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Ramcharitmanas: जानिए तुलसीदास ने क्यों लिखी 'रामचरितमानस'?

इन दिनों बिहार के सियासी गलियारे में तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है। (Photo credit:social media)
Ankur Sharma
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर सिंह ने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथ 'रामचरितमानस' को नफरत फैलाना वाला बताया है।(Photo credit: Wikipedia)
जिसके बाद चंद्रशेखर सिंह लोगों के निशाने पर आ गए हैं लेकिन शिक्षा मंत्री अपने बयान से पीछे हटने वाले नहीं हैं।(Photo credit:social media)
'रामचरितमानस' को गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं सदी में लिखा था, ये ग्रंथ अवधी भाषा में लिखा हुआ है।(Photo credit:social media)
'रामचरितमानस' को 'तुलसी रामायण' या 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जाता है और ये काफी लोकप्रिय कृति है।(Photo credit:social media)
तुलसी के 'रामचरितमानस' के राम मर्यादा पुरोषोत्तम हैं, जो कि भगवान विष्णु के ही अवतार हैं(Photo credit:social media)
मान्यता है कि खुद शिव ने तुलसीदासजी को सपने में आकर भगवान राम के जीवन पर किताब लिखने को कहा था, जिसके बाद उन्होंने 'रामचरितमानस' की रचना की।(Photo credit:social media)
कहते हैं कि संवत् 1631 को रामनवमी के दिन यानी कि प्रभु श्रीराम के जन्म के दिन से गोस्वामी तुलसीदास ने ग्रंथ को लिखना प्रारंभ किया था।(Photo credit:social media)
तुलसीदास ने संवत 1633 के अगहन मास पंचमी पर ये ग्रंथ पूरा किया था, जिसे पूरा करने में 2 साल 7 माह और 26 दिन का समय लगा था।(Photo credit:social media)
रामचरितमानस सात कांड में विभाजित हैं, जिनके नाम है - बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किन्धाकांड, सुन्दरकांड, लंकाकांड और उत्तरकाण्ड। (Photo credit:social media)
छन्दों की संख्या के अनुसार बालकांड सबसे बड़ा और किष्किन्धाकांड सबसे छोटा कांड है।(Photo credit:social media)
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