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राज कपूर : 'शो मैन' ने 10 साल से शुरू की एक्टिंग, 5 फिल्में जरूर देखें

राज कपूर अभिनय और फिल्म मेकिंग की दुनिया में ऐसा नाम हैं, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं। 14 दिसंबर को जन्मदिन के मौके पर एक नजर उनकी लाइफ की आइकॉनिक फिल्मों पर। सिने जगत के लोगों को ये फिल्में जरूर देखनी चाहिए।
Jyoti Bhaskar

राज कपूर फिल्म अभिनेता, निर्माता, और निर्देशक के रूप में सक्रिय रहे।

दो दशक से अधिक लंबे और शानदार करियर में Raj Kapoor को 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 11 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले।

1935 में महज 10 साल की उम्र में पहली बार की 'इंकलाब' फिल्म में दिखे राज कपूर सिल्वर स्क्रीन के दिग्गज पृथ्वीराज कपूर के पुत्र हैं। बतौर एक्टर राज कपूर को बड़ा ब्रेक डेब्यू के 12 साल बाद मिला।

1947 में आई फिल्म 'नील कमल' में राज कपूर लीड एक्टर बने। मधुबाला भी बतौर एक्टर पहली बार प्रधान नायिका की भूमिका में दिखीं।

कला जगत में योगदान के लिए 1971 में पद्म भूषण से सम्मानित राज कपूर को 1987 में 'शो मैन' को सबसे बड़े अवॉर्ड दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया

'आवारा' (1951) और 'बूट पॉलिश' (1954) जैसी कालजयी फिल्मों के कारण राज कपूर को कान्स फिल्म फेस्टिवल में पाल्मे डी'ओर ग्रैंड पुरस्कार के लिए दो बार नामित किया गया।

सिनेमा जगत की किंवदंती 'शो मैन' राज कपूर ने कई फिल्में बनाईं जो सदाबहार हैं। एक नजर सिने जगत के 'धूमकेतु' राज कपूर की ऐसी 5 फिल्मों पर

राज कपूर ने इस फिल्म में मुख्य किरदार के अलावा निर्देशक की भूमिका भी निभाई। सिल्वर स्क्रीन की टाइम के लिहाज से सबसे लंबी फिल्मों में शुमार 'मेरा नाम जोकर' में दो बार इंटरवल होता है।

'मेरा नाम जोकर' (1970)

जोकर के जीवन पर आधारित फिल्म में राज कपूर ने दिखाया कि कैसे एक कलाकार अपने दुखों का इस्तेमाल दर्शकों को हंसाने के लिए करता है। इसी फिल्म ने बॉलीवुड में ऋषि कपूर की शुरुआत भी की।

'मेरा नाम जोकर' (1970)

इस रोमांटिक फिल्म का निर्देशन, निर्माण और संपादन तीनों राज कपूर ने किया। वैजयंतीमाला और राजेंद्र कुमार भी प्रमुख भूमिकाओं में दिखे। हिंदी सिनेमा के कुछ सदाबहार गाने- 'हर दिल जो प्यार करेगा', 'दोस्त दोस्त ना रहा' भी इसी फिल्म के हैं।

संगम' (1964)

67 साल पहले बनी इस फिल्म को कमाई के पैमाने पर भी याद रखा जाता है। कहानी ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखी। फिल्म के निर्देशन और निर्माण का जिम्मा खुद शो मैन राज कपूर ने संभाला

श्री 420 (1955)

श्री 420 का एक और गाना- 'प्यार हुआ इकरार हुआ' भी बेहद लोकप्रिय हुआ। दशकों बाद इस सदाबहार गाने के कई रीमिक्स वर्जन भी बने। आइकॉनिक गाने में नरगिस और राज कपूर बरसात में एक ही छतरी के नीचे दिखते हैं।

श्री 420 (1955)

क्राइम-रोमांटिक ड्रामा जॉनर की इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन खुद राज कपूर ने किया। पटकथा ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखी। पिता पृथ्वीराज कपूर और नरगिस मुख्य भूमिकाओं में दिखे। 'आवारा' बॉलीवुड के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।

आवारा' (1951)

बासु भट्टाचार्य के निर्देशन में बनी तीसरी कसम को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। 56 साल पहले बनी कॉमेडी-रोमांटिक ड्रामा- तीसरी कसम हिंदी उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु की लघु कहानी 'मारे गए गुलफाम' पर आधारित है। वहीदा रहमान ने यादगार भूमिका निभाई है।

'तीसरी कसम' (1966)

'तीसरी कसम' भोले-भाले बैलगाड़ी चालक हीरामन (राज कपूर) की कहानी है, जिसे एक थियेटर में नर्तकी हीराबाई (रहमान) से प्यार हो जाता है। शंकर-जयकिशन की जोड़ी के संगीत से फिल्म कालजयी बन गई।

'तीसरी कसम' (1966)

'दी शो मस्ट गो ऑन' का संदेश देने वाले भारतीय सिनेमा के 'शो मैन' Raj Kapoor जून 1988 में चिर निद्रा में सो गए। उनकी फिल्में दशकों बाद आज भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती हैं

मुंबई के चेंबूर में बने RK Studios को कपूर खानदान की विरासत माना जाता था। इसे अब रियल एस्टेट डेवलपर्स गोदरेज प्रॉपर्टिज लिमिटेड (GPL) आवासीय परिसर बना रहा है।

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