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'बस एक मां है जो खफा नहीं होती', पढ़ें मुनव्वर राणा के चुनिंदा शेर

8 मई को Mothers Day है।
'मां' ऊपर वाले की वो नेमत हैं, जिसके आगे खुदा भी नतमस्तक हो जाता है।
यूं तो मां के लिए जितना कहा जाए या लिखा जाए वो कम ही है लेकिन 'मदर्स डे' का जश्न तब तक अधूरा है, जब तक उसमें मशहूर शायर मुनव्वर राणा की शायरी का जिक्र ना हो।
शायर मुनव्वर राणा ने 'मां' पर जो कहा है, वो अपने आप में अनोखा और दिल को छू लेने वाला है।
'जरा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाये, दिये से मेरी मां मेरे लिए काजल बनाती है'
'मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना'
'लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती,बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती'
'लिपट को रोती नहीं है कभी शहीदों से ,ये हौंसला भी हमारे वतन की मांओं में है'
'किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई'
'मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं,मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं'
कौन है बोरिया मजूमदार?