मांगलिक दोष के कारण विवाह में आ रही है दिक्कत तो कीजिए ये उपाय
लखनऊ। आजकल मांगलिक योग से अधिकतर लोग भयभीत रहते है। अनेक अभिवावक संतान की कुण्डली में इसकी उपस्थिति सुनकर मात्र भयभीत हो जाते हैं। साधरणतया रूप में कुण्डली में जब मंगल 1, 4, 7, 8 व 12 वें भाव में होता है तो जातक मांगलिक माना जाता है। दक्षिण भारत में दूसरे भाव में मंगल होने से भी माॅगलिक योग माना जाता है। मांगलिक योग हमेशा अशुभ फल प्रदान नहीं करता है। इसके कुछ अपवाद भी है, जिनकी वजह से माॅगलिक दोष भंग भी हो जाता है।

यदि मांगलिक योग भंग नहीं होता है तो
यदि मांगलिक योग भंग नहीं होता है तो निश्चित रूप से जातक के विवाह में अड़चने आती है। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहें है, जिन्हें श्रद्धा पूर्वक करने से मांगलिक दोष के कारण विवाह में आ रही बाधायें समाप्त होकर शीघ्र विवाह होता है।

यदि पुरूषों के विवाह में बाधा आ रही है तो
यदि पुरूषों के विवाह में बाधा आ रही है तो गुरूवार को सांयकाल में सरपुंखा के पौधे पर जल चढ़ायें एवं दो अगरबत्ती जलाकर निमंत्रण दें कि प्रातःकाल थोड़ी से जड़ लें। पुनः शुक्रवार को स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्योदय के समय एक लोटा जल पौधे पर चढ़ायें, धूप जलायें तथा ‘‘ऊॅ शुं शुक्राय नमः'' का जाप करते हुये सात परिक्रमा करें। फिर थोड़ी सी जड़ लें। इस जड़ को घर लाकर गंगाजल से शुद्ध करके श्वेत वस्त्र में लपेटकर दांयें हाथ की भुजा पर बाॅध लें। ऐसा करने से जातक का विवाह जल्दी होता है।

अगर लड़कियों के विवाह में अड़चने आ रही है तो
अगर लड़कियों के विवाह में अड़चने आ रही है तो बुधवार को सांयकाल में भाॅगरे अथवा केले के पौधे को निमन्त्रण दें तथा गुरूवार को प्रातः काल केले के पौधे की परिक्रमा कर जड़ को प्राप्त कर लें। इस जड़ को घर लाकर हल्दी मिश्रित जल से स्नान करायें एवं पीले कपड़े में लपेट कर पीले धागे में डालकर गले में धारण कर लें तथा बृहस्पति के मन्त्र ‘‘ऊॅ बृं बृहस्पते नमः'' का 108 बार नित्य जाप करें एवं एक स्फटिक की माला को गले में धारण कर लें।

इन मंत्रों का करें जाप
कन्या शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को सीताराम जी अथवा शिव-पार्वती के चित्र के सम्मुख तुलसी की माला से रामचरित मानस की निम्न चैपाई को 108 बार मन्त्र के रूप में जपने से विवाह शीघ्र हो जाता है।
मन्त्र-सुनिसिय सत्य असीम हमारी। पूजहि मन कामना हमारी।।
यदि विवाह में अत्यधिक विलम्ब हो गया हो और संभावनाएॅ भी क्षीण होती लग रही हो तो शुक्लपक्ष के प्रथम बृहस्पतिवार को देवी भगवती के चित्र के सम्मुख सरसों के तेल का दीपक जलाकर नैवेद्य चढ़ायें एवं नित्य 108 बार नीचे लिखे मन्त्र का जाप करने से माॅ भगवती की कृपा से विवाह शीघ्र सम्पन्न होता है।
मन्त्र-कात्यायनी महामाये महायोगिन्य धीश्वरी। नन्द गोप सुतं देवि, पतिं में कुरू ते नमः।।
- जिस कन्या के विवाह में मांगलिक दोष के कारण देरी हो रही हो, वह कन्या किसी कन्या के विवाह में उस समय जायें जब तेल चढ़ता हो तो उस समय लगाये जाने वाले उबटन से थोड़ा-सा उबटन प्राप्त कर लें तथा घर लाकर उसकी गणेश प्रतिमा बना लें फिर हल्दी व सिन्दूर चढ़ाकर कामना करें कि उसका विवाह भी शीघ्र हो जाये। उबटन से बनी गणेश प्रतिमा का नित्य पूजन करने से विवाह में आने वाली अड़चने दूर होकर शीघ्र ही विवाह होता है।












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