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मोहम्मद रफी : मखमली आवाज से गीतों को अमर किया, जानें 10 रोचक बातें

पद्म श्री मोहम्मद रफी को उनकी मखमली आवाज के लिए जाना जाता है। अपनी आवाज से गीतों को अमर करने वाले मोहम्मद रफी 24 दिसंबर को 98 साल हो गए। ऐसा इसलिए क्योंकि रफी जैसे किरदार कभी मरते ही नहीं। जानिए उनकी लाइफ से जुड़ी 10 रोचक बातें
Jyoti Bhaskar

मोहम्मद रफी ने हिंदी फिल्मों के अलावा कई अंग्रेजी और तेलुगू जैसी दूसरी भाषाओं में भी गानों को अमर बनाया।

मोहम्मद रफी ने भारत की आजादी से पहले कई ऐसे गानों को आवाज दी जिसके तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू भी मुरीद हुए।

मोहम्मद रफी को 1967 में कला जगत में योगदान के लिए भारत के चौथे शीर्ष नागरिक सम्मान- पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

मोहम्मद रफी ने भोजपुरी, बांग्ला, कन्नड़ और फारसी भाषा में रचे गीत, जो हिंदी भाषी लोगों को बेहद कठिन लगते हैं, इन गीतों को भी सहजता से स्वर दिए।

1941 में केएल सहगल के साथ महज 13 साल की उम्र में उन्होंने गायिकी का सफर शुरू किया था।

24 दिसंबर, 1924 को मोहम्मद रफी अमृतसर में जन्मे। कहते हैं कि एक फकीर को सुनकर पहली बार उन्हें संगीत और गायन का परिचय मिला।

मोहम्मद रफी की काबिलियत का अंदाजा इसी बात से होता है कि फिल्म निर्माता Michel Gondry ने मशहूर गीत- मेरा मन तेरा प्यासा (गाइड) को अपनी फिल्म- Eternal Sunshine of the Spotless Mind में लेना चाहते थे।

मोहम्मद रफी ने अपने शानदार करियर में 7,400 से अधिक गाने गाए। निधन के 42 साल बाद भी, उनके गीत सदाबहार हैं और भरपूर मनोरंजन करते हैं।

भोपाल के मंसूर अहमद फारूकी खुद को मोहम्मद रफी का सबसे बड़ा फैन बताते हैं। उन्होंने अपने पूरे घर को रफी की विरासत, 5,000 गानों को सुरक्षित रखने के लिए संग्रहालय में कन्वर्ट कर दिया है।

फारूकी मोहम्मद रफी संग्रहालय साल में केवल दो बार खोलते हैं। उनकी पुण्यतिथि- 31 जुलाई और 24 दिसंबर को उनकी जयंती पर।

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