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MLC के लिए कौन करता है वोटिंग, कितनी होती है सैलरी

जानिए कैसे होता है MLC का चुनाव और किस-किस को होता है इस चुनाव में वोट डालने का अधिकार।
यूपी में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब 9 अप्रैल को एमएलसी यानी उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए सदस्यों को चुना जाएगा।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की कुल 100 सीटें हैं और इन सभी सीटों के लिए 5 अलग-अलग तरीकों से सदस्यों का चुनाव किया जाता है।
100 सीटों में से 38 सदस्यों को राज्य के विधायक और 36 सदस्यों को स्थानीय निकाय के जनप्रतिनिधि (प्रधान, सभासद आदि) चुनते हैं।
8 सदस्यों का चयन शिक्षकों और 8 का चयन स्नातक छात्रों द्वारा होता है। जबकि, 10 सदस्य राज्यपाल की तरफ से मनोनीत किए जाते हैं।
फिलहाल MLC की 36 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, जिसमें पार्षद, सभासद, जिला पंचायत सदस्य, प्रधान, बीडीसी सदस्य आदि वोट डालेंगे।
एमएलसी का कार्यकाल 6 साल के लिए होता है और उसे मिलने वाला वेतन व भत्ते करीब-करीब विधानसभा सदस्य (MLA) के बराबर ही होते हैं।
हाल ही में खत्म हुई 17वीं विधानसभा में एक विधायक को कुल 95000 रुपए मासिक वेतन मिलता था, जिसमें 25000 रुपए बेसिक सैलरी थी।
इसके अलावा विधायक के इस वेतन में निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के 50 हजार रुपए और सचिवालय भत्ते के रूप में 20 हजार रुपए भी शामिल हैं।
विधानसभा और विधान परिषद में एक सबसे बड़ा अंतर यह होता है कि विधान परिषद कभी भी भंग नहीं होती है।
उत्तर प्रदेश सहित देश के कुल 6 राज्यों- आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी विधान परिषद है।
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