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गुजरात: वो मंदिर जो 17 बार लूटा गया, आस्था ने फिर बड़ा-भव्‍य बना दिया

सोमनाथ मंदिर, भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक, शाश्वत आस्‍था का प्रतीक है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग की तीर्थयात्रा यहीं से शुरू होती है। इस तीर्थ ने बहुत-से आक्रमणों की पीड़ा झेली, लेकिन आस्था ने इसे और बड़ा, भव्‍य तथा मजबूत बना दिया...
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सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?

यहां आपको सोमनाथ मंदिर के बारे में कई दिलचस्‍प बातें बताएंगे। यह मंदिर गुजरात के पश्चिमी तटीय राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के एक शहर वेरावल में स्थित है।
इस देवालय को इस्‍लामिक आक्रांताओं द्वारा 17 बार लूटा-तोड़ा गया। विध्‍वंस के बाद फिर से कम से कम 4 बार बनाया जा चुका है। यूं कहें कि ये मंदिर अडिग विश्वास के साथ बड़ा और मजबूत हो गया।
महमूद गजनी ने कई बार इस मंदिर पर आक्रमण किया और नष्ट कर दिया। इसी तरह पुनर्निर्माण होने पर कई मुस्लिम शासकों ने इसे बार-बार तोड़ा।
मंदिर का आधुनिक स्मारक 5 साल में तैयार हुआ था, जो कि सरदार वल्लभभाई पटेल के आदेश पर 1951 में पूरा हुआ था। उसके बाद, इसका उद्घाटन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था।
सोमनाथ 12 मुख्य ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह लिंग स्वयंभू माना जाताहै, जिसका अर्थ है- स्वयं प्रकट हुआ।

द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा (बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग तीर्थों की तीर्थयात्रा) सोमनाथ से ही शुरू होती है।

सोमनाथ का उल्‍लेख ऋग्वेद, शिव पुराण, स्कंद पुराण और श्रीमद भागवत तक में मिलता है। कहा जाता है कि, इसकी मूल संरचना चार चरणों में बनाई गई थी।
इस मंदिर के स्वर्ण भाग का निर्माण चंद्र देव ने कराया था। फिर एक खंड का निर्माण सूर्य ने किया था। श्री कृष्ण ने चंदन वाला भाग तैयार कराया। फिर, पत्थर की संरचना को भीमदेव नामक राजा ने पूरा किया था।
इस मंदिर से समुद्र की लहरें टकराते ​नजर आती हैं।

इसकी वास्तुकला विस्मयकारी चालुक्य शैली को प्रदर्शित करती है और सोमपुरा के मूर्तिकारों की शिल्प कौशल को भी दर्शाती है।
इसके गर्भ गृह में ज्योतिर्लिंग, सभा मंडपम और नृत्य मंडपम हैं। जटिल नक्काशी वाला मुख्य बहुमंजिला शिखर या मीनार 150 फीट ऊंचा है।

 शिखर के ऊपर कलश है, जिसका वजन लगभग 10 टन है और ध्वजदंड (झंडा खंभा) 27 फीट ऊंचा और 1 फुट परिधि में है।
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