Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

आखिर क्यों हैं सावन भगवान शिव का प्रिय महीना?

ऐसी मान्यता है कि प्रबोधनी एकादशी से सृष्टि के पालन कर्ता भगवान विष्णु सारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर अपने दिव्य भवन पाताललोक में विश्राम करने के निकल लेते है और अपना सारा कार्यभार अपने समकक्ष मस्त-मौला अवघड़ बाबा महादेव को सौंप देते है। भगवान भूतनाथ गौरा पार्वती के साथ पृथ्वी लोक पर विराजमान रहकर पृथ्वी वासियों के दुःख दर्द को समझते है एंव उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है।

शिव को सावन ही क्यों प्रिय है ?

महादेव को श्रावण मास वर्ष का सबसे प्रिय महीना लगता है। क्योंकि श्रावण मास में सबसे अधिक वर्षा होने के आसार रहते है, जो शिव के गर्म शरीर को ठंडक प्रदान करती एंव हमारी कृषि के लिए भी अत्यन्त लाभकारी है। भगवान शंकर ने स्वयं सनतकुमारों को सावन महीने की महिमा बताई है कि मेरे तीनों नेत्रों में सूर्य दाहिने, बांये चन्द्र और अग्नि मध्य नेत्र है। हिन्दू कैलेण्डर में महीनों के नाम नक्षत्रों के आधार पर रखें गयें है।

सावन में बम बम बोलिए और घर के कलह दूर कीजिये

जैसे वर्ष का पहला माह चैत्र होता है, जो चित्रा नक्षत्र के आधार पर पड़ा है, उसी प्रकार श्रावण महीना श्रवण नक्षत्र के आधार पर रखा गया है। श्रवण नक्षत्र का स्वामी चन्द्र होता है। चन्द्र भगवान भोले नाथ के मस्तक पर विराज मान है। जब सूर्य कर्क राशि में गोचर करता है, तब सावन महीना प्रारम्भ होता है। सूर्य गर्म है एंव चन्द्र ठण्डक प्रदान करता है, इसलिए सूर्य के कर्क राशि में आने से झमाझम बारिस होती है। जिसके फलस्वरूप लोक कल्याण के लिए विष को ग्रहण करने वाले देवों के देव महादेव को ठण्डक व सुकून मिलता है। शायद यही कारण है कि शिव का सावन से इतना गहरा लगाव है।

सावन और शिव के संबंध को विस्तार पूर्व जानने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये...

विल्वपत्र ही क्यों?

विल्वपत्र ही क्यों?

हम सभी ने गर्मियों में बेल का शरबत सेंवन किया होगा। बेल वात, पित्त व कफ को नियन्त्रित करता है तथा पाचन संस्थान को बलवान बनाता है। आयुर्वेद में बेल की बड़ी महिमा बताई गई है। यह एक जगंली पेड़ जो आम-तौर पर लोग अपने घर में इसे नहीं लगाते है। बेल की पत्तियों को जितना तोड़ा जायेगा इस पेड़ का उतना ही विकास होगा। यह प्रकृति की अनमोल कृति बची रही है, इसलिए इसकी पत्तियों को भगवान शंकर पर चढ़ाया जाता है।

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

1- बिल्वपत्र भोले नाथ पर सदैव उल्टा रखकर अर्पित करें।

2- बिल्वपत्र में चक्र एंव वज्र नहीं होने चाहिए। कीड़ो द्वारा बनायें हुये सफेद चिन्हों को चक्र कहते है और डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते है।

3- बिल्वपत्र कटे या फटे न हो। ये तीन से लेकर 11 दलों तक प्राप्त होते है। रूद्र के 11 अवतार है, इसलिए 11 दलों वाले बिल्वपत्र चढ़ायें जाये ंतो महादेव ज्यादा प्रसन्न होंगे।

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

4- बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों तक पाप नष्ट हो जाते है।

5- शिव के साथ पार्वती जी पूजा अवश्य करें तभी पूर्ण फल मिलेगा।

6- पूजन करते वक्त रूद्राक्ष की माला अवश्य धारण करें।

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

बिल्वपत्र कैसे चढ़ायें?

7- भस्म से तीन तिरछी लकीरों वाला तिलक लगायें।

8- शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए।

9- शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करें।

10- शिव जी पर केंवड़ा व चम्पा के फूल कदापि न चढ़ायें।

शिव जी के 11 नामों का उच्चारण करने से हर मनोकामना पूर्ण होगी

शिव जी के 11 नामों का उच्चारण करने से हर मनोकामना पूर्ण होगी

1- ऊॅ अघोराय नामः।
2- ऊॅ शर्वया नमः।
3- ऊॅ महेश्वराय नमः।
4- ऊॅ ईशानाय नमः।
5- ऊॅ शूलपाणे नमः।

शिव जी के 11 नामों का उच्चारण करने से हर मनोकामना पूर्ण होगी

शिव जी के 11 नामों का उच्चारण करने से हर मनोकामना पूर्ण होगी

6- ऊॅ भैरवाय नमः।
7- ऊॅ कपर्दिने नमः।
8- ऊॅ त्रयम्बकाय नमः।
9- ऊॅ विश्वरूपिणे नमः।
10- ऊॅ विरूपक्षाय नमः।
11- ऊॅ पशुपते नमः।

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

मेष- ऊॅ मंगलाय नमः का जप करें एंव मीठे जल से अभिषेक करें।

वृष- ऊॅ तेजोनिधाय नमः का जप करें तथा दही से अभिषेक करें।

मिथुन- ऊॅ वागीशाय नमः का उच्चारण करें एंव बिल्प पत्र, भाॅग, धतूरा आदि चढ़ायें।

कर्क- ऊॅ सोमाय नमः का जप करें व दूध व मिश्री मिलाकर आभिषेक करें।

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

सिंह- ऊॅ बभ्रवे नमः मन्त्र का उच्चारण करके जल से अभिषेक करें।

कन्या- ऊॅ जीवाय नमः मन्त्र का जाप करें एंव कुशा व दूर्वा चढ़ायें।

तुला- ऊॅ भूमिपुत्राय नमः का उच्चारण करते हुये दूध से अभिषेक करें।

वृश्चिक- ऊॅ महीप्रियाय नमः का जप करते हुये गन्ने के रस से अभिषेक करें।

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

राशियों के मुताबिक भोले बाबा को प्रसन्न करें

धनु-ऊॅ भुजाय नमः का उच्चारण करें तथा कनेर का फूल व धतूरा चढ़ायें।

मकर- ऊॅ गंगाधराय नमः मन्त्र का जप करते हुये बिल्पपत्र व शमी की पतियाॅ चढ़ायें।

कुम्भ- ऊॅ नीलकमलाय नमः का जप करें तथा रूद्राष्टक का पाठ करें।

मीन- ऊॅ भास्कराय नमः मन्त्र का उच्चारण करते हुये दूध, दही, घी आदि से अभिषेक करें।

शिव जी पर कौन सा पुष्प चढ़ाने से क्या लाभ होगा?

शिव जी पर कौन सा पुष्प चढ़ाने से क्या लाभ होगा?

बिल्वपत्र चढ़ाने से- पापों से मुक्ति मिलेगी।

कमल का फूल चढ़ाने से- धन वृद्धि एंव शान्ति प्राप्त होगी।

कुशा के चढ़ाने से- मुक्ति एंव सौभाग्य में वृद्धि होगी।

शिव जी पर कौन सा पुष्प चढ़ाने से क्या लाभ होगा?

शिव जी पर कौन सा पुष्प चढ़ाने से क्या लाभ होगा?

दूर्वा चढ़ाने से- आयु में वृद्धि तथा दुर्घटना से रक्षा।

आक का फूल चढ़ाने से- पद, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

कनेर का फूल चढ़ाने से- शरीर निरोगी होगा और कष्टों में कमी आयेगी।

शमी पत्र चढ़ाने से- पापों का नाश होगा एंव विरोधियों का दमन होगा।

सोमवार को क्या चढ़ायें?

सोमवार को क्या चढ़ायें?

सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव जी पर कोई विशेष वस्तु अर्पित की जाती है, उसे शिव मुटठी कहते है।

पहला सोमवार- एक मुटठी कच्चे चावल चढ़ाने से लाभ होता है।
दूसरा सोमवार- एक मुटठी सफेद तिल चढ़ायें।
तीसरा सोमवार- एक मुटठी हरी वाली खड़ी मूंग चढ़ायें।
चौथा सोमवार- एक मुटठी जौ आर्पित करें।
पांचवा सोमवार- एक मुटठी बेसन का सेतुआ चढ़ायें।

नोट- यदि सावन में पांच सोमवार न पड़े तो अन्तिम सोमवार को दो मुटठी सूखे मेवा व मीठे का भोग चढ़ायें।

सावन महीने के हर दिन पूजन करने का भिन्न-2 फल

सावन महीने के हर दिन पूजन करने का भिन्न-2 फल

रविवार- इस दिन शिव जी का विधिवत पूजन करने से सन्तान का विकास एंव पाप का नाश होगा।

सोमवार- इस दिन शिव जी का पूजन करने से घर की स्त्रियाॅ स्वस्थ्य रहेंगी और धन का लाभ होगा।

मंगलवार- इस दिन शंकर जी का पूजन करने से शरीर निरोग होगा एंव भाईयों का आपस में प्रेम बढ़ेगा।

सावन महीने के हर दिन पूजन करने का भिन्न-2 फल

सावन महीने के हर दिन पूजन करने का भिन्न-2 फल

बुधवार- इस दिन शंकर जी का पूजन करने से बुद्धि का विकास होगा और सन्तान का पढ़ाई में मन लगेगा।

गुरूवार- इस दिन भोले बाबा का पूजन करने से पुत्र-पौत्रादि में वृद्धि होगा व आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

शुक्रवार- इस दिन शंकर जी का पूजन करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आयेगी एंव भौतिक संसाधनों की वृद्धि होगी।

शनिवार- इस दिन महादेव जी का पूजन करने से रूके हुये कार्य बनेंगे तथा शत्रुओं का दमन होगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+