Hanuman Jayanti 2018: जानिए हनुमान जयंती की पूजा व‍िध‍ि और शुभ मुहूर्त

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    हनुमान जयंती: 9 साल बाद बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त | Boldsky

    नई दिल्ली। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है, इस साल यह पर्व 31 मार्च को है। इस बार हनुमान जयंती शनिवार को है, जो कि बजरंग बली के प्रिय दिवसों में से एक है इसलिए इस बार की जयंती भक्तों के लिए खास फल लेकर आई है।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    पूर्णिमा 30 मार्च को शाम 07: 35 बजे से प्रारंभ होकर 31 मार्च को शाम 6 बजे तक रहेगी। उदया तिथि होने के कारण 31 मार्च को यह पर्व मनाया जाएगा। हनुमान जयंती के दिन सुबह 9 बजे से 11 बजे तक राहुकाल रहेगा और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजे के बाद से शाम 6 बजे तक रहेगा।

    पूजा विधि

    पूजा विधि

    इस दिन हनुमान जी के लिए उपवास रखना चाहिए और उनका ध्यान करके हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। मान्‍यता है कि इस दिन पांच या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करने से पवन पुत्र हनुमान प्रसन्‍न होकर भक्‍तों पर कृपा बरसाते हैं।

    भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार हैं हनुमान

    भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार हैं हनुमान

    हनुमान जी शक्ति और बुद्धी के देवता कहे जाते हैं, किसी भी मुसीबत में लोग उन्हीं को याद करते हैं। भगवान शिवजी के 11वें रुद्रावतार, सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं। बाल्मिकी की रामायण के अनुसार इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं।

    हनुमान जी का जन्म

    हनुमान जी का जन्म

    ऐसा अनुमान है कि हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे भारत देश में आज के झारखंड राज्य के गुमला जिले के आंजन नाम के छोटे से पहाड़ी गांव के एक गुफ़े में हुआ था।

    बजरंगबली

    बजरंगबली

    इन्हें बजरंगबली के रूप में जाना जाता है क्योंकि इनका शरीर एक वज्र की तरह है। कुछ पौराणिक कथाओं में हुनमान जी को वानर का वंशज कहा गया है जिसके कारण ही विराट नगर (राजस्थान) के वज्रांग मन्दिर में उनके वानर रूप की पूजा की जाती है।परन्तु गोभक्त महात्मा रामचन्द्र वीर ने एक ऐसा मंदिर बनावाया जिसमें हनुमान जी की बिना बन्दर वाले मुख की मूर्ति स्थापित की है। रामचन्द्र वीर ने हनुमान जी जाति वानर बताई है, शरीर नहीं।वीर के हिसाब से हुनुमान जी ने लंका-दहन करने के लिए वानर रूप धरा था।

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