Floriculture : फूलों सी मुस्कुरा रही जम्मू-कश्मीर के युवाओं की जिंदगी, शाहिद की नर्सरी से मिली प्रेरणा
फूलों की खेती यानी फ्लोरीकल्चर बदलते समय में युवाओं की पसंद बनता जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में फ्लोरीकल्चर को युवा करियर के रूप में चुन रहे हैं। ऐसे ही युवा हैं शाहिद भट। विरासत में मिली फूलों की खेती से युवा जुड़ रहे हैं।
श्रीनगर, 21 मई : मुगल शासक जहांगीर ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग बताया था। कश्मीर के सौंदर्य वर्णन में फारसी भाषा में जहांगीर के हवाले से कहा जाता है; 'अगर फ़िरदौस बर-रू-ए-ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त' यानी धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो यह कश्मीर में है, यहीं है, यहीं है। स्वर्ग की कल्पना वाले इस वर्णन से को शाहिद भट नाम के युवा हकीकत में बदल रहे हैं। वे सही मायनों में कश्मीर को स्वर्ग बनाने जैसा काम कर रहे हैं।
Floriculture को बनाया करियर
फ्लोरीकल्चर (Floriculture) को करियर बनाने वाले शाहिद ने फूलों की ऐसी नर्सरी बनाई है, जिसमें 120 से अधिक पौधों और फूलों के प्रकार मिलते हैं। बता दें कि जम्मू-कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन देशविदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ऐसे में फूलों को चाहने वालों की कमी नहीं है।

विरासत में मिली फूलों की खेती
श्रीनगर में फूलों की खेती करने वाले युवा शाहिद फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वे बताते हैं कि उन्हें फ्लोरीकल्चर अभिभावकों से विरासत में मिली है।

नर्सरी में फूलों की कई वेराइटी मौजूद
शाहिद श्रीनगर में फूलों की खेती करते हैं। इनकी नर्सरी में फूलों की कई वेराइटी मौजूद हैं। शाहिद ने एएनआई से बताया कि खुद के बिजनेस में मिली सफलता के बाद वे युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं।

फूलों के अलावा इनडोर प्लांट भी मौजूद
शाहिद बताते हैं कि उनकी नर्सरी में फूलों के अलावा इनडोर प्लांट भी मौजूद हैं। एलोवेरा जैसी चीजें भी रखते हैं। उन्होंने बताया कि पहले कश्मीर में फूलों का मेला या प्रदर्शनी नहीं लगती थी। लोगों को भी कम रूचि थी, लेकिन अब कई लोग फ्लोरीकल्चर से जुड़े हैं। 100 रुपये से एक लाख रुपये के बीच कई फूलों की किस्में और पौधों की मार्केट डिमांड भी अच्छी है।

सोशल मीडिया से जुड़ रहे युवा
फ्लोरीकल्चर से युवाओं को कैसे जोड़ते हैं। इस पर शाहिद बताते हैं कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मदद से युवाओं से जुड़ते हैं। बकौल शाहिद, फ्लोरीकल्चर को करियर ऑप्शन बनाने के लिए लोगों को मोटिवेट करने का प्रयास करते हैं।

पौधों की कीमत
शाहिद बताते हैं कि कश्मीर में फूलों का मेला या प्रदर्शनी नहीं लगती थी। फ्लोरीकल्चर लोकप्रिय होने के कारण अब पौधों की कीमत भी अच्छी मिलने लगी है। इनडोर प्लांट भी लोगों की पसंद बन रहे हैं। पौधों की कीमत 100 रुपये से एक लाख रुपये के बीच होती है।

हाईब्रिड पौधों से जल्दी मिलते हैं फूल
शाहिद के साथ उनकी नर्सरी में काम करने वाले एक अन्य युवा ने बताया कि पहले फूल उगाने के काम और छोटी बागवानी में बुजुर्गों को अधिक इंटरेस्ट था, लेकिन अब युवा भी आगे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नर्सरी में हाईब्रिड फूल भी रखे जाते हैं। दो महीनों के बाद फूल खिलने लगते हैं। पहले एक-एक साल इंतजार करना पड़ता था। फ्लोरीकल्चर को करियर बना चुके शाहिद ने बताया कि उनकी नर्सरी में पौधों की वेराइटी में रेड मैपल, फ्रूट प्लांट और लैंडस्केपिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पौधे भी मौजूद हैं।












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