जीवन की दशा और दिशा बदल देते हैं चमत्कारिक मंत्र

नई दिल्ली। वैदिक काल से हिंदू पूजा पद्धति का प्रमुख अंग बने हुए हैं मंत्र। ये मंत्र साधारण श्रेणी से लेकर कार्य विशेष की पूर्ति के लिए अलग-अलग होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि मंत्रों को पूर्ण श्रद्धा और संयम के साथ प्रयोग करना चाहिए। अविश्वास के साथ किया गया मंत्र जाप सफल नहीं होता है। साथ ही मंत्रों का उच्चारण करने में शुद्धता का ध्यान रखा जाना भी अत्यंत आवश्यक है। यदि सही विधि से मंत्र जाप किए जाएं तो वे आपके जीवन की दशा और दिशा बदलने की शक्ति रखते हैं।

आइए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही मंत्र जो आपके कार्यों को पूर्ण करके आपके जीवन को सुखी बना देंगे...

गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष लाभकारी

गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष लाभकारी

ऊं क्लीं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते
देहि मे तनयं कृष्णं त्वामहं शरणं गतः क्लीं ऊं

यह मंत्र गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष लाभकारी है। वे यदि स्फटिक या तुलसी की माला से संपूर्ण गर्भकाल के दौरान इस मंत्र का जाप करें तो उन्हें स्वस्थ, सुंदर और बौद्धिक गुणों से युक्त संतान की प्राप्ति होगी। यह मंत्र उन लोगों को भी जपना चाहिए जो श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं या पारिवारिक सुख का भोग करना चाहते हैं।

स्फटिक की माला से करें जाप

स्फटिक की माला से करें जाप

ऊं नमो भगवते वासुदेवाय

अपने पूजा स्थान में पूर्वाभिमुख होकर पीले या लाल रंग के आसान पर बैठें। स्फटिक की माला से इस मंत्र का प्रतिदिन 11, 21 या 31 माला जाप करें। चाहे आप किसी भी राशि या लग्न वाले हों, यह मंत्र आपको समस्त ग्रह दोषों से बचाएगा। यह कार्यों में सिद्धि और भगवाण विष्णु की कृपा प्राप्त करने का मंत्र है। जीवन में जब भी किसी संकट में हों इस मंत्र का जाप करें कार्य बाधाएं समाप्त होंगी। अविवाहितों को भी श्रेष्ठ विवाह सुख प्रदान करता है यह मंत्र।

ऊं तत् स्वरूपाय स्वाहा

यह भगवान विष्णु का चमत्कारिक और शीघ्र प्रभाव दिखाने वाला मंत्र है। उत्तर की ओर मुख करके पूजा स्थान में बैठ जाएं। भगवान विष्णु का मानसिक ध्यान करने के बाद तुलसी की माला से इस मंत्र का जाप करें। अपनी क्षमता के अनुसार 5, 11 या 21 माला प्रतिदिन जाप करें। एक महीने में यह मंत्र पूर्ण सिद्ध हो जाता है। इसके प्रभाव से धन-संपदा की प्राप्ति होती है।

ऊं श्रीं

ऊं श्रीं

यह सौंदर्य लक्ष्मी का मंत्र है। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। मन में महालक्ष्मी का ध्यान करें और स्फटिक की माला से मंत्र जप करें। मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति के आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होती है। दूसरे व्यक्ति उसकी बात मानने लगते हैं। मान-सम्मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। धन-संपदा में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगती है।

ऊं तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्रः प्रचोदयात

यह शिव गायत्री मंत्र है। बल, साहस में वृद्धि करने, रोगों का नाश करने और निर्भय बनाने में इस मंत्र का कोई मुकाबला नहीं। इस मंत्र के जप के लिए पूर्व की ओर मुंह करके बैठ जाएं। शिव का मानसिक ध्यान करें और रूद्राक्ष की माला से 5, 11 या 21 माला जाप करें। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति समस्त प्रकार के रोगों से मुक्त रहता है। परेशानियां उसके पास भी नहीं आती।

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