Holi 2018: फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत आज, जानें पूजा विधि और मुहूर्त
हिंदू वर्ष के अंतिम महीने फाल्गुन की पूर्णिमा होली के दिन पड़ रही है। इसलिए इसे फाल्गुनी पूर्णिमा भी कहते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत रखता है, उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। इस साल फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत 1 मार्च को होलिका दहन के दिन रखा जाएगा।
नई दिल्ली। हिंदू वर्ष के अंतिम महीने फाल्गुन की पूर्णिमा होली के दिन पड़ रही है। इसलिए इसे फाल्गुनी पूर्णिमा भी कहते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत रखता है, उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। इस साल फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत 1 मार्च को होलिका दहन के दिन रखा जाएगा। कैसे इस व्रत को रखकर आप पा सकते हैं अपने सभी कष्टों से मुक्ति, जानिए-

होलिका दहन के दिन फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत रख सभी भक्त अपने पापों से मुक्ति पा सकते हैं। इस व्रत का काफी महत्व माना जाता है। नारद पुराण में इस व्रत के लिए कथा भी बताई गई है। असुर राजा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका इस दिन अपने भाई के बेटे प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी थी। हिरण्यकश्यप के बेटे प्रह्लाद को मारने के लिए होलिका उसे अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी लेकिन वो खुद उस अग्नि में भस्म हो गई। प्रह्लाद भगवान विष्णु का बड़ा भक्त था और उन्होंने इस अग्नि से उसे बचाया था। इसी के बाद से होलिका दहन मनाया जाता है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है।
होलिका दहन के लिए लकड़ी और उपलों से होलिका बनाई जाती है और उसे चारों ओर से बांधा जाता है। इसके बाद मंत्रों के उच्चारण से होलिका में आग लगा उसे दहन किया जाता है। होलिका दहन की अग्नि तेज होने पर उसके चारों ओर परिक्रमा कर भगवान विष्णु को याद किया जाता है। होलिका दहन के बारे में ये भी कहा जाता है कि इस अग्नि में भक्त अपने अहंकार की आहुति देते हैं।
होलिका दहन के दिन भक्त फाल्गुनी पूर्णिमा का व्रत करेंगे। ये व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक किया जाएगा। पूर्णिमा का समय 1 मार्च को सुबह 8:57 से 2 मार्च सुबह 6:21 तक है। वहीं होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:16 से रात 8:47 तक है।
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