अन्नदाताओं के योगदान को मिला सम्मान, जानिए अब तक कितने किसानों को पद्म अवॉर्ड
खेती-किसानी से जुड़े कई भारतीय नागरिकों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में एक पद्म पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इन लोगों को राष्ट्रपति कोविंद ने एग्रीकल्चर में पद्म अवॉर्ड से सम्मानित किया है। वनइंडिया की रिपोर्ट
नई दिल्ली, 18 मई : पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान हैं। पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार विभिन्न विषयों/क्षेत्रों में दिए जाते हैं। कृषि, कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान व इंजीनियरिंग, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य व शिक्षा, खेल, सिविल सेवा में योगदान के लिए पद्म अवॉर्ड दिए जाते हैं। 'पद्मश्री' पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिए जाते हैं। गत कुछ वर्षों में खेती किसानी से जुड़े कई लोगों को असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। वन इंडिया की इस स्पेशल रिपोर्ट में पढ़िए, कृषि क्षेत्र से जुड़ी किन हस्तियों को मिला है पद्म अवॉर्ड।
25 साल पहले शुरू किया खेती का नया तरीका
सेठपाल सिंह ने करीब 25 साल पहले सिंघाड़े की फसल की खेती की शुरुआत की थी। खेतों में सिंघाड़े की फसल उगाने पर हुए फायदों से उत्साहित सेठपाल ने 1997 में खेतों में सिंघाड़े की फसल उगाने का नया तरीका इजाद किया था। बता दें कि सिघाड़े यानी पानीफल की खेती परंपरागत रूप से तालाबों या जलाशयों में की जाती रही है। सेठपाल से प्रेरित किसानों ने तालाबों के साथ खेतों में भी सिंघाड़ा उगाना शुरू कर दिया।
धान जैसे फॉर्मूले पर सिंघाड़े की खेती
किसान सेठपाल सिंह का दावा है कि खेतों में सिंघाड़ा उगाने पर एक एकड़ में 80 से 100 क्विंटल तक पानी फल यानी सिंघाड़ा का उत्पादन हो सकता है। तालाब और खेत के सिंघाड़े में अंतर बताते हुए सेठपाल कहते हैं कि खेतों वाले सिंघाड़े की फसल में तालाबों की तुलना में कम गंदगी होती है। उनका कहना है कि धान की तरह ही सिंघाड़े की फसल में भरपूर पानी की जरूरत होती है। खेतों में सिंघाड़े की फसल के लिए आधा फीट से एक फीट तक पानी भरा होना चाहिए। बकौल सेठपाल सिंह, सिंघाड़े की फसल से किसानों को एक एकड़ में दो से ढाई लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।
फसल लगाने का उत्तम समय
गौरतलब है कि सिंघाड़े की रोपाई जून-जुलाई में होती है। फसल तैयार होने के बाद सितंबर और दिसंबर के दौरान बाजार में सिंघाड़ा भरपूर मात्रा में मिलता है। अगर सिंघाड़े की खेती मई महीने में की जाए तो अगस्त तक इसकी फसल तैयार हो जाती है। ऐसे में समय से पहले बाजार में सिंघाड़ा बेचने से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

खेती-किसानी में अमूल्य योगदान, मिला पद्मश्री सम्मान
राष्ट्रपति कोविंद ने सेठपाल सिंह को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से अलंकृत किया था। सेठपाल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रहने वाले एक किसान हैं। उन्होंने छोटे किसानों की स्थायी आय सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में विविधीकरण (diversification) पर उल्लेखनीय योगदान दिया है। पद्म सम्मान मिलने के बाद सेठपाल सिंह ने कहा था कि वे साधारण किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा था, पारदर्शिता से पद्म पुरस्कारों के लिए चयन होगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। पीएम मोदी का आभार, एक साधारण किसान को पद्म अवॉर्ड मिलना खुशी की बात। सेठपाल सिंह ने बताया कि किसान की आमदनी दोगुनी, कम लागत, पानी संचय, जल प्रदूषण, मृदा स्वास्थ्य, कीटनाशकों का कम इस्तेमाल, ऑर्गेनिक यानी जैविक खेती जैसे पीएम मोदी के विजन पर काम करना चाहते हैं।

काली मिर्च की खेती, 8000 किसानों को ट्रेनिंग
राष्ट्रपति कोविंद ने कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए नैनंद्रो बी. मारक (Nanandro B. Marak) को भी पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया था। मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स में काली मिर्च की 'करीमुंडा' किस्म की जैविक खेती की है। मारक किसानों के लिए ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित करते हैं। उनके प्रशिक्षण से 8000 से अधिक किसान लाभ उठा चुके हैं।

ओडिशा में दुर्लभ बीजों का कलेक्शन, मिला पद्मश्री
ओडिशा की कमला पुजारी को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रपति कोविंद ने पद्मश्री प्रदान किया था। उन्होंने ओडिशा में धान, हल्दी, तिली, काला जीरा, महाकांता, फूला और घंटिया जैसे लुप्तप्राय और दुर्लभ प्रकार के बीज एकत्र किए हैं।

कृषि पत्रकारिता में योगदान, मिला पद्म अवॉर्ड
राष्ट्रपति कोविंद यदलापल्ली वेंकटेश्वर राव को भी कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित कर चुके हैं। राव रायथुनेस्तम फाउंडेशन के अध्यक्ष और तीन तेलुगु फार्म पत्रिकाओं (farm magazines) के मुख्य संपादक हैं। राव ने किसानों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए कृषि पत्रकारिता का रास्ता चुना है।

गुजराती खाने में गाजर के सूत्रधार वल्लभभाई !
गुजरात के जूनागढ़ में रहने वाले वल्लभभाई वासरामभाई मारवानिया (Vallabhbhai Vasrambhai Marvaniya) को एग्रीकल्चर सेक्टर में योगदान के पद्म श्री मिल चुका है। जूनागढ़ के किसानों के बीच मारवानिया काफी लोकप्रिय हैं। उन्हें गुजराती खाने में गाजर को शामिल करने का श्रेय (pioneer in introducing carrots to Gujarati palate) दिया जाता है।

पूर्वोत्तर भारत की ट्रिनिटी ने किसानों को हल्दी से जोड़ा
पूर्वोत्तर भारत की महिला कृषक ट्रिनिटी साओ (Trinity Saioo) को भी खेती-किसानी में अमूल्य योगदान के लिए पद्म श्री प्रदान किया जा चुका है। पेशे से स्कूल शिक्षिका ट्रिनिटी साओ को राष्ट्रपति कोविंद ने कृषि में योगदान के लिए सम्मानित किया था। ट्रिनिटी ने मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स में किसानों को हल्दी की लकडोंग किस्म उगाने के लिए प्रेरित किया है।

'किसान चाची' को राष्ट्रपति से मिला पद्मश्री
राज कुमारी किसान चाची के रूप में लोकप्रिय हैं। कृषि में योगदाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित राजकुमारी, सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा, बाल विवाह उन्मूलन और विधवा अधिकारों और पुनर्विवाह जैसे मुद्दों पर भी काम किया है।

कुमारी साबरमती का जीवन किसानी को समर्पित
कुमारी साबरमती को भी कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया जा चुका है। 'टिकी आपा' के नाम से लोकप्रिय साबरमती को राष्ट्रपति कोविंद ने पद्म पुरस्कार से अलंकृत किया था। साबरमती, संभव (Sambhav) की सह-संस्थापक हैं। टिकी आपा का यह संगठन पर्यावरण और जेंडर इश्यूज से जुड़े मुद्दों के लिए समर्पित है। वह जैविक खेती और जैव विविधता संरक्षण के लिए भी जानी जाती हैं।

जैविक उर्वरकों के उपयोग का आह्वान, मिला पद्मश्री
कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए तमिलनाडु के रंगम्माल उर्फ पप्पम्मल (Rangammal Alias Pappmmal) को भी पद्म पुरस्कार दिया जा चुका है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में रहने वाली रंगम्माल प्रेरक कृषक हैं। उन्होंने कृषि में गाय के गोबर और पौधों के अवशेषों जैसे जैविक उर्वरकों के उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित किया है। राष्ट्रपति कोविंद ने रंगम्माल को 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।

खेती के साथ सोशल वर्क में भी योगदान, मिला पद्म सम्मान
रमीलाबेन रायसिंहभाई गामित को भी कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया है। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि और कौशल विकास के क्षेत्र में काम किया है। स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित होकर, उन्होंने गुजरात में 700 से अधिक शौचालयों के निर्माण में भी मदद की थी। गामित को राष्ट्रपति कोविंद ने पद्मश्री से अलंकृत किया था।

'बीज माता' के रूप में लोकप्रिय ट्राइबल फार्मर को पद्म अवॉर्ड
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की रहीबाई सोमा पोपरे (Rahibai Soma Popre) को भी एग्रीकल्चर में योगदान के लिए पद्म श्री प्रदान किया जा चुका है। राष्ट्रपति कोविंद ने 'बीज माता' के रूप में लोकप्रिय रहीबाई को 2021 में पद्म श्री प्रदान किया था। कृषि में योगदान देने वाली रहीबाई आदिवासी समुदाय- महादेव कोली की आदिवासी किसान हैं.

मरणोपरांत पद्म सम्मान, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के लिए 'संभव'
खेती-किसानी में योगदान के लिए राधामोहन को मरणोपरांत को पद्म श्री प्रदान किया गया था। राधामोहन पर्यावरण और लैंगिक मुद्दों के लिए समर्पित संगठन- संभव (Sambhav) के संस्थापक थे। राष्ट्रपति कोविंद ने कृषि क्षेत्र में राधामोहन का पद्म अवॉर्ड उनकी पत्नी को समर्पित किया था।

खेती और धरती बचाने के लिए कविताओं को बनाया हथियार
उत्तराखंड के प्रेमचंद शर्मा को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रपति कोविंद ने 2021 में पद्मश्री प्रदान किया था। प्रेमचंद उत्तराखंड के एक प्रगतिशील और अभिनव किसान के रूप में पहचान रखते हैं। आदिवासी किसान समुदाय के नेता प्रेमचंद लोककथाओं से लोगों को जोड़ने के लिए कविता का सहारा लेते हैं। उनकी कविताएं पर्यावरण की रक्षा के लिए जैविक खेती को प्रोत्साहित करती हैं।

खेती में इनोवेशन को सम्मान, मिला पद्मश्री
अब्दुलखादर इमामसाब नदाकत्तिन (Abdulkhader Imamsab Nadakattin) को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा जा चुका है। विश्वशांति कृषि अनुसंधान केंद्र, अन्निगेरी के अध्यक्ष, इमामसाब ने खेती-किसानी को आसान बनाने के मकसद से एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े इनोवेशन किए हैं। उन्होंने ग्रासरूट इनोवेशन करते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार कर उपयोगी उपकरण विकसित किए हैं।

पद्मश्री 'टनल मैन' ने बंजर जमीन पर उगाई फसल
अमाई महालिंग नाइक को भी कृषि क्षेत्र में पद्मश्री प्रदान किया जा चुका है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ में रहने वाले इनोवेटिव किसान अमाई अपनी बंजर भूमि को सिंचित करने के लिए मशहूर हैं। राष्ट्रपति कोविंद अमाई को सम्मानित किया था। कर्नाटक के किसान पद्मश्री अमाई महालिंग ने अपने भागीरथ प्रयास से बंजर भूमि को हरे-भरे खेत में बदल दिया और इसके लिए सुरंग खोदी। उनकी इस कोशिश के लिए उन्हें 'टनल मैन' के रूप में भी जाना जाता है।

हरियाणा के किसान को मिला पद्मश्री सम्मान
राष्ट्रपति कोविंद ने 2019 में कंवल सिंह चौहान को कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया था। हरियाणा के किसान कंवल, एक एकीकृत कृषि प्रणाली की स्थापना करने के लिए जाने जाते हैं। इसमें फसल विविधीकरण (diversification), प्रसंस्करण (processing), मार्केटिंग, फसलों के अवशेष का प्रबंधन और किसानों के कौशल विकास का श्रेय भी दिया जाता है।

10वीं पास किसान को मिला पद्मश्री
प्राकृतिक खेती में योगदान के लिए हुकुमचंद पाटीदार को साल 2019 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया।राजस्थान के झालावाड़ निवासी हुकुमचंद स्कूली शिक्षा के मामले में महज कक्षा 10 तक पढ़े हैं, लेकिन खेती-किसानी के क्षेत्र में उनके पास भरपूर प्रैक्टिकल अनुभव है. अब वे प्राकृतिक खेती से जुड़ा पाठ्यक्रम तैयार करने में योगदान दे रहे हैं।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को पद्मश्री
स्थायी कृषि के लिए विकासशील प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के अगुआ डॉ बलदेव सिंह ढिल्लों भी खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रपति कोविंद ने विज्ञान और इंजीनियरिंग फील्ड में 2019 में इन्हें पद्मश्री सम्मानित किया। पद्म श्री डॉ बलदेव पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति होने के अलावा एक वैज्ञानिक और प्रशासक के रूप में पहचान हासिल है।

कम लागत में अधिक उपज का पेटेंट, मिला पद्मश्री
राष्ट्रपति कोविंद ने कृषि में योगदाने के लिए चिंतला वेंकट रेड्डी को 2021 में पद्मश्री प्रदान किया था। रेड्डी प्राकृतिक खेती में इनोवेटर के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल कम लागत में अधिक उपज वाली कृषि प्रक्रियाओं का पेटेंट भी करा रखा है।

80 हजार किसानों को किया शिक्षित, मिला पद्म अवॉर्ड
भारत भूषण त्यागी को 2019 में पद्म श्री प्रदान किया गया था। एक किसान, शिक्षक और प्रशिक्षक के रूप में मशहूर त्यागी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में रहते हैं। पद्मश्री भारत भूषण त्यागी किसानों के लिए साप्ताहिक प्रशिक्षण आयोजित करते हैं और 80,000 से अधिक किसानों को शिक्षित किया है।

खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिकीकरण
चंद्रशेखर सिंह को कृषि में योगदाने के लिए राष्ट्रपति कोविंद ने 2021 में पद्मश्री प्रदान किया था। चंद्रशेखर एक नवोन्मेषी किसान (innovative farmer) हैं, जो किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद करते हैं। किसानों के साथ सहयोग करते हुए चंद्रशेखर खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिकीकरण (modernisation) के लिए काम कर रहे हैं।
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