अंगुलियों के जोड़ खोलते हैं आपके दिल के राज, जानिए कैसे?

लखनऊ। हाथ देखने में अंगुलियों के विकसित, गांठदार अथवा अविकसित जोड़ो का भी बहुत महत्व है। ये जोड़ यदि प्रतीकात्मक भाषा में कहा जाए तो अंगुलियों के पर्वो के मध्य दीवार जैसे होते है और व्यक्ति की विशेषताओं तथा स्वभाव के प्रति द्योतक होते है। यदि किसी व्यक्ति की अंगुलियों के जोड़ चिकने होते है तो वह आवेशात्मक प्रवृत्ति का होता है और बिना अपने विवेक से काम लिए किसी भी निर्णय पर पहुंच जाता है। चैकोर हाथ में, इस स्थिति का कुछ सुधार हो जाता है, किन्तु पूरी तरह से समाप्त नहीं होता है।

 चौकोर अंगुली वाले लेते है शीघ्र निर्णय

चौकोर अंगुली वाले लेते है शीघ्र निर्णय

परिणाम स्वरूप एक वैज्ञानिक जिसकी चौकोर अंगुलियों हों, किन्तु जोड़ चिकने हो तो वह निर्णय तो शीघ्र लेता है, किन्तु अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से समझ नहीं पाता है। इस प्रकार का एक चिकित्सक भी अपने मरीज का इसी तरह से रोग परीक्षण करेगा। यदि व्यक्ति वास्तव गुणवान है, तो वह अपने कार्य तथा निर्णय में सही हो सकता है। किन्तु ऐसे लोग चैकोर हाथ वाले एवं गांठदार जोड़ वाले लोगोे की तुलना में कहीं अधिक गलतियां करते है।

नुकीले हाथ

नुकीले हाथ

नुकीले हाथ में चिकने जोड़ शुद्ध रूप से अन्र्तज्ञान के द्योतक होते है। ऐसे व्यक्ति किसी प्रकार की विवेचना के चक्कर में नहीं पड़ते है। वे पोशाक के प्रति लापरवाह होते है तथा दिखावट व छोटे-छोटे मामलों पर भी ध्यान नहीं देते है। व्यवसाय के मामलें में ऐसे लोग छोटे-छोटे कागजों तथा अन्य समान को यथा स्थान पर रख नहीं पाते है। यद्यपि वे अन्य लोगों पर व्यवस्थित रूप से कार्य करने का आदेश देते रहते है। गांठदार जोड़ वाले मामलों में इसका विपरीत रूप देखने को मिलता है। इन आकारों के बढ़ाव-घटाव से कार्य की क्षमता में कोई अन्तर नहीं आता है। चिकने जोड़ उन लोगों में देखने को मिलते है, जो शारीरिक श्रम करते है। इसी प्रकार से गांठदार व उन्नत जोड़ उन लोगों में देखने को मिलते है, जो जातक मानसिक कार्य अधिक करते है। इस प्रकार के हाथ कई पीढ़ियों तक एक परिवार में देखने को मिलते है।

गांठदार अथवा उन्नत जोड़़

गांठदार अथवा उन्नत जोड़़

गांठदार अथवा उन्नत जोड़़ चिकने जोड़ो के विपरीत होते है। अतः ऐसे जोड़ वाले व्यक्ति कार्य व उसकी प्रणाली में अधिक यथार्थता का प्रदर्शन करते है। ऐसे मामलों में चौकोर हाथ एवं गांठदार जोड़ वाला व्यक्ति वैज्ञानिक खोजों में लगा रहता है। वह यह चिन्ता नहीं करता है कि जिस वैज्ञानिक का विशलेषण करने में वह लगा है, उसके विस्तृत विश्लेषण में उसे कितना समय लगेगा। ठीक यही कारण है कि दार्शनिक हाथों वाले व्यक्ति अपने कार्यो की गहराई व यर्थाथ में जाते है। इस प्रकार के जोड़ों वाले व्यक्ति कमरे की व्यस्था तक में यदि कोई वस्तु अव्यवस्थित हो जाए तो उस पर भी ध्यान नहीं देते है। वे छोटी-छोटी बातों की चिन्ता नहीं करते है और बड़ी-बड़ी समस्याओं पर भी शान्त बने रहते है। ऐसे लोगोें को कोई चीज इतना क्रोधित नहीं करती जितना कि किसी ऐसी स्त्री के साथ चलना जिसके वस्त्रों में रंगो का मेल न हो।

मानव स्वभाव को समझने की अपूर्व क्षमता

मानव स्वभाव को समझने की अपूर्व क्षमता

नाटक के कार्य में ऐसे जोड़ वाले व्यक्ति अभिनेताओं को पात्रों की भूमिका में बड़ी कुशलता से नियुक्त करते है। किन्तु उनमें नाटकीय कला व विस्तार की कमी पाई जाती है। विज्ञान के बाहर वे साहित्य क्षेत्र में विशेषता प्राप्त करते है। क्योंकि उनमें मानव स्वभाव को समझने की अपूर्व क्षमता होती है तथा उन्हें मानवता का सही ज्ञान बिना किसी विशेष प्रयास के ही प्राप्त होता है। पर्वो के बीच गाॅठदार जोड़, आवेश के वेग को रोककर मनुष्य की प्रकृति को निरीक्षणशील, विचारवान तथा विश्लेषक बना देते है।

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