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AI In Crime Investigation: अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पुलिस की तीसरी आंख, इसकी पैनी नजर से बचना नामुमकिन

AI In Crime Investigation: पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर एक संदिग्ध की पहचान की थी। उस वक्त यह केस काफी चर्चा में रहा था। पुलिस ने एआई तकनीक के जरिए संदिग्ध की पहचान कर उसे पकड़ा था। जिस काम में पहले कई सप्ताह लग जाते थे, उसे एआई तकनीक की मदद से कुछ घंटों में ही कर लिया गया। अमेरिका और जापान जैसे देशों में अपराधियों को पकड़ने से लेकर उनकी पहचान करने और सबूत जुटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल हो रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह बेहद कामगार टेक्नोलॉजी साबित हो सकती है।

AI तकनीक बड़े डेटा सेट्स को स्कैन कर सकती है। जैसे कि सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधि और संदिग्धों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड। ये सिस्टम संदेहास्पद पैटर्न को पहचानकर पुलिस को अलर्ट करती हैं। अगर मैन्युअल तरीके से इस काम को किया जाए तो इसमें कई घंटे या कभी-कभी तो दिन लग सकते हैं। उसकी तुलना में टेक्नोलॉजी इसे महज कुछ मिनट में कर सकती है।

AI In Crime Investigation

AI In Crime Investigation: कैसे है कारगर तरीका

चेहरे की पहचान (Facial Recognition), क्राइम पैटर्न अनालिसिस, वॉयस एनालिटिक्स, और AI-सपोर्टेड फोरेंसिक सॉफ़्टवेयर जैसे टूल्स का इस्तेमाल अब आपराधिक केस सॉल्व करने के लिए किया जाता है। एनसीआरबी और सीबीआई (CBI) जैसी एजेंसियां भी अब AI इंटीग्रेशन की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। मुंबई में 2024 में हुए एक बैंक फ्रॉड केस में आरोपी ने कई मोबाइल नंबर और फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था। AI बेस्ड कॉल डेटा विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैकिंग ने उसकी लोकेशन और नेटवर्क का खुलासा कर दिया। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान समेत कई देशों में अब पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसियां एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।

AI Technology की अपनी चुनौतियां भी हैं

हालांकि तकनीक बेहद मददगार साबित हो रही है, लेकिन इससे जुड़ी निजता और मानवाधिकारों की चिंताएं भी हैं। कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केवल AI के भरोसे कोई गिरफ्तारी करना न्यायसंगत नहीं है। मशीन के बजाय इंसानी विवेक और कानून का संतुलन जरूरी है। खास तौर पर अपराध के ऐसे मामले जिसमें नाबालिग या बच्चे शामिल हों, तो मशीन के बजाय मानवीय विवेक पर ही भरोसा किया जा सकता है।

2025 तक भारत के 20 से अधिक राज्यों में AI-आधारित पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने की योजना है। क्राइम प्रेडिक्शन मॉडल, हाइपर-लोकल एनालिसिस और रियल टाइम अलर्ट सिस्टम आने वाले वर्षों में कानून व्यवस्था को नई दिशा देंगे।

यह भी पढ़ें: AI in Courtrooms: अब न्याय का फैसला भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा? जानें कोर्ट के कामकाज पर कैसा असर होगा

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