनी कुमार, प्राण और अपान में बुध, गले में राहु, समस्त अंगों में केतु और रोमों में संपूर्ण तारागण स्थित है।

वैज्ञानिक अनुसंधानों से मेल खाता है यह वर्णन

वैज्ञानिक अनुसंधानों से मेल खाता है यह वर्णन

हमारे ग्रंथों में तारामंडल का यह जो वर्णन मिलता है यह आज के वैज्ञानिक अनुसंधानों से पूर्णतः मेल खाता है। वर्तमान में वैज्ञानिक आकाशगंगा का जो चित्र पेश करते हैं ग्रंथों में दिया गया वह वर्णन आकाशगंगा का ही शाब्दिक वर्णन है।

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English summary
Nakshatra is the term for lunar mansion in Hindu astrology. A nakshatra is one of 28 (sometimes also 27) sectors along the ecliptic. Their names are related to the most prominent asterisms in the respective sectors.
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