Tommy Atkins : अमेरिकी मैंगो की भारत में खेती, मधुमेह पीड़ित भी खा सकते हैं ये आम
डायबिटिक लोगों के लिए आम की प्रजाति टॉमी ऐटकिन्स (Tommy Atkins) शानदार ऑप्शन है। भारत में ब्लैक मैंगो फार्मिंग में शानदार अवसर हैं। जानिए कहां हो रही है ब्लैक मैंगो की खेती, कैसे डायबिटिज मरीज इस आम का सेवन कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 29 मई : गर्मी के मौसम में अगर आपको आम से दूर रहना पड़े तो ये किसी सजा से कम नहीं। मधुमेह के मरीजों को सेहत ठीक रखने के लिए 'फलों के राजा' आम से परहेज करना पड़ता है। शुगर और ग्लूकोज लेवल कंट्रोल करने के लिए गर्मी में आम खाने से वंचित रहने वाले लोगों के लिए अमेरिकी प्रजाति का आम शानदार ऑप्शन है। इस आम की खेती गुजरात के गिरसोमनाथ और उत्तराखंड में की जा रही है। ब्लैक मैंगो के नाम से पॉपुलर आम की प्रजाति टॉमी ऐटकिन्स (Tommy Atkins) की खेती भारत में पहली बार उत्तराखंड के नैनीताल में की गई थी। डायबिटिज कैपिटल के रूप में भारत के साथ नेगेटिव सुर्खियां जुड़ चुकी हैं। हालांकि, उत्पादों की लोकप्रियता के मामले देखे तो ब्लैक मैंगों की डिमांड भारत में बढ़ रही है। ऐसे में ब्लैक मैंगो की खेती में संभावनाएं टटोलने और मधुमेह पीड़ित के लिए आम का ऑप्शन जानने के लिए पढ़िए ये रिपोर्ट

डायबिटिज के मरीजों के लिए आम
दरअसल, भारत को डायबिटिज कैपिटल भी कहा जाता है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के 17 फीसद मधुमेह मरीज भारत में हैं। ऐसे में गर्मियों के सीजन में पैदा हो रही आम की अलग-अलग वेराइटी मधुमेह पीड़ितों को लुभाती तो है, लेकिन वे शुगर और ग्लूकोज लेवल कंट्रोल करने की चिंता में आम खाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में जबकि मधुमेह यानी डायबिटिज के मरीजों के लिए आम खाना मुश्किल होता है, अमेरिका के फ्लोरिडा में उगाया जाने वाला ब्लैक मैंगो यानी टॉमी ऐटकिन्स डायबिटिज पेशेंट्स के लिए बढ़िया विकल्प हैं। ईटीवी भारत डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक टॉमी ऐटकिन्स की खेती गुजरात के गिर सोमनाथ में की जा रही है।

ब्लैक मैंगो में चीनी लगभग 75 फीसद कम
'फलों का राजा' आम रसीले और मीठे स्वाद के कारण लोकप्रिय है। हालांकि, आम की टॉमी ऐटकिन्स किस्म चीनी की कम मात्रा के कारण मधुमेह रोगियों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में 'टॉमी ऐटकिंस' का पेड़ लगाने वाले किसान दिनेश ने बताया, फ्लोरिडा से इंपोर्ट किए गए ब्लैक मैंगो की डिमांड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय आमों की किस्मों की तुलना में ब्लैक मैंगो में चीनी लगभग 75 फीसद कम होती है। ऐसे में अपने अनोखे स्वाद के कारण डायबिटिक लोगों के बीच इसकी काफी मांग है।

गुजरात के जूनागढ़ और गिर सोमनाथ में टॉमी ऐटकिन्स
गुजरात के गिर सोमनाथ में टॉमी ऐटकिन्स की खेती पर टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की रिपोर्ट के मुताबिक पांच साल लगातार प्रयास करने के बाद 2020 से गुजरात के जूनागढ़ और गिर सोमनाथ में ब्लैक मैंगो का उत्पादन किया जा रहा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विशाल गांडेचा नाम के किसान जूनागढ़ के मालीय तालुका में 2015 में पहली बार टॉमी ऐटकिन्स के बीज की रोपाई ऑर्गेनिक तरीके से की गई। 2019 में पहली बार ब्लैक मैंगो का उत्पादन हुआ।

एक पेड़ से 15 किलो तक फल
टीओआई की रिपोर्ट में किसान विशाल गांडेचा बताते हैं कि टॉमी ऐटकिन्स के एक पेड़ से 15 किलो तक फल मिल जाते हैं। रोपाई के पांच साल बाद आम की वेराइटी ब्लैक मैंगो के पेड़ों पर फल लगने शुरू हो जाते हैं। गुजरात के गिरसोमनाथ जिले के तलाला में आम का बाग लगाने वाले गफूर कुरैशी बताते हैं कि टॉमी ऐटकिन्स के पहली बार 2010 में उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद में लगाया गया था। उन्होंने कहा कि मलीहाबाद में आम की सफल खेती के बाद गुजरात में भी पांच साल की मेहनत के बाद ब्लैक मैंगो का उत्पादन शुरू हो गया है।

ब्लैक मैंगों का टेस्ट एसिडिक
टॉमी ऐटकिन्स के बारे में जूनागढ़ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डीके वारू बताते हैं कि स्वाद के मामले में यह एसिडिक लगता है और शुगर की मात्रा कम होने के कारण ब्लैक मैंगो को विश्व की लोकप्रिय आम की वेराइटी में शुमार किया जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रोफेसर वारू ने बताया, एक अनुमान के मुताबिक जूनागढ़ और गिर-सोमनाथ में महज 25-30 पेड़ ही लगाए गए हैं। गुजरात में ब्लैक मैंगो के अनुकूल मौसम होने के कारण इसकी खेती में अपार संभावनाएं हैं।

ब्लैक मैंगो की विशेषता- पूरे साल रोपाई
जामुनी रंग यानी पर्पल कलर का आम टॉमी ऐटकिन्स, मैंगो की दूसरी वेराइटी काफी अलग है। शुरुआत में 'टॉमी ऐटकिंस' के बीज फ्लोरिडा से इंपोर्ट करने के बाद नैनीताल के कालाढूंगी क्षेत्र में आम के बाग लगाए गए। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लैक मैंगो की विशेषता है कि इसे पूरे साल उगाया जा सकता है।

भारत में ब्लैक मैंगो जुलाई-अगस्त में
'फलों का राजा' आम की वेराइटी 'ब्लैक मैंगो' शुगर फ्री होता है। नैनीताल में ब्लैक मैंगो की खेती करने वाले अब्दुल सैफी के मुताबिक फ्लोरिडा में ये आम पूरे साल बिकता है, लेकिन भारत में जुलाई-अगस्त के महीने में मिलता है। उनकी नर्सरी में 400-500 पौधे तैयार हैं। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक टॉमी ऐटकिन्स की सिंगल स्लाइस यानी एक टुकड़े की कीमत 300 रुपये तक होती है।

टॉमी ऐटकिन्स में 75 फीसद कम शुगर
उत्तराखंड के हॉर्टिकल्चर एक्सपर्ट पीसी कांडपाल के मुताबिक दूसरे आमों की तुलना में टॉमी ऐटकिन्स में 75 फीसद कम शुगर होता है। ऐसे में डायबिटिज के मरीज इसे खा सकते हैं। किन जगहों पर ब्लैक मैंगो की खेती हो रही है ? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत में 2009-10 में टॉमी ऐटकिन्स की खेती शुरू हुई। उत्तराखंड के काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी में ब्लैक मैंगो की खेती हो रही है। नर्सरी में सैकड़ों पौधे तैयार कर किसानों को दिया जा रहा है। मार्च-अप्रैल में मंजर लगने के बाद बरसात यानी जुलाई-अगस्त तक टॉमी ऐटकिन्स का फल तैयार हो जाता है।












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