शिक्षा के क्षेत्र में बन रहे हैं कैसे योग, जानें अपनी कुण्डली के अनुसार

इन्सान शिक्षा के बिना अधूरा होता है। शिक्षा व्यक्तित्व का विकास करती है और साथ-साथ आपके आत्म-विश्वास में वृद्धि भी करती है। शिक्षा ग्रहण करने के बाद इन्सान अपने करियर पर फोकस करता है जिससे वह एक बेहतरीन लाइफ जी सके।

नई दिल्ली। इन्सान शिक्षा के बिना अधूरा होता है। शिक्षा व्यक्तित्व का विकास करती है और साथ-साथ आपके आत्म-विश्वास में वृद्धि भी करती है। शिक्षा ग्रहण करने के बाद इन्सान अपने करियर पर फोकस करता है जिससे वह एक बेहतरीन लाइफ जी सके। अगर आपको पहले से पता चल जाये कि आपकी शिक्षा आपको किस क्षेत्र में ले जायेगी तो कितना अच्छा रहेगा। आईये आपको बताते है कि कुण्डली के अनुसार आपकी शिक्षा क्या कहती है।

Astrology

शुक्रश्चतुर्थगो यस्य गानविद्या विशारदःः।

चतुर्थस्थस्सोमसुतो ज्योतिश्शास्त्र विशारदः।।

1- यदि शुक्र चतुर्थ भाव में हो तो, जातक गाने में निपुण होता है और यदि बुध चतुर्थ भाव में हो, तो जातक ज्योतिष शास्त्र का ज्ञाता होता है।

रविर्वा बुधराहुर्वा पंचमस्थानसंस्थिताः।

ज्योतिर्विद्याप्रवीणस्याद्विषवैद्यवरो भवेत्।।

2- सूर्य, बुध अथवा राहु यदि पंचम भाव में स्थित हों तो जातक ज्योतिष शास्त्र में प्रवीण तथा एक अच्छा वैद्य होता है।

3- यदि सूर्य और बुध द्वितीय भाव में स्थित हो, तो जातक ज्योतिष विद्या में निपुण होता है और यदि सूर्य, बुध पर शनि की दृष्टि हो तो व्यक्ति गणित विद्या का अच्छा जानकार होता है।

4- यदि द्वितीय भाव में सूर्य और मंगल हो, तो व्यक्ति तर्क शास्त्र में निपुण होता है। यदि पंचम भाव में शनि, सूर्य और बुध हो तो व्यक्ति वेदान्त शास्त्र में निपुण होगा या फिर एक अच्छा शिक्षक होगा।

5- ''बुधभानू केन्द्र कोण लाभस्थौ गणको भवेत्।

द्वितीयस्थौ यदि भृगुः कविताधर्मश्नुते''।।

अर्थात यदि सूर्य और बुध प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम या पंचम, नवम व एकादश भाव में स्थित हो तो मनुष्य गणक होता है। शुक्र यदि द्वितीय भाव में हो, तो मनुष्य कवितायें रचने वाला होता है।

6- यदि राहु पंचम भाव में हो, तो जातक दूसरों के गूढ़ भावों को भी जानने की क्षमता रखता है। चतुर्थ भाव में राहु माता को दीर्घ जीवी बनाता है।

7- यदि गुरू द्वितीय स्थान में निज क्षेत्र में अथवा अपनी उच्च राशि में स्थित हो, तो जातक वेद-वेदांग का ज्ञाता होता है।

8- यदि द्वितीयेश और गुरू केन्द्र अथवा कोण में स्थित हों, तो जातक को हर प्रकार की विद्या की प्राप्ति होती है और वह सभी लोगों से आदर व सम्मान मिलता है।

9- द्वितीय स्थान में मंगल व्यक्ति को तर्क शास्त्र में प्रवीण करता है। उसी द्वितीय स्थान में यदि चन्द्रमा स्थित हो, तो भक्ति यज्ञ आदि करने वाला कर्मकाण्डी होता है।

10- यदि शुक्र द्वितीय में हो, तो कविता तथा अलंकार शास्त्र को जानने वाला होता है। यदि उस स्थान में शनि हो, तो व्यक्ति दुष्ट प्रवृत्ति का होता है।

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