जानिए होलिका-दहन का शुभ मुहूर्त
होली अग्नि उपासना का उत्सव है। मनुष्य ही नहीं प्रकृति के समुल्लास का महोत्सव है। जब प्रकृति अपने सभी रूपों में तरूण होती है तब होली का उत्सव मनाया जाता है। कुछ विद्वान इसे ईसा के बाद का उत्सव मनाते है। जैमिनी की पूर्व मींमासा के सूत्रों में होली को 'होलाका' उत्सव बताया गया है। पूर्व मींमासा में इस पर्व के उल्लेख का सीधा अर्थ है कि इन सूत्रों के रचनाकाल से भी पहले होली बड़े उत्सव के रूप में मनाई जाती होगी। संस्कृति और दर्शन सबको एक सूत्र में बांधते है। होली भारतीय दर्शन का परमोल्लास है।

होली भारतीय दर्शन का परमोल्लास
यह सबको एक सूत्र, एक गोत्र और प्रेम की एक डोर में बांधती है। इस समय करोड़ो मन एक होकर परमआनन्द की अनुभूति करते है। सब गाते है, सब नाचते है। अश्लील हास-परिहास छन्द का रूप धारण कर लेते है। गिले-शिकवे दूर करके गले मिलना बुरा न मानों होली है।
होलिकादहन का शुभ मुहूर्त- 5 मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन करना शुभ रहेगा। सांय 5: 50 मि0 रात्रि 8:15 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा।












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