क्या ChatGPT आपकी सोचने की ताकत छीन रहा है? MIT की स्टडी के खुलासे आपको जरूर पढ़ने चाहिए
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी मदद कर रहा है, लेकिन क्या यह हमारे दिमाग को सुस्त भी बना रहा है? यही सवाल उठाया है अमेरिका के मशहूर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT की एक ताजा स्टडी ने।
MIT की इस रिसर्च में बताया गया है कि AI की मदद से लिखने वाले लोग अक्सर अपनी सोच पर कम भरोसा करते हैं और धीरे-धीरे रचनात्मकता व आलोचनात्मक सोच में गिरावट आ सकती है। यानी ChatGPT जैसे टूल्स के सहारे जहां काम आसान हो रहा है, वहीं लोग खुद कम सोचने लगे हैं।

▶️ क्या कहती है MIT की रिसर्च?
स्टडी में 300 से ज्यादा प्रतिभागियों को दो ग्रुप्स में बांटा गया। एक ग्रुप ने बिना AI मदद के लिखा और दूसरे ने ChatGPT की सहायता से। इसके रिजल्ट चौंकाने वाले आए, AI की मदद से लिखने वालों ने बेहतर और साफ-सुथरा लेखन किया, लेकिन उनके जवाबों में मौलिक सोच की कमी देखी गई।
बिना AI के लिखने वाले भले थोड़े धीमे थे, लेकिन उन्होंने ज्यादा विचारशील और गहराई वाले जवाब दिए। AI यूजर्स ने अपने जवाबों को ज्यादा पसंद किया, लेकिन वे अपनी खुद की सोच को कम आंकने लगे।
इस स्टडी के तहत बोस्टन क्षेत्र की यूनिवर्सिटीज से 54 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इन्हें तीन समूहों में बांटा गया
- LLM ग्रुप (Large Language Model) - इस समूह के प्रतिभागियों ने केवल ChatGPT का उपयोग करके निबंध (essay) लिखे।
- Search Engine group- इस ग्रुप ने पारंपरिक वेब सर्च टूल्स का उपयोग किया, लेकिन किसी AI टूल की मदद नहीं ली।
- Brain-only group - इस समूह ने बिना किसी बाहरी सहायता के (ना AI, ना इंटरनेट) अपने दिमाग के बल पर निबंध लिखे।
इस अध्ययन के जरिए शोधकर्ताओं ने देखा कि कैसे अलग-अलग टूल्स या उनकी गैर-मौजूदगी प्रतिभागियों की आलोचनात्मक सोच और लेखन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
इस रिसर्च का नेतृत्व नतालिया कोस्माइना और उनकी टीम ने किया था। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि कैसे AI टूल्स, भले ही सुविधाजनक हों, हमारी सोचने की क्षमता, याददाश्त और सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
▶️ क्या AI आपकी सोचने की शक्ति को प्रभावित कर रहा है?
रिसर्चर का कहना है कि AI एक दोधारी तलवार की तरह है। यह आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है, लेकिन अगर आप बार-बार उस पर ही निर्भर रहेंगे, तो धीरे-धीरे आपकी खुद की सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
MIT के शोधकर्ता यह भी चेतावनी देते हैं कि अगर AI का उपयोग "मददगार सहायक" के बजाय "सोचने के विकल्प" के तौर पर किया गया, तो यह हमारे दिमागी विकास को धीमा कर सकता है।
▶️ रिसर्च में AI के इस्तेमाल को लेकर क्या समाधान बताए गए हैं?
रिसर्च में सुझाव दिया गया है कि AI का इस्तेमाल करें, लेकिन सिर्फ शुरुआती मार्गदर्शन या भाषा सुधार के लिए। आइडिया, तर्क और विश्लेषण खुद से करें। ज्यादा सोचने की आदत बनाए रखें, भले ही AI मौजूद हो।
AI टूल्स जैसे ChatGPT ने हमारी दुनिया बदल दी है, लेकिन अगर हम हर जवाब उसी से लेने लगेंगे, तो कहीं ऐसा न हो कि हम सोचने की आदत ही भूल जाएं। तो अगली बार जब आप किसी सवाल का जवाब सोचें -पहले दिमाग चलाइए, फिर AI से पूछिए।
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