Iran Political Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अब ईरान के अंदर भी सत्ता को लेकर विवाद गहराता दिख रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर अमेरिका से समझौता कर सॉफ्ट तख्तापलट की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि नए सुप्रीम लीडर की भूमिका कमजोर की जा रही है और सत्ता कुछ नेताओं के हाथ में सिमट रही है।
पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी सरकार के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आई, जिससे ईरान की अंदरूनी राजनीति में बढ़ते तनाव के संकेत मिले हैं।
कट्टरपंथी गुटों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद सरकार को अमेरिका और इजराइल से बदला लेना चाहिए था, लेकिन उसने बातचीत और समझौते का रास्ता चुना। उनका आरोप है कि यह फैसला नए सुप्रीम लीडर और मुज्तबा खामेनेई की इच्छा के खिलाफ लिया गया। साथ ही सरकार पर संसद को कमजोर करने, सुप्रीम लीडर के निर्देशों की अनदेखी करने और अमेरिका से बातचीत कर सत्ता अपने हाथ में लेने की कोशिश का भी आरोप लगाया जा रहा है। ये भी पढे़ं: Iran War Update: कैंसर अस्पताल में चल रही थी बच्चों की कीमोथेरेपी, US ने गिराए बम, कितने मासूम हुए हताहत? अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान कट्टरपंथी समर्थकों का गुस्सा खुलकर सामने आया। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के ताबूत के साथ चलने पर कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारे लगाए। विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें "देश बेचने वाला गद्दार" कहा गया। एक धार्मिक गायक ने सार्वजनिक मंच से राष्ट्रपति को धमकी तक दे डाली। इन घटनाओं ने दिखाया कि सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है। ये भी पढे़ं: Iran War Update: ईरान के जिस पोर्ट पर भारत का इन्वेस्टमेंट, वहां अमेरिका ने किया हमला, 30 मरे- 260 घायल खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही अपनी भूमिका स्पष्ट की है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी चुप्पी की वजह से सत्ता का चेहरा राष्ट्रपति पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अराघची बन गए हैं। इसी कारण कट्टरपंथी गुट इन्हीं नेताओं पर सत्ता हथियाने और तख्तापलट जैसी साजिश के आरोप लगा रहे हैं।कट्टरपंथियों ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अंतिम संस्कार में खुलकर दिखा विरोध
मुज्तबा खामेनेई की चुप्पी क्यों बनी चर्चा?